देश के अधिकतर राज्यों में खरीफ फसलों की बुवाई-रोपाई चल रही है. इस बीच कई राज्यों में मॉनसून के चलते बारिश का सिलसिला भी जारी है. औसत से अधिक बारिश के चलते पंजाब और हरियाणा जैसे कृषि प्रधान राज्य भी भारी जलजमाव की स्थिति का सामना कर रहे हैं. किसानों की फसलें चौपट होने की खबरें भी आ रही है. ऐसे किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना एक बढ़िया विकल्प बनकर सामने आया है.
खेती-किसानी कभी आसान कार्य नहीं रहा है. किसानों को कभी बारिश की मार तो कभी सूखे की स्थिति से निपटना पड़ता है. ऐसी स्थितियों में किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट आ जाता है. जलवायु संकट के इस दौर में किसान फसलों का बीमा जरूर करा लें, इससे फसल खराब होने की स्थिति में किसान मुआवजे के हकदार बन जाएंगे. फिलहाल, खरीफ फसलों का बीमा के लिए सरकार ने आवेदन मांगे थे. किसान 31 जुलाई तक अपनी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के पोर्टल( www.pmfby.gov.in) के पोर्टल पर जाकर अपनी फसल का बीमा जरूर करा सकते हैं..
व्यक्तिगत नुकसान पर भी मिलेगा मुआवजा
प्रधानमंत्री योजना के तहत किसान की फसल को अगर व्यक्तिगत नुकसान भी हुआ है तो उसे इसका लाभ मिलेगा. पहले सिर्फ सामूहिक स्तर पर खराब फसल पर लाभ मिलता था. प्राकृतिक आपदाओं के चलते किसानों को फसल बर्बाद होने पर उस नुकसान की भरपाई बीमा कंपनियों द्वारा किया जाता है.
कहां-कहां कर सकते हैं आवेदन
किसान क्रेडिट कार्ड या सहकारी बैंकों से कर्ज लेने वाले किसानों का बीमा ऑटोमेटिक बैंक के माध्यम से हो जाता है. वहीं, अगर आपने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के पोर्टल( www.pmfby.gov.in) पर जाकर आवेदन किया है तो भी आप इस योजना का लाभ ले सकेंगे. साथ ही किसान घर बैठे PMFBY AIDE ऐप के माध्यम से इस योजना के लिए अप्लाई कर सकते हैं. इसके अलावा किसान जन सेवा पर भी जाकर इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं.
इस योजना के अंतर्गत फसली ऋण लेने वाले किसान, गैर ऋणी किसान, बंटाईदार किसानों को शामिल किया जाता है. बंटाईदार किसानों को संबन्ध में स्पष्ट किया किया गया है कि कृषक जिस जिले का निवासी है उस परिधि क्षेत्र में बंटाई की भूमि ही मान्य होगी.
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के पोर्टल के जरिए आवेदन का तरीका -
>PMFBY की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं
>होमपेज पर किसान कॉर्नर पर क्लिक करें
>अब अपने मोबाइल नंबर से लॉगिन करें और यदि आपका खाता नहीं है तो अतिथि किसान के रूप में लॉगिन करें
>सभी आवश्यक विवरण जैसे नाम, पता, आयु, राज्य आदि दर्ज करें.
>अंत में सबमिट बटन पर क्लिक करें.
पीएम फसल बीमा योजना के लिए आवश्यक दस्तावेज
राशन कार्ड
बैंक खाता नंबर जो आधार से लिंक हो.
पहचान पत्र
किसान का एक पासपोर्ट साइज फोटो
खेत का खसरा नंबर
किसान का निवास प्रमाण पत्र.
अगर खेत किराये पर लिया गया है तो खेत के मालिक के साथ इकरार नामा की फोटो कॉपी.
इन दो आधार पर मिलती है बीमा की राशि
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत किसान को दो तरह से बीमा क्लेम मिलता है. प्राकृतिक आपदा की वजह से पूरी फसल बर्बाद होने पर मुआवजा दिया जाता है. इसके अलावा औसत आधार पर फसल उत्पादन कम हो जाए तो भी किसानों को मुआवजा दिया जाता है.
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत इन प्राकृतिक आपदाओं को किया जाता है कवर
1.कम वर्षा अथवा प्रतिकूल मौसमीय परिस्थितियों से बुवाई नही होने की स्थिति में (निष्फल/ बाधित बुबाई) खरीफ फसलों में लिए.
2. खड़ी फसल ( बुबाई से कटाई तक ) में बाढ़ , लंबी अवधि तक सूखा, जलप्लावन, कीट, व्याधि, जलप्लावन, आकाशीय बिजली से आग, तूफान, ओलावर्ष्टि, चक्रवात के कारण उपज में हुए नुकसान को इसमे कवर किया जायेगा.
3. फसल कटाई उपरांत सूखने के लिए खेत या खलिहान में रखी फसल को चक्रवात, चक्रवर्ती बरसात, असामयिक वर्षा, ओलावृष्टि से व्यक्तिगत आधार पर हुए नुकसान के लिए कटाई उपरान्त अधिकतम 14 दिवस की अवधि तक बीमा मान्य है.
72 घंटे के अंदर दे सूचना
अगर प्राकृतिक आपदाओं के चलते कोई बीमित किसान फसल बर्बादी की स्थिति का सामना करता है, तो वह 72 घंटों के अंदर नीचे दिए गए विकल्पों के माध्यम से सूचना दे सकता है.
> क्रॉप इंश्योरेंस ऐप के माध्यम से किसान अपनी बर्बाद हुई फसल की जानकारी दे सकता है.
>बीमा कंपनियों के टोल फ्री नंबर पर कॉल कर सकता है.
> नजदीकी कृषि कार्यालय पर इस बारे में जानकारी दी जा सकती है.
> संबंधित बैंक शाखा और जनसेवा केंद्र विजिट कर सकती है.
नुकसान आकलन के बाद किसानों के खाते में भेजा जाता है मुआवजा
ऊपर दिए गए विकल्पों पर सूचना देने के बाद बीमा कंपनी किसी अधिकृत व्यक्ति को खेतों का मुआयना करने के लिए भेजेगी. वह व्यक्ति खेतों में खराब हो चुकी फसलों का आकलन कर बीमा कंपनी को रिपोर्ट सौंपेगा. इन सब प्रकियाओं के पूरा होने के बाद किसान को उनके मुआवजे मिलता है.
बता दें कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को खरीफ फसलों के लिए 2%, रबी फसलों के लिए 1.5% और बागवानी फसलों के लिए 5% प्रीमियम देना होता है. अधिक जानकारी के लिए आप जन सेवा केंद्र, संबंधित कृषि विभाग के अधिकारी या किसान कॉल सेंटर पर फोन करके संपर्क कर सकते हैं.