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Success Story: इस महिला किसान को मिल चुके हैं कई अवॉर्ड, खेती से कमा रही 25 लाख रुपये सालाना

ललिता ने सबसे पहले पहले 2 से 3 एकड़ में ज्वार मूंगफली की जैविक खेती शुरू करी. समय के साथ-साथ अनुभव बढ़ता गया. अपनी मेहनत और लगन के बल पर आज 40 एकड़ की जमीन पर आम सीताफल नींबू, आंवला, चीकू, गेहूं और डॉलर चना जैविक तरबूज की खेती कर रही हैं. इससे वह 20 से 25 लाख रुपये सालाना मुनाफा कमा रही हैं.

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Farming news
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मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के रहने वाली ललिता मुकाती पिछले 10 वर्षों से ऑर्गेनिक खेती कर रही हैं. वह पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए एक मिसाल बन कर सामने आई हैं. बीए तक पढ़ाई कर चुकी ललिता आम गृहणी थीं. जब उनके बच्चे बड़े हो गए तो पति के साथ खेती में हाथ बंटाना शुरू कर दिया है. कुछ साल तक रासायनिक खेती की, फिर लोगों को बीमारियों से परेशान होता देख जैविक खेती की तरफ रुख किया.

ललिता ने सबसे पहले 2 से 3 एकड़ में ज्वार, मूंगफली की जैविक खेती शुरू की और समय के साथ-साथ अनुभव बढ़ता गया. अपनी मेहनत और लगन के बल पर आज 40 एकड़ की जमीन पर आम, सीताफल, नींबू, आंवला, चीकू, गेहूं, डॉलर चना और जैविक तरबूज की खेती कर रही हैं.

ललिता द्वारा अपनी इस उपलब्धि को सरकार और विभिन्न संगठनों ने सराहा भी है. वर्ष 2018 में दिल्ली में आईसीआर (भारतीय राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र) द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर द्वारा हलदर ऑर्गेनिक अवार्ड से सम्मानित होने का अवसर मिला. साथ ही वर्ष 2019 में दिल्ली में पूसा अनुसंधान कृषि मेले में दिल्ली में इनोवेटिव फार्मर के रूप में अवार्ड भी मिल चुका है. 2019 में ग्वालियर में राज माता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय द्वारा सम्मानित किया गया.

ट्रेनिंग के लिए आती हैं

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ललिता बताती हैं कि उनके खेत में जैविक खेती का प्रशिक्षण लेने और जानकारी प्राप्त करने के लिए खंडवा कृषि विश्वविद्यालय के छात्र छात्राओं सहित कई अलग-अलग क्षेत्रों से कृषक और एनजीओ से जुड़े लोग भी जानकारी और प्रशिक्षण लेने के लिए आते हैं.

 परिवार का मिला है सपोर्ट 

ललिता बोलती हैं कि बच्चों के बड़े होने के बाद परिवार ने उन्हें भरपूर सपोर्ट किया. ललिता के ससुर अंबाराम मुकाती द्वारा उन्हें काफी प्रोत्साहित मिला. वहीं, पति सुरेश चंद मुकाती द्वारा हर संभव मदद और प्रोत्साहन दिया गया. परिवार के चलते ही वह आज इस मुकाम पर हैं. ललिता अपने खेत में 7 जैविक खाद का निर्माण करती हैं. इन खाद के निर्माण के लिए उन्होंने यूनिट बना रखी है.

रासायनिक और जैविक खेती के खर्चे में आता है बड़ा फर्क

ललिता बताती है कि रासायनिक और जैविक खेती में बड़ा अंतर खर्च का आता है. अगर 1 एकड़ खेती रासायनिक तौर पर की जाए तो खर्च 30 हजार प्रति एकड़ तक होता है. वहीं जैविक खेती में मात्र 5 हजार का खर्चा आता है. वहीं, अगर कमाई की बात करें तो रासायनिक की तुलना में जैविक खेती में 20% से अधिक मुनाफा होता है. वहीं जैविक खेती का माल बेचने में आसानी होती है और बड़ी संख्या में उसके खरीदार मिलते हैं. ललिता बताती हैं कि जैविक खेती के माध्यम से उनकी सालाना इनकम 20 से 25 लाख रुपए होती है.

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