अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान की तारीख के लिए करीब 15 दिन का वक्त है. लेकिन इससे पहले ही करीब ढाई करोड़ लोग अपना मत डाल चुके हैं. जो अमेरिकी इतिहास में एक रिकॉर्ड है. कोरोना वायरस संकट के कारण इस बार मेल-इन वोटिंग को बढ़ावा दिया गया है, जिसके तहत अलग-अलग राज्यों से लोग अपने वोट को मेल कर रहे हैं जिनकी गणना 3 नवंबर के मतदान के साथ ही की जाएगी. अमेरिकी चुनावी सिस्टम में इस EBCS कहा गया है, जो इस बार चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभा सकती है.
क्या है ये Early ballots cast system?
अमेरिका में मतदान के लिए नवंबर का पहला सोमवार फिक्स होता है और हमेशा से ही ऐसा ही होता आया है. ऐसे में एक ही दिन में सभी लोगों का मतदान करना मुश्किल होता है. इसलिए अमेरिकी संविधान में एक ऑप्शन दिया गया है, जिसके तहत बैलेट से वोटिंग कर सकते हैं और अपने मत को मेल कर सकते हैं. इसका उपयोग अमेरिकी ग्रामीण इलाकों में रहने वाले या फिर ऐसी जगह रहने वाले जहां से वोटिंग सेंटर दूर है, वो लोग करते हैं. साथ ही बुजुर्गों के लिए ये सुविधा दी जाती है.
मतदान के दिन से करीब 30 दिन पहले से अपनी वोट को पोस्ट किया जा सकता है, हर राज्य में स्थानीय चुनाव आयोग तारीख तय करता है. इसके लिए रजिस्ट्रेशन करना होता है, तब वोट को मेल कर दिया जाता है. हालांकि, इन वोटों की गिनती 3 नवंबर को होने वाले मतदान के बाद ही एक साथ की जाती है.
इस बार कैसे टूट रहा है रिकॉर्ड?
बैलेट के जरिए वोट डालने का रिकॉर्ड इस बार अमेरिका ने तोड़ दिया है. मतदान से दो हफ्ते पहले तक करीब 27 मिलियन यानी 2.7 करोड़ लोग अपना मत डाल चुके हैं. जो एक रिकॉर्ड है, पिछले चुनाव में अबतक ये संख्या करीब तीस लाख के करीब ही थी. इस बार कोरोना संकट के कारण इसमें बढ़ोतरी देखी जा रही है.
क्या चुनाव नतीजे पलट सकते हैं ये वोट?
अमेरिका में इससे पहले इतना मेल इन वोट कभी नहीं हुए हैं, ऐसे में चुनावी पंडितों को लगता है कि चुनावी नतीजे चौंका सकते हैं. लेकिन, जिन राज्यों में अभी तक सबसे अधिक पोस्ट के जरिए वोट डाले जा चुके हैं उन्हें डेमोक्रेटिक पार्टी का गढ़ माना जाता रहा है. इसके अलावा अमेरिकी चुनाव में हर वोटर किसी ना किसी पार्टी का सदस्य होता है जो उसके लिए कुछ वक्त के लिए काम करता है.
ऐसे में अभी तक का ट्रेंड कह रहा है कि ये वोट डेमोक्रेट्स के लिए लाभदायक हो सकते हैं लेकिन ये सिर्फ अनुमान लगाया जा रहा है, ऐसे में कितना नतीजे में बदलता है ये देखने लायक होगा. अभी तक फ्लोरिडा, टेक्सास और कैलिफॉर्निया में सबसे अधिक वोटिंग हुई है.
गौरतलब है कि अमेरिका में अबतक जो ट्रेंड सामने आ रहे हैं, उनमें कई राज्यों में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बिडेन बढ़त बनाए हुए हैं. जबकि डोनाल्ड ट्रंप बढ़े अंतर से पिछड़ रहे हैं. कोरोना संकट, घरेलू हिंसा, विदेश नीति समेत कई मसलों पर डोनाल्ड ट्रंप निशाने पर रहे हैं. हालांकि, पिछले चुनाव में भी ट्रेंड ऐसे ही थे और ट्रंप को कम वोट मिले थे, लेकिन इलेक्टर के दम पर वो चुनाव जीत गए थे.