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पंजाब में महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर, घर पर शुद्ध तेल तैयार करके कर रहीं हजारों रुपये की कमाई

पंजाब के गांव की महिलाएं निजी कंपनी से मिली आर्थिक सहायता से तेल निकालने की मशीन लगा कर सरसों, नारियल, बादाम का तेल निकालकर बेचने का काम कर रही हैं. इस मशीन का नाम कोल्ड वुडन प्रेस है, जोकि आईसीआईसीआई फाउंडेशन की ओर से एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पंजाब में लाई गई है. फिलहाल, पूरे पंजाब में 10 मशीनें काम कर रही हैं.

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तेल निकालकर कमाई कर रहीं महिलाएं तेल निकालकर कमाई कर रहीं महिलाएं

पंजाब के गांवों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार आईसीआईसीआई फाउंडेशन योग के साथ स्वयं सहायता समूह चला रही है. इसके तहत, मलेरकोटला जिले के गांव हिमताना की महिलाएं निजी कंपनी से मिली आर्थिक सहायता से तेल निकालने की मशीन लगा कर सरसों, नारियल, बादाम का तेल निकालकर बेचने का काम कर रही हैं. इस मशीन का नाम कोल्ड वुडन प्रेस रखा है, जोकि आईसीआईसीआई फाउंडेशन की ओर से एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पंजाब में लाई गई है. फिलहाल, पूरे पंजाब में 10 मशीनें काम कर रही हैं.

गांव की पांच उन महिलाओं का एक समूह तैयार किया गया है जो काम के लिए बाहर नहीं जा सकती थीं और उनको रोजगार की सख्त जरूरत थी. महिलाओं के इन ग्रुप को 2 लाख 50 हजार रुपये, एक तेल निकालने की मशीन फ्री में लगाकर दी गई. इसके चलते ये महिलाएं सरसों, नारियल और बादाम का तेल निकाल कर गांव में बेंच रही हैं. गांव और आसपास के गांवों के लोग भी इसे खरीद रहे हैं क्योंकि यह तेल अन्य तेलों की तुलना में 25 प्रतिशत कम लागत से बनता है और यह तेल खाना बनाने के लिए दूसरे तेलों की गुणवत्ता से ज्यादा अच्छा होता है. जो लोग इसको खरीदनी आते हैं उनकी आंखों के सामने ही इन तेलों को तैयार किया जाता है, जिसमें किसी प्रकार का कोई केमिकल नहीं डाला जाता. 

'आजतक' से बातचीत में ग्रुप लीडर सुखबीर कौर बताती हैं कि वह एक हाउसवाइफ हैं. उनके दो बच्चे हैं और उनके पति बाहर काम करने के लिए जाते हैं, उनके खुद के पास कोई काम नहीं था. लेकिन पिछले 2 साल से वो एक हेल्प ग्रुप के साथ जुड़ीं, जिसे पंजाब सरकार चला रही थी. इसके बाद सरकार के ऑफिसरों से उन्हें इस स्वयं सहायता समूह के बारे में पता चला. इसके बाद सुखबीर कौर ने अपने गांव की 5 महिलाओं को इकट्ठा किया. 

उन्होंने बताया कि अभी वो फिलहाल तीन तरह का तेल निकालती हैं, जिसमें सरसो का ऑयल, नारियल का ऑयल और बादाम का ऑयल शामिल है. सबसे ज्यादा बिक्री सरसों के तेल की होती है जिसको ढाई सौ रुपए प्रति लीटर तक बेचा जाता है. इतनी कीमत पर लोग बड़ी आसानी के साथ तेल खरीदकर लेकर जाते हैं. सुखबीर कौर ने बताया कि सभी महिलाएं अलग-अलग काम पर लगती हैं. कोई तेल निकालती है, कोई उसकी पैकिंग करती है तो कोई उसके ऊपर लेबल लगाती है.  

समूह मेंबर प्रदीप कौर बताती हैं कि उनके घर में तीन बेटियां हैं उनके पास कोई काम नहीं था तभी सुखबीर से उन्हें इस ग्रुप के बारे में पता चला. इसके बाद उन्होंने एक समूह बनाकर तेल निकालना शुरू. प्रदीप कौर ने बताया कि पहले हम इस तेल को निकालते है फिर हम दूसरे गांव में शहरों में दुकानों और होटलों में जाकर बताते हैं कि हम ऐसे अपने घर में तैयार करते हैं तो वो लोग हमसे तेल खरीदते हैं और अगली बार खुद आकर हमसे तेल खरीदते हैं. उन्होंने बताया कि अब अब हमसे इतनी डिमांड पूरी नहीं हो रही जितनी डिमांड आ रही है. 

गांव की महिला करनैल कौर ने  बताया कि हम यहां से जो तेल खरीदते हैं वह बाजार के तेल से अधिक चिकना और शुद्ध होता है. इस तेल को सिर पर लगाने के अलावा हम परांठे, सब्जी आदि में भी इसका इस्तेमाल करते हैं. ब्लॉक प्रभारी अमरगढ़ डी, भूपेंद्र सिंह ने बताया कि पंजाब राज देहाती आजीविका मिशन सेल्फ हेल्प ग्रुप  की ओर से 10 से 12 महिलाओं का एक ग्रुप बनाया जाता है, जहां से वह अपनी थोड़ी सी बचत इकट्ठा करती हैं. फिर उनको बैंकों के साथ जोड़ा जाता है और यह काम सरकार की ओर से करवाया जाता है. जो महिलाएं इस ग्रुप से जुड़ जाती हैं, उनको उनका रोजगार प्रोवाइड कराया जाता है.

फिलहाल संगरूर और मलेरकोटला में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पांच सरसों की कची घनी तेल निकालने के लिए प्रोजेक्ट लगाए गए हैं. इसमें महिलाएं हजारों रुपये कमा रही हैं. एक महिला ने बताया कि हमारे पास से लोग इसकी गुणवत्ता अच्छी देखकर ढाई सौ रुपए प्रति लीटर खर्च करके तेल लेकर जा रहे हैं. इससे उनका सीधा 70 रुपये का फायदा हो रहा है. बता दें कि एक समूह को जिसको 5 महिलाओं का ग्रुप चलाता है तो 50 से 60,000 रुपये प्रति महीना का खर्चा निकाल कर बचत होती है.

 

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