
बदले मौसम ने एक ओर जहां लोगों को गर्मी से राहत दी है तो वहीं बेमौसम बरसात किसानों के लिए आफत बनकर सामने आई है. ओलावृष्टि के चलते कई राज्यों में गेहूं की फसल जमीन पर बिछ गई है, साथ ही खेतों में पानी भरने से आलू भी सड़ने की संभावना बढ़ गई है. चने और सरसों की फसल पर भी बेहद बुरा असर पड़ा है. तेज हवा चलने से आम और लीची के बौर को नुकसान पहुंचा है. ऐसे में इस साल आम और लीची के उत्पादन में भी कमी आने की आशंका जताई जा रही है. मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक इसी तरह का मौसम बना रहेगा. इन सबके बीच कर्ज के बोझ के तले डबे किसानों की आत्महत्या करने के मामले भी सामने आ रहे हैं.
कर्ज के बोझ के चलते बंगाल में किसान ने खुद को लगा ली फांसी
बंगाल के हुगली में आलू की खेती करने वाले एक किसान ने आत्महत्या कर ली. किसान आलू की उपज पर सही कीमत नहीं मिलने के चलते परेशान था. कर्ज नहीं चुका पाने के डर ने उसने फांसी लगा ली. मृतक किसान का नाम मनसा राणा 65 बताया जा रहा है. मृतक की पत्नी सुमित्रा राणा के मुताबिक, उनके पति खेत से वापस लौटे. बिना कुछ खाए-पिए कमरे का दरवाजा बंद करके आराम करने चले गए. देर शाम तक जब अंदर से कोई आवाज नहीं आई तो उन्हें कुछ शक हुआ. किसी तरह कमरे का दरवाजा खोला. अदंर देखा तो पति का शव पंखे की सीलिंग से लटक रहा था.
सुमित्रा बताती हैं कि इस बार आलू की पैदावार ठीक नहीं हुई है. इसके अलावा उपज पर मूल्य भी सही नहीं मिल रहा है. उनके पति कर्ज में डूबे हुए थे. इसी कारण वह मानसिक अवसाद से पीड़ित हो गए थे. मृतक किसान के बेटे श्रीमंत राणा ने भी बताया कि उनके पिता ने स्थानीय कोऑपरेटिव सोसाइटी से कर्ज लेकरआलू की खेती की थी. फसल सही नहीं होने और कीमतों में गिरावट के चलते वह कर्ज चुका पाने की स्थिति में नहीं थे. इसके चलते उन्होंने आत्महत्या कर ली.

राजस्थान से भी कुछ ऐसा ही मामला आया सामने
राजस्थान के बूंदी जिले में बारिश और ओलावृष्टि के चलते बर्बाद हुई अपनी 3 बीघा गेहूं की फसल को देखकर किसान ने कीटनाशक पीकर अपनी जान दे दी. यह घटना बूंदी जिले के तालेड़ा थाना इलाके के बाजड गांव की है. परिजनों के मुताबिक किसान पृथ्वीराज सदमे में था. उसके ऊपर आठ लाख के करीब का कर्ज था. फसल को हुए नुकसान को वह झेल नहीं पाया. इसके चलते कीटनाशक पीकर उसने अपनी जान दे दी. किसान को उम्मीद थी कि बेटे की शादी के लिए लिया हुआ कर्ज वह फसल बेचकर चुका देगा. हालांकि, बारिश के चलते उसकी उम्मीदों पर पानी फिर गया.

रायसेन में सदमे से किसान की मौत
इसके अलावा मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में हुई ओलावृष्टि से फसल बर्बादी के सदमें में एक किसान की मौत हो गई. जिले के सिलवानी तहसील के ग्राम पहेरिया में ओलावृष्टि से एक किसान की लगभग 8 एकड़ की गेहूं, चना की फसल बर्बाद हो गई. इससे किसान को भारी सदमा पहुंचा. देर रात उसे हार्ट अटैक आया जिसमें उसकी मौत हो गई. कलेक्टर अरविंद दुबे ने किसान के घर पहुंचकर परिजनों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया.

उत्तर प्रदेश में बारिश ने किसानों की बढ़ाई मुसीबत
पिछले कुछ दिनों से हो रही लगातार बारिश ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं. उत्तर प्रदेश के कई जिलों में गेहूं और सरसों की फसल को बारिश और ओलावृष्टि से काफी नुकसान पहुंचा है. तेज हवाओं और बारिश के चलते लखीमपुर खीरी जिले के अलग-अलग हिस्सों में हजारों एकड़ गेहूं की खड़ी फसल बर्बाद हो गई है.
पूर्वी उत्तर प्रदेश के चंदौली को धान का कटोरा कहा जाता है. यहां धान की बहुत ही अच्छी पैदावार होती है. इसके अलावा दलहन-तिलहन फसलों का भी अच्छा-खासा उत्पादन होता है. बारिश की वजह से खलिहान में रखी हुई सरसों की फसल भीग गई है. इसके अलावा गेहूं और चने की फसल को भारी नुकसान हुआ है. बता दें भदोही, हाथरस, फ़िरोज़ाबाद, बस्ती, जौनपुर जैसे जिलों में भी किसानों को बारिश के चलते काफी नुकसान पहुंचा है.