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'सिर फोड़ देना...' वाले SDM के ट्रांसफर से नाराज किसान, बोले- ये प्रमोशन है, सजा नहीं

किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि हरियाणा सरकार ने दोषी एसडीएम को सजा नहीं सुनाई है. बल्कि उसका ट्रांसफर कर सुरक्षा देने की कोशिश की है. प्रेस रिलीज में लिखा है कि ये तो सिर्फ सुरक्षा के साथ प्रमोशन दे दिया गया है. इसे सजा तो कहा ही नहीं जा सकता.

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'सिर फोड़ने' वाले SDM के ट्रांसफर से नाराज किसान 'सिर फोड़ने' वाले SDM के ट्रांसफर से नाराज किसान
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 'सिर फोड़ने' वाले SDM के ट्रांसफर से नाराज किसान
  • बोले- ये प्रमोशन है सजा नहीं
  • केंद्र की धान खरीद नीति से बिफरे

हरियाणा सरकार द्वारा करनाल एसडीएम आयुष सिन्हा का ट्रांसफर कर दिया गया है. लंबे समय से किसान मांग कर रहे थे कि एसडीएम के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. अब उस बीच उनका ये ट्रांसफर कर दिया गया है.लेकिन किसान इससे खुश नहीं हैं. उन्होंने एक प्रेस रिलीज कर अपनी नाराजगी जाहिर कर दी है.

करनाए एसडीएम का तबादला, किसान क्यों नाराज?

किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि हरियाणा सरकार ने दोषी एसडीएम को सजा नहीं सुनाई है. बल्कि उसका ट्रांसफर कर सुरक्षा देने की कोशिश की है. प्रेस रिलीज में लिखा है कि ये तो सिर्फ सुरक्षा के साथ प्रमोशन दे दिया गया है. इसे सजा तो कहा ही नहीं जा सकता. हरियाणा सरकार एक आरोपी को बचाने की विफल कोशिश कर रही है. जब तक एसडीएम के खिलाफ 6 सितंबर तक हत्या के चार्च नहीं लगा दिए जाते, ये विरोध प्रदर्शन जारी रहने वाला है. हम सभी किसान करनाल लघु सचिवालय का घेराव करेंगे.

वहीं किसानों द्वारा जानकारी दी गई है कि मुजफ्फरनगर में किसान महापंचायत की तैयारी शुरू कर दी गई है. इस महापंचायत को सफल बनाने के लिए कई मीटिंग कर ली गई हैं और कई जिलों से संपर्क साधा जा रहा है. दावा किया जा रहा है कि पांच सितंबर को एक ऐतिहासिक महापंचायत को अंजाम दिया जाएगा.

किसानों पर लाठीचार्च, बिफरे कार्यकर्ता

सयुंक्त किसान मोर्चा ने उस लाठीचार्च की भी कड़े शब्दों में निंदा की है जो KKU के कार्यकर्ताओं संग पंजाब में उस समय की गई जब वे अकाली दल के नेता सुखबीर बादल से मिलने जा रहे थे. उन पर लाठीचार्च किया गया था. किसानों ने मांग की है कि उन तमाम अधिकारियों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाए जिन्होंने शांति से प्रदर्शन कर रहे किसानों पर बल का यूं प्रयोग किया.

केंद्र की इस योजना का बहिष्कार?

प्रेस रिलीज में किसानों ने केंद्र सरकार की नई योजना की भी निंदा की है. उनकी तरफ से स्पष्ट कर दिया गया है कि उन्हें सरकार की धान खरीद की नई योजना मंजूर नहीं है. उस नई योजना के तहत केंद्र ने नमी की मात्रा, टूटे हुए अनाज और लाल अनाज की मात्रा को पहली की तुलना में कम कर दिया है. अब विरोध इसलिए किया जा रहा है क्योंकि किसान उल्टा इस मात्रा के बढ़ाने के पक्ष में थे. ऐसे में किसानों ने एक बार केंद्र सरकार को किसान विरोधी करार दिया है और इस नई योजना का ही बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया है. 

 

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