मिडिल ईस्ट जंग के बीच ट्रंप का संबोधन (Photo: Reuters) Trump Nation Address LIVE News: ईरान-अमेरिका-इज़रायल के बीच संघर्ष और तेज़ होता जा रहा है. जंग को शुरू हुए 34 दिन हो चुके हैं और नए टकराव की आशंकाएं सामने आ रही हैं. अमेरिकी सेना ने कहा है कि उसने अब तक 12,300 से ज़्यादा ईरानी ठिकानों पर हमला किया है, जिनमें कमांड और कंट्रोल सेंटर, बैलिस्टिक मिसाइल साइटें और स्टोरेज बंकर शामिल हैं. वहीं, 155 से ज़्यादा जहाज़ों को नुकसान पहुंचा है या वे तबाह हो गए हैं. सेना का यह भी कहना है कि युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक, आधुनिक लड़ाकू विमानों और बमवर्षकों की मदद से 13,000 से ज़्यादा लड़ाकू उड़ानें भरी गई हैं.
मिडिल ईस्ट में हमले जारी रहने के बीच, ट्रंप ने आज जंग को लेकर अपना पहला 'प्राइमटाइम' संबोधन दिया. उन्होंने अपनी स्पीच में कहा कि वियतनाम का युद्ध 18 साल तक चला था, लंबे-लंबे युद्ध चल चुके हैं. ऑपरेशन एपिन फ्यूरी जारी रहेगा.
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के इस्फ़हान प्रांत में एक एयरपोर्ट पर हमला हुआ है. वहीं, कुवैत का कहना है कि पिछले 24 घंटों के दौरान उसकी एयर सिक्योरिटी सिस्टम ने तीन क्रूज़ मिसाइलों और 15 ड्रोन को मार गिराया है.
जहां एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यह दावा कर रहे हैं कि ईरान ने सीजफायर की पेशकश की है, वहीं तेहरान ने ऐसी किसी भी पेशकश से साफ इनकार किया है. इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के बेतुके दिखावों के चलते, इस राष्ट्र के दुश्मनों के लिए 'होर्मुज़ स्ट्रेट को नहीं खोला जाएगा.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि जो देश होर्मुज़ स्ट्रेट के रास्ते तेल की शिपमेंट पर निर्भर हैं, उन्हें इस रास्ते की सुरक्षा खुद ही सुनिश्चित करनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि अमेरिका इसमें मदद करेगा, लेकिन उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह ज़िम्मेदारी उन देशों की है कि वे उस तेल की सुरक्षा में आगे बढ़कर नेतृत्व करें, जिस पर वे इतनी बुरी तरह निर्भर हैं.
ट्रंप ने कहा, "मेरा एक सुझाव है. पहला, अमेरिका से तेल खरीदें, हमारे पास बहुत तेल है. हमारे पास बहुत ज़्यादा तेल है. दूसरा, थोड़ी हिम्मत जुटाएं. यह काम पहले ही कर लेना चाहिए था. जैसा हमने कहा था, वैसा ही हमारे साथ मिलकर करना चाहिए था, होर्मुज स्ट्रेट में जाएं और बस उस पर कब्ज़ा कर लें, उसकी सुरक्षा करें और उसका इस्तेमाल अपने लिए करें."
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका आने वाले हफ़्तों में ईरान के ख़िलाफ़ अपने सैन्य अभियान को और तेज़ करेगा, भले ही पर्दे के पीछे बातचीत जारी हो.
ट्रंप ने कहा, "हम अगले दो से तीन हफ़्तों में उन पर बहुत ज़ोरदार हमला करने जा रहे हैं." उन्होंने आगे कहा कि ईरान का तेल इंफ्रास्ट्रक्चर एक संभावित निशाना बना हुआ है और कहा कि ज़रूरत पड़ने पर अमेरिका "उनके तेल ठिकानों पर हमला कर सकता है."
इसके साथ ही, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि कूटनीतिक रास्ते खुले हुए हैं और बताया कि बातचीत जारी है, जबकि वॉशिंगटन अपने अगले क़दमों पर विचार कर रहा है.
