तिलहन की फसलें देश की अर्थव्यवस्था में मुख्य भूमिका निभाती है. सूरजमुखी, सोयाबीन, मूंगफली, अरंडी, तिल, राई और सरसों, अलसी और कुसुम जैसी फसलों की खेती कर किसान अच्छा मुनाफा कमाता है. फिलहाल इस महीने में गेहूं के साथ-साथ किसानों ने सरसों की खेती की शुरुआत कर दी है. यहां हम आपको सरसों की 5 किस्मों के बारे में बता रहे हैं जिसकी खेती कर बंपर पैदावार हासिल कर सकते हैं,
पूसा सरसों आर एच 30 – सरसों की ये किस्म हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी राजस्थान क्षेत्रों में उगाई जाती है. 130 से 135 दिनों में फसल के तैयार होती है. इसकी उपज 16 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है. इसमें तेल की मात्रा लगभग 39 प्रतिशत तक होती है.
राज विजय सरसों-2 – मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश के इलाकों में सरसों की इस किस्म की बड़े पैमाने पर खेती होती है. फसल 120 से 130 दिनों में तैयार हो जाती है और 20 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार है. इसमें तेल की मात्रा 37 से 40 प्रतिशत तक पाई जाती है.
पूसा सरसों 27 – इस किस्म को भारतीय कृषि अनुसंधान केंद्र, पूसा, दिल्ली ने विकसित किया है. फसल 125 से 140 दिनों में पककर तैयार होती है. इसमें तेल की मात्रा 38 से 45 प्रतिशत तक होती है.पैदावार क्षमता 14 से 16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है.
पूसा बोल्ड – ये किस्म राजस्थान, गुजरात, दिल्ली और महाराष्ट्र के इलाकों में ज़्यादा उगाई जाती है. ये 130 से 140 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है. पैदावार क्षमता 18 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रहती है. इसमें तेल की मात्रा लगभग 42 प्रतिशत तक होती है.
पूसा सरसों- 25: ये किस्म 100 दिन में तैयार हो जाती है. एक हेक्टेयर में पूसा सरसों- 25 की बुवाई कर 14.5 क्विंटल पैदावार प्राप्त कर सकते हैं.