Akarkara Farming: देश में औषधीय पौधों की खेती करने वाले किसानों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. सरकार भी अपने स्तर पर इन पौधों की खेती को लगातार प्रोत्साहित कर रही है. बता दें कि ये फसलें कम संसाधन और कम मेहनत में ही किसानों को दोगुना मुनाफा दे जाती हैं.
दवाएं बनाने में होता है इस्तेमाल
अकरकरा इसी तरह का एक औषधीय पौधा है. इसकी जड़ों का इस्तेमाल दवाओं को बनाने में किया जाता है. आयुर्वेद में लकवाग्रस्त मरीजों को शहद के साथ अकरकरा के बीजों के सेवन की सलाह दी जाती है. बता दें कि इसकी खेती भुरभुरी और नरम मिट्टी पर करना बेहद लाभकारी होता है. ध्यान रखें जिस भी खेत में अकरकरा की खेती करें वहां जलनिकासी की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध होनी चाहिए. जलभराव की स्थिति में पौधे को काफी नुकसान पहुंच सकता है.
इसकी खेती के लिए कितने तापमान की जरूरत
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में इस पौधे की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. इसकी खेती पर सर्दी और गर्मी का ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता है. विशेषज्ञों के अनुसार इसके पौधे के अंकुरण के लिए 25 डिग्री तक के तापनमान की आवश्यकता होती है. वहीं पौधे के अच्छे विकास के लिए 15 से 30 डिग्री तक का तापमान उपयुक्त होता है.
पौध और बीज दोनों माध्यम से करें खेती
अकरकरा की खेती आप पौध और बीज दोनों माध्यम से कर सकते हैं. इसकी खेती को बीज के रूप में करना चाहते है तो आपको प्रति एकड़ तीन किलो बीजो की जरूरत होगी और यदि पौध के रूप में करना चाहते है तो दो किलो बीज में ही काम चल जाएगा. यह पौधे रोपाई के 6 महीने के भीतर ही खुदाई के लिए तैयार हो जाते है. जब इसकी पत्तियां पीले रंग की हो जाएं तो इन्हें जड़ से उखाड़ना शुरू कर देना चाहिए. इस दौरान जड़ों को काट कर पौधे से अलग कर लेना चाहिए. इसकी खेती में प्रति एकड़ फसल में डेढ़ से दो क्विंटल तक बीज और 8 से 10 क्विंटल तक जड़े प्राप्त होती.
इतना है मुनाफा
बता दें कि अकरकरा के जड़ों की कीमत बाजार में 20 हजार रुपये है. वहीं इसके बीज 10 हजार रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से बिकते हैं. अगर किसान एक एकड़ में 40 से 50 हजार रुपये भी लगाकर इस पौधे की खेती करता है तो भी आराम से 2 से 3 लाख तक का मुनाफा हासिल कर सकता है.