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Maharahtra: ड्रोन तकनीक से सांगली के हजारों एकड़ खेतों में फर्टिलाइजर का छिड़काव, जानें इस नए प्रयोग के बारे में सब

Octocopter Drone technology for spraying fertilizers to boost Agriculture : ड्रोन से खेतों में फर्टिलाइजर का स्‍प्रे हो रहा है, पश्चिमी महाराष्‍ट्र (West Maharashtra) के वालवा इलाके के (Walwa region) सांगली जिले में प्रतीक पाटिल (Pratik patil) नाम के शख्‍स इस तकनीक पर काम कर रहे हैं.

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Drone technology for spraying fertilizers to boost Agriculture
Drone technology for spraying fertilizers to boost Agriculture
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ड्रोन से हो रहा है फर्टिलाइजर का स्‍प्रे
  • महाराष्‍ट्र के सांगली जिले में प्रयोग
  • किसानों का हुआ फायदा

Drone technology for spraying fertilizers In Maharashra's Sangli: खेती में नई तकनीक हमेशा से किसानों के लिए फायदेमंद रहती है, एक ऐसी ही खास तकनीक महाराष्‍ट्र (Mahrashtra) के वालवा इलाके (Walwa region)  के सांगली जिले (Sangli) में प्रतीक पाटिल ने शुरू की है. जिसमें ड्रोन के माध्‍यम से फसल में फर्टिलाइजर का छिड़काव हो रहा है. इस तकनीक को प्रतीक ने शुरू किया तो सांगली की राजारामबापू शुगर फैक्‍ट्री ने अपनाया. इससे किसानों को फायदा हो रहा है साथ ही उनके समय की बचत भी हो रही है. फिलहाल कंपनी Octocopter ड्रोन का प्रयोग कर रही है. 

कैसे शुरू हुआ अभियान

प्रतीक ने खेती किसानी की नई पहल के लिए 22 शेतकारी परिसंवाद किए, जिसमें उनकी मुलाकात 4900 से ज्‍यादा किसानों से हुई. इस दौरान उन्‍होंने इस ड्रोन तकनीक से खेती के बारे में किसानों को बताया. प्रतीक कहते हैं, 'किसी भी नई तकनीक को स्‍वीकार करना, वह भी खेती किसानी में ...ये थोड़ा मुश्किल है'. प्रतीक की पहचान इलाके में खेती किसानी के लिए नई तकनीक लाने के लिए की जाती है, उन्‍होंने ही इलाके में ड्रिप से सिंचाई करने की शुरुआत की थी.

जानें कैसे ड्रोन से हो रही है खेती ?

सामान्‍य तौर पर समझें तो किसान फसल के लिए हर काम खुद ही करता है, यानी खेती पूरी तरह शारीरिक श्रम पर आधारित होती है. अगर किसान 1 एकड़ में गन्‍ना उगा रहा है तो उसे 1000 रुपए फर्टिलाइजर के छिड़काव के लिए मजदूरों को देने होंगे. साथ ही 200 लीटर पानी खर्च होगा, बड़ी मात्रा में कीटनाशक केमिकल भी चाहिए होगा.

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इन सबको दूर करने के लिए प्र‍तीक ने तब कोरोना काल में ड्रोन तकनीक का प्रयोग शुरू किया, जब मजदूरों का अभाव था. इसके लिए उन्‍होंने एक कंपनी के साथ पाटर्नरशिप की, ड्रोन भी बेहद कम कीमत पर मिल गए. जिससे करीब कुल लागत की 40 प्रतिशत बचत हो गई. वहीं ड्रोन के आने से 10 लीटर पानी में ये सब कुछ हो गया है. समय भी 5 से 10 मिनट का लगा, पहले एक एकड़ में छिड़काव में करीब 4-5 घंटे लग जाते थे. 

 

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