मॉनसून की देरी से खरीफ सीजन की रफ्तार सुस्त, महाराष्ट्र में सिर्फ 1% बुवाई पूरी

महाराष्ट्र में मॉनसून की रफ्तार धीमी पड़ने से खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हुई है. राज्य कृषि विभाग के अनुसार जून के मध्य तक केवल 1 प्रतिशत बुवाई ही हो सकी है.

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खरीफ की बुवाई (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर) खरीफ की बुवाई (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

ओंकार बहुगुणा

  • पुणे,
  • 20 जून 2026,
  • अपडेटेड 8:00 AM IST

महाराष्ट्र में मॉनसून की देरी का असर खरीफ सीजन की शुरुआत पर साफ दिखाई दे रहा है. राज्य कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जून के मध्य तक राज्य में केवल 1 प्रतिशत बुवाई पूरी हो पाई है. सामान्य तौर पर इस समय तक कई जिलों में बुवाई का काम तेज गति से चल रहा होता है, लेकिन पर्याप्त बारिश न होने के कारण किसान इंतजार की रणनीति अपना रहे हैं.

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बारिश की अनिश्चितता को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किसानों से जल्दबाजी में बुवाई न करने और अनुकूल मौसम का इंतजार करने की अपील की थी. कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसानों द्वारा बरती गई सावधानी से संभावित नुकसान टला है. अगर पर्याप्त नमी के बिना बुवाई की जाती तो फसलों को नुकसान पहुंच सकता था और दोबारा बुवाई की नौबत आ सकती थी.

राज्य के कई हिस्सों में किसान पहले ही मौसम की मार झेल चुके हैं. मई महीने में हुई बेमौसम बारिश से रबी फसलों को नुकसान पहुंचा था. ऐसे में मॉनसून की देरी ने किसानों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है, क्योंकि खरीफ सीजन की तैयारियां अपने महत्वपूर्ण चरण में हैं.

इस बीच कृषि विभाग ने किसानों के लिए विशेष सलाह जारी करना शुरू कर दिया है. विभाग ने संभावित कम बारिश को ध्यान में रखते हुए कुछ क्षेत्रों में कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों को अपनाने और जल संरक्षण उपायों पर जोर देने की सलाह दी है. किसानों से मौसम विभाग (IMD) के पूर्वानुमानों पर नजर रखने और उसी के अनुसार कृषि कार्यों की योजना बनाने को कहा गया है.

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विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अगले सप्ताह मॉनसून सक्रिय होता है और अच्छी बारिश होती है, तो बुवाई में तेजी आ सकती है. हालांकि एल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए बारिश के पैटर्न को लेकर अभी भी चिंता बनी हुई है. ऐसे में किसानों को सतर्क रहकर वैज्ञानिक सलाह और मौसम पूर्वानुमानों के आधार पर निर्णय लेने की सलाह दी जा रही है.

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