अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद 26 अगस्त को काबुल एयरपोर्ट पर आत्मघाती हमला हुआ था. इसमें 13 अमेरिकी सैनिकों समेत 200 से ज्यादा लोग मारे गए थे. आईएसआईएस-के ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी. हमले के बाद अमेरिका ने भी बदला लेने के लिए ड्रोन हमला किया था. अमेरिका ने दावा किया था कि इसमें काबुल हमले का मास्टमाइंड मारा गया. लेकिन बाद में इस एयरस्ट्राइक पर सवाल उठने लगे. मीडिया रिपोट्स में दावा किया गया था कि इस हमले में निर्दोष लोग मारे गए. अब अमेरिका ने भी इसे स्वीकार कर लिया है.
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा, ड्रोन हमले की जांच में पता चला है कि इसमें सिर्फ निर्दोष लोग मारे गए थे, ना कि आईएसआईएस के का आतंकी, जैसा पहले माना जा रहा था.
'स्ट्राइक दुखद गलती'
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर जनरल फ्रैंक मैकेंजी ने कहा, स्ट्राइक एक दुखद गलती थी. इससे पहले 29 अगस्त को हुई इस स्ट्राइक में 10 नागरिकों की मौत के बावजूद अमेरिकी अधिकारी इसे सही ठहरा रहे थे. इस हमले में मृतकों में 7 बच्चे भी शामिल थे.
मीडिया रिपोर्ट्स में अमेरिकी दावे पर सवाल उठाए गए थे. साथ ही कहा गया था कि जिस वाहन को टारगेट किया गया था, उसका ड्राइवर लंबे वक्त तक अमेरिकी मानवीय संगठन का कर्मचारी थी. साथ ही रिपोर्ट में कहा गया था कि इस बात के सबूत नहीं हैं कि वाहन में विस्फोटक था.
हमले में 10 नागरिकों की हुई मौत
मैकेंजी ने कहा, मुझे अब विश्वास हो गया है कि उस हमले में सात बच्चों समेत 10 नागरिक दुखद रूप से मारे गए थे. इसके अलावा जांच में पता चला है कि यह संभावना नहीं है कि स्ट्राइक में निशाना बनाया गया वाहन और मारे गए लोग ISIS-K से जुड़े थे और उनसे अमेरिका को कोई सीधा खतरा था. मैकेंजी ने गलती के लिए माफी मांगी और कहा कि अमेरिका पीड़ितों के परिवार को मुआवजा भुगतान करने पर विचार कर रहा है.
अमेरिका के चेयरमैन ऑफ ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टॉफ जनरल मार्क मिली ने कहा, हमले के दो दिन बाद ऐसा लगा था कि यह एक सटीक स्ट्राइक थी. मारे गए लोगों में कम से कम एक आतंकी आईएसआईएस का था, जिसने 26 अगस्त को काबुल एयरपोर्ट पर हमले की जिम्मेदारी ली थी. इस हमले में 13 अमेरिकी सैनिकों समेत 200 लोगों की मौत हुई थी.
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने मांगी माफी
अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड जे ऑस्टिन ने भी 29 अगस्त को अमेरिकी स्ट्राइक में 10 अफगान नागरिकों की मौत के लिए माफी मांगी.
न्यूयॉर्क टाइम्स की जांच रिपोर्ट के अनुसार 29 अगस्त को जिस वक्त अमेरिका द्वारा एयरस्ट्राइक किया गया था उस वक्त 43 साल के जेमारी अहमदी 1996 मॉडल की एक टोयोटा कोरोला कार चला रहे थे, जो हमले में नष्ट हो गई. इस एयरस्ट्राइक में जेमारी और सात बच्चों सहित परिवार के नौ सदस्यों की मौत हो गई थी. अमेरिकी सेना का दावा था कि इस कार में विस्फोटक था. जबकि इस कार में पानी के कंटेनर रखे थे.