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान में अपने सभी सैन्य लक्ष्यों को हासिल करने के करीब है. उन्होंने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में इस अभियान को जल्द से जल्द खत्म करने का वादा किया.
ट्रंप ने कहा, "हम इस काम को पूरा करेंगे और हम इसे बहुत तेज़ी से पूरा करेंगे." उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने की इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए. उन्होंने यह भी वादा किया कि जब तक यह संघर्ष जारी रहेगा, वॉशिंगटन अपने खाड़ी सहयोगियों की किसी भी तरह से रक्षा करेगा.
ट्रंप ने पहले भी इस जंग में अमेरिका के टार्गेट्स के बारे में बताया था, जिनमें ईरान की हमलावर मिसाइल क्षमताओं को नष्ट करना, उसके मिसाइल उत्पादन को खत्म करना, उसकी नौसेना और व्यापक सुरक्षा ढांचे को निशाना बनाना और यह सुनिश्चित करना शामिल है कि वह कभी भी परमाणु हथियार विकसित न कर सके.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि हम होर्मुज स्ट्रेट जाएंगे और इसकी सुरक्षा भी करेंगे. जब जंग खत्म हो जाएगी, तो यह खाली हो जाएगी. अगने दो-तीन हफ्तों में हम सख्त रवैया अपनाएंगे. हम उनसे कोई डील नहीं करने वाले हैं.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन में वेनेज़ुएला का भी ज़िक्र किया और अमेरिकी सैनिकों की तारीफ़ की, जिन्होंने एक तेज़ ऑपरेशन के ज़रिए कुछ ही मिनटों में उस देश पर कंट्रोल हासिल कर लिया.
उन्होंने इस मिशन को तेज़, जानलेवा और ज़ोरदार बताया और कहा कि इससे दुनिया भर में अमेरिका को इज़्ज़त मिली है.
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अब वेनेज़ुएला के विशाल तेल और गैस भंडारों को विकसित करने और बेचने पर मिलकर काम कर रहा है, जिन्हें उन्होंने दुनिया के सबसे बड़े भंडारों में से एक बताया. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने मध्य-पूर्व से ऊर्जा के मामले में आज़ादी पा ली है, लेकिन अपने सहयोगी देशों की मदद के लिए वह वहां अपनी मौजूदगी बनाए रखेगा.
ट्रंप ने अपनी स्पीच में कहा कि ईरान की नौसेना 'पूरी तरह खत्म' हो चुकी है, वायुसेना तबाह हो गई है और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का नेतृत्व पूरी तरह नष्ट हो गया है.
ट्रंप से उम्मीद की जा रही है कि वे उन बातों का ब्योरा देंगे, जिन्हें उन्होंने ईरान में वॉशिंगटन के सैन्य टार्गेट्स के लगभग पूरा हो जाने के रूप में बताया है.
ईरान जंग के बीच राष्ट्र के नाम संबोधन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, "ईरान के सभी बड़े नेता मारे जा चुके हैं. एक महीने से ईरान से जंग जारी है. मैंने कहा था कि मैं कभी भी परमाणु प्रोग्राम को सफल नहीं होने दूंगा. आपने देखा है कि इजरायल और हम इस काम में लगे हैं. आपने बेरुत में देखा था कि कैसे अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई थी."
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राष्ट्र को संबोधित करने से पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वह यह बताने जा रहे हैं कि एक नेता के तौर पर वह कितने कुशल हैं. ट्रंप ने कहा, "आज रात 9 बजे मैं एक छोटा सा भाषण देने वाला हूं और असल में मैं सबको यह बताने जा रहा हूं कि मैं कितना महान हूं."
एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र ने बताया कि ईरान की युद्ध को अस्थायी रूप से रोकने के लिए मध्यस्थों के जरिए अब तक कोई बातचीत नहीं हुई है. तेहरान की मांग सिर्फ कुछ समय की शांति नहीं, बल्कि एक गारंटीड सीजफायर है, जिससे इस युद्ध को हमेशा के लिए पूरी तरह खत्म किया जा सके.
