राजस्थान में एक जिला है भीलवाड़ा. यहां के रहने वाले एक पशुपालक सूरत राम जाट इन दिनों काफी चर्चा में हैं. सूरत राम जाट पहले कॉर्पोरेट जगत में नौकरी करते थे. कार्पोरेट की नौकरी उन्हें ज्यादा दिन तक रास नहीं आई. कुछ ही वक्त में ही नौकरी से इस्तीफा देकर सूरत राम जाट ने देसी गाय पालन की शुरुआत की. अब वह इससे बंपर मुनाफा कमा रहे हैं.
गिर गाय के पालन से शुरू किया पशुपालन का व्यवसाय
सूरत राम के देसी घी की खूब मांग है. उनकी गायों का देसी घी 4500 रुपये प्रति लीटर आसानी से बिकता है. पशुपालक सूरत राम जाट ने बताया कि पहले वे कॉरपोरेट क्षेत्र में नौकरी करते थे. उन्होंने अब देसी गिर नस्ल की गायों के पालन का काम शुरू किया है. वह इन गायों को भगवान श्री कृष्ण के बांसुरी के भजन भी सुनाते हैं.
कान्हा की दीवानी हैं गायें
सूरत राम जाट ने गौशाला की दीवारों पर भगवत गीता भगवान श्री कृष्ण और रामायण से जुड़े कोटेशन लिखवाए हैं. गायों के खाने पीने की आधुनिक व्यवस्था के साथ-साथ हवा के लिए पंखे भी लगा रखे हैं. गौशाला में प्रत्येक 10 फीट पर स्पीकर लगे हुए हैं जिन पर दिन-रात कान्हा के भजन चलते रहते हैं. ये गायें कान्हा के भजन की ऐसी दीवानी हैं कि गौशाला में जब भगवान कृष्ण की बांसुरी के भजन बजते हैं तो वे सभी भगवान के भजन सुनने के लिए इकट्ठा हो जाती हैं.
अभी गौशाला में कुल 70 गायें
सूरत राम जाट ने बताया कि उसके पास अभी गिर और देसी नस्ल की 70 गाय है. इनकी संख्या बढ़ाकर वह 150 से 200 करना चाहते हैं. फिलहाल, उनके पास कांकरेज साहिवाल राठी और थारपारकर नस्ल की गाय हैं. पशुपालक सीताराम जाट ने गाय पालन में भी काफी नवाचार किए हैं. अपनी गाय के चारे के लिए वह किसी प्रकार के रसायनिक खाद का प्रयोग नहीं करते हैं.उसमें केवल देसी गाय के खाद का ही प्रयोग करते हैं.यहां तक कि पशुओं को खिलाने वाले बांटे में भी वह देसी मक्का बाजरा और गुड़ का मिश्रण को तैयार करते हैं.
कमा रहे हैं बंपर मुनाफा
सूरत राम जाट कहते है मैं ब्रीड संवर्धन से इस देसी गायों को बचाने में लगा हुआ हूं. देशी गाय पालन में अन्य गाय पालन की तुलना में मुनाफा अधिक होता है. मेरे पास 70 गाय हैं मैंने पिछले वर्ष एक गाय 2 से 3 लाख रुपए में बेची है. पहले इन गायों का घी ₹2000 प्रति लीटर बिकता था और अब 4500₹ लीटर तक में आसानी से बिक्री हो जाती है.
(भीलवाड़ा से प्रमोद तिवारी की रिपोर्ट)