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पाकिस्तान को किस बात पर अमेरिका ने दी नसीहत?

वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में बीते एक साल में पाकिस्तान में 12 अंकों की गिरावट आई है और अब यह सूची में अफगानिस्तान से भी नीचे है. तीन मई को जारी रिपोर्ट में पाकिस्तान सूची में श्रीलंका और नेपाल से भी नीचे है. अब अमेरिका ने इस रिपोर्ट को लेकर टिप्पणी की है.

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अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन

अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने बुधवार को एक बयान में कहा कि पाकिस्तान में मीडिया संगठनों और नागरिक समाज संगठनों पर अंकुश लगाने की प्रक्रिया से अमेरिका वाकिफ है. अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर इस तरह के प्रतिबंध देश की छवि और विकास की उसकी क्षमता को कमतर करते हैं.

उन्होंने 'वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे' के मौके पर संवाददाता सम्मेलन के दौरान पाकिस्तान के एक पत्रकार के सवाल पर यह बयान दिया.

दरअसल पत्रकार ने सवाल किया, "पाकिस्तान विश्व में उन देशों की सूची में है, जिन्हें पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक देश माना जाता है. पिछले साल कई पत्रकारों की अपराध और भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ करने और सरकार की कुछ नीतियों की आलोचना करने के लिए हत्या कर दी गई थी, उन्हें अगवा किया गया और प्रताड़ित किया गया. क्या विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तानी प्रशासन के साथ इस मुद्दे पर द्विपक्षीय चर्चा की?

इस पर ब्लिंकन ने कहा, संक्षेप में इसका जवाब हां है. हम अपने पाकिस्तानी समकक्षों के साथ इस मामले को उठाते हैं.

उन्होंने कहा, यकीनन, हमने इसे मानवाधिकारों की सालाना रिपोर्ट में भी शामिल किया है और हम पाकिस्तान में मीडिया संगठनों और नागरिक समाज संगठनों पर इन प्रतिबंधों से भी वाकिफ हैं.

वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स के मुताबिक, इस सूचकांक में बीते एक साल में पाकिस्तान में 12 अंकों की गिरावट आई है और अब यह सूची में अफगानिस्तान से भी नीचे है.

बता दें कि रिपोर्टर्स सैन्स फ्रंटियर्स (आरएसएफ) हर साल वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स जारी करता है. आरएसएफ को रिपोर्टर्स विदाउट बॉडर्स के नाम से भी जाना जाता है.

तीन मई को जारी रिपोर्ट में पाकिस्तान सूची में भारत, श्रीलंका और नेपाल से भी नीचे हैं और बांग्लादेश, ईरान और चीन से ऊपर है.

विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने मंगलवार को कहा कि जीवंत एवं स्वतंत्र प्रेस और जागरुक नागरिक पाकिस्तान सहित किसी भी देश और उसके भविष्य के लिए महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने चेताया कि स्वतंत्र मीडिया पर अंकुश लगाने से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कमतर होती है.

उन्होंने कहा, यह पाकिस्तान की छवि और तरक्की की उसकी क्षमता को कमतर करता है. इस मुद्दे को हमारी मुलाकातों के दौरान भी उठाया जाता है.

इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि सरकार प्रेस एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है.

उन्होंने देश के लोकतंत्र की गलत छवि दर्शाने के लिए पूर्ववर्ती पीटीआई सरकारों पर निशाना साधा.

उन्होंने कहा, पूर्ववर्ती इमरान खान सरकार के दौरान प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में पाकिस्तान में 12 अंकों और उनके कार्यकाल के दौरान 18 अंकों की गिरावट आई. इससे न सिर्फ उन्हें प्रेस फ्रीडम प्रिडेटर का शीर्षक मिला बल्कि इससे हमारे लोकतंत्र की भी गलत छवि बनी.

इस बीच वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे की पूर्वसंध्या पर पाकिस्तान फेडरल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (पीएफयूजे) ने देश में प्रेस एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने का संकल्प लिया.

पीएफयूजे ने निवर्तमान सरकार से प्रेस एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया क्योंकि कोई भी सरकार प्रेस एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकारों के बिना अपने उद्देश्यों में सफल नहीं हो सकते.

पीएफयूजे के नेताओं ने सोमवार को जारी संयुक्त बयान में कहा कि इमरान खान सरकार ने पाकिस्तान मीडिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएमडीए) के रूप में और प्रिवेंशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक क्राइम एक्ट (पीईसीए) में संशोधन कर इन कठोर नियमों को लागू किया, जिससे मीडिया पर मार्शल कानून लागू हो सकता था.

बयान में कहा गया, इस तरह के कानूनों को प्रेस एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोंटने और मीडिया को चुप कराने के लिए डिजाइन किया गया लेकिन यह पीएफयूजे और नागरिक समाज संगठनों का सतत अभियान रहा, जिसने सरकार को इन संशोधनों को वापस लेने पर मजबूर किया. बयान में पीटीआई सरकार के कार्यकाल को मीडिया के लिए भयावह बताया गया.

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