'इस्लामिक रिपब्लिक डे' के मौके पर ईरानी सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने एक पत्र के जरिए अमेरिका और इजरायल पर अपना पक्ष रखा. इसमें उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, 'बेरहम अमेरिका और यहूदी दुश्मन के लिए इंसानियत, नैतिकता या जिंदगी का कोई मोल नहीं है.'
ईरान ने अमेरिका और इजरायल के ठिकानों पर हमले का एक नया दौर शुरू कर दिया है. इसे 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4' की 89वीं लहर बताया जा रहा है. ईरान के 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' ने बताया कि ईरान और उसके सहयोगी गुटों ने मिलकर भारी मिसाइलों, आत्मघाती ड्रोन्स और रॉकेटों से अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायली ठिकानों पर हमला किया है. ईरान का दावा है कि उसने इजरायल के इलात, तेल अवीव और बनी ब्राक जैसे इलाकों में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है. ईरान के मुताबिक इन हमलों में इजरायल को बड़ा नुकसान हुआ है.
IRGC ने दावा किया है कि उन्होंने बहरीन में एक ऐसे ठिकाने पर हमला किया जहां 80 अमेरिकी सैनिक मौजूद थे. इसके अलावा, कुवैत में एक अमेरिकी बेस पर बैलिस्टिक मिसाइलें गिराई गईं, जिससे एक अमेरिकी हेलीकॉप्टर तबाह हो गया,
ट्रंप ने दावा किया है कि उनके प्रशासन ने ईरान में 'रिजीम चेंज' कर लिया है. वॉशिंगटन में ईस्टर के मौके पर एक इवेंट में ट्रंप ने कहा, 'हमने पहले शासन को पूरी तरह से हटा दिया... फिर 88 लोगों ने एक नया शासन चुनने के लिए बैठक की और जब वो मतदान कर रहे थे, हमने उन्हें हटा दिया. तो ये दूसरा शासन था और अब हम लोगों के तीसरे समूह से निपट रहे हैं, और वो बहुत कम कट्टरपंथी हैं. रिजीम चेंज संयोग से हुआ क्योंकि मुझे रिजीम चेंज का विचार कभी पसंद नहीं आया. ये बहुत मुश्किल है.
डोनाल्ड ट्रंप अपने मुंह मियां मिट्ठू बने हैं. उन्होंने दावे के साथ कहा, 'अगर मैं नहीं होता... तो इजरायल नहीं होता. मिडिल-ईस्ट भी नहीं होता. आपके पास परमाणु हथियार होते. इसके बाद ट्रंप ने अपने भाषण में और अधिक जानकारी देने का वादा किया. उन्होंने अपने राष्ट्रपति कार्यकाल की सफलताओं पर जोर देते हुए कहा, 'आज रात, मैं सबको बताऊंगा कि मैं कितना महान हूं. मैंने कितना शानदार काम किया है.'
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अब जापान, फ्रांस, साउथ कोरिया और चीन जैसे देशों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालनी चाहिए. ट्रंप का मानना है कि दूसरे देशों को भी इस समुद्री रास्ते को सुरक्षित रखने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए. इसके साथ ही ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि ईरान ने सीजफायर की मांग की है, लेकिन वो इस पर तभी विचार करेंगे जब तेहरान इस रास्ते को रोकना बंद कर देगा. हालांकि, ईरान ने ऐसी किसी भी मांग से इनकार किया है.
नाटो चीफ मार्क रुटे अगले हफ्ते वाशिंगटन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे. नाटो के प्रवक्ता ने जानकारी दी है कि ये दौरा काफी समय पहले से तय था. इस मुलाकात को मौजूदा वैश्विक हालातों और अमेरिका-नाटो संबंधों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है.
व्हाइट हाउस ने एक बयान जारी कर कहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप के साफ और अडिग लक्ष्यों की वजह से ईरानी शासन के खिलाफ बड़ी कामयाबी मिल रही है. ट्रंप आज रात देश को इस सैन्य अभियान की जानकारी देंगे. व्हाइट हाउस का कहना है कि ये अमेरिकी ताकत का वो प्रदर्शन है जो ईरानी शासन की उन क्षमताओं को खत्म कर रहा है, जिनसे अमेरिका और दुनिया को खतरा था. ट्रंप की अगुवाई में अमेरिकी सेना इस मिशन को पूरी ताकत और सटीक निशाने के साथ अंजाम दे रही है.
संयुक्त अरब अमीरात ने कहा है कि उसके देश में रह रहा ईरानी समुदाय वहां के समाज का एक अहम हिस्सा है. यूएई सरकार के मुताबिक, वो अपने देशों में रहने वाले ईरानियों का पूरा सम्मान और कद्र करती है. इसके साथ ही, यूएई ने उन दावों को 'गलत' करार दिया है जिनमें वहां रह रहे ईरानियों के रेजिडेंसी स्टेटस (विजा या रहने की अनुमति) को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे.
नाटो में अमेरिकी राजदूत व्हिटेकर ने कहा है कि उन्हें भरोसा है कि ईरान के पास अभी भी युद्ध से बाहर निकलने का रास्ता मौजूद है, जिसे वो चुन सकता है. उन्होंने ये भी कहा कि अमेरिका ईरान में सही लोगों से बातचीत कर रहा है, जिससे कूटनीतिक समाधान की उम्मीद बनी हुई है. इसके अलावा, उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप एक ऐसा नाटो चाहते हैं जो हर हालात में अमेरिका के साथ मजबूती से खड़ा रहे.
ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर यूरोपीय देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के लिए गठबंधन में शामिल नहीं होते, तो अमेरिका यूक्रेन को दी जाने वाली हथियारों की सप्लाई रोक देगा.
ट्रंप के संबोधन से पहले ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिकी जनता के नाम एक पत्र लिखकर कहा है कि ईरान की आम अमेरिकियों से कोई दुश्मनी नहीं है. उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमला करना सीधे तौर पर वहां की जनता को निशाना बनाना है, जिसका नतीजा भविष्य में ईरान की सीमाओं से काफी दूर तक देखने को मिल सकते हैं. पेजेश्कियान ने ये भी कहा कि ईरान को एक 'खतरे' के रूप में पेश करना ऐतिहासिक सच्चाई नहीं है.
ईरान जंग पर संबोधन से पहले ट्रंप ने आर्टेमिस II मिशन पर खुशी जाहिर की है. सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने लिखा, 'आज शाम 6:24 बजे पर, 50 सालों से ज्यादा समय में पहली बार, अमेरिका चांद पर वापस जा रहा है. आर्टेमिस II, अब तक के सबसे शक्तिशाली रॉकेटों में से एक, हमारे बहादुर अंतरिक्ष यात्रियों को उस स्तर तक गहरे अंतरिक्ष में ले जा रहा है जहां कोई भी इंसान आज तक नहीं पहुंचा है. हम अंतरिक्ष में, पृथ्वी पर और इनके बीच हर जगह जीत रहे हैं- आर्थिक रूप से, सैन्य रूप से और अब, सितारों से परे भी. कोई भी हमारे करीब नहीं आ सकता! अमेरिका सिर्फ मुकाबला नहीं करता, हम प्रभुत्व स्थापित करते हैं, और पूरी दुनिया देख रही है. हमारे अद्भुत अंतरिक्ष यात्रियों को ईश्वर का आशीर्वाद मिले, नासा को ईश्वर का आशीर्वाद मिले और अब तक के सबसे महान राष्ट्र, संयुक्त राज्य अमेरिका को ईश्वर का आशीर्वाद मिले!'

डोनाल्ड ट्रंप अपने संबोधन में ईरान के साथ जंग खत्म करने को लेकर बड़ा ऐलान कर सकते हैं. ट्रंप ने एक दिन पहले ही संकेत दिए थे कि अमेरिका दो-तीन हफ्ते में ईरान से बाहर निकल कर सकता है. ऐसे में सभी की नजरें ट्रंप के संबोधन पर टिकी हैं.