अयान 9 साल का है और अयूब 7 साल का. हर रात भीख मांगने के लिए रवाना होने से पहले वे अपनी मां को गले लगाकर अलविदा कह जाते हैं. उन्हें लगता है कि अगली सुबह जब वे लौटेंगे तो उनकी मां यह दुनिया छोड़ चुकी होगी.
यह कहानी है 35 साल की सोमालियाई विधवा सादिया अब्दीनूर की. उसकी जिंदगी को एक अजीबोगरीब बीमारी ने नरक बना दिया है. बीमारी की वजह से उसका बायां पैर इतना सूज गया है कि उसका वजन 31.75 किलो हो गया है. इस बीमारी का नाम है एलीफैंटायसिस.
बुरी आत्मा के डर से पड़ोसियों ने बनाई दूरी
सादिया चल-फिर नहीं सकतीं. इसलिए उसके दोनों बच्चे अयान और अयूब रोज भीख मांगकर गुजारा कर रहे हैं. सादिया के लिए हालात इसलिए भी मुश्किल हो गए हैं क्योंकि दोस्तों और पड़ोसियों ने उनसे दूरी बना ली है. उन्हें लगता है कि सादिया पर किसी बुरी आत्मा का साया है.
ब्रिटिश सर्जन करेंगे मुफ्त में सर्जरी
हालांकि अब सादिया की जिंदगी में उम्मीद की किरण बनकर आए हैं ब्रिटिश सर्जन प्रोफेसर नाइजेल स्टैंडफील्ड. उन्होंने सादिया की सर्जरी मुफ्त में करने की पहल की है. ब्रिटेन की एक चैरिटी संस्था भी सादिया के लिए फंड जुटा रही है ताकि वह अपने देश से ब्रिटेन आ सके. यह सर्जरी कम से कम 10 घंटे तक चलेगी.

'मुझे बचा लो, मैं दुनिया से कट गई हूं'
केन्या के नैरोबी में इस सर्जरी के लिए पर्याप्त सुविधाएं और विशेषज्ञता नहीं थी, इसलिए डॉक्टरों ने सर्जरी करने से मना कर दिया था. लेकिन जल्दी सर्जरी न किए जाने पर उसके लिए छोटा सा भी इंफेक्शन जानलेवा हो सकता था. सादिया के पति को उसके सामने लुटेरों ने गोली मार दी थी. अंग्रेजी अखबार डेली मेल में छपी खबर के मुताबिक, सादिया ने कहा, 'प्लीज मुझे बचा लो. मैं दुनिया से कट गई हूं.'
खतरनाक स्टेज पर है बीमारी
सादिया को यह बीमारी 2006 में हुए एक इंफेक्शन के बाद लगी. धीरे-धीरे उनका बायां पैर सूजने लगा. सादिया की फ्री में सर्जरी करने की पहल करने वाले डॉक्टर नाइजेल स्टैनफील्ड ने कहा, 'यह बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण है कि उस महिला को एलीफैंटायटिस हो गया है. मैंने इसके जितने केस देखे हैं, यह उनमें सबसे खतरनाक है.'
क्या होता है एलीफैंटायटिस?
इसका मेडिकल नाम लिंफैटिक फिलैरिएसिस है. यह बीमारी तब होती है जब मच्छरों के जरिये कुछ खास परजीवी इंसानी शरीर में प्रवेश कर जाते हैं. ये परजीवी स्किन पर जमा हो जाते हैं. यहां से लिंफैटिक नसों तक पहुंचकर वे वयस्क वॉर्म्स में बदल जाते हैं और उनकी ताकत बढ़ जाती है.
इस तरह का इंफेक्शन आम तौर पर बचपन में ही हो जाता है, पर इसके लक्षण वयस्क होने के बाद ही दिखते हैं. इससे इंसान हमेशा के लिए पंगु हो सकता है.
परजीवी के इंफेक्शन वाले ज्यादातर मामलों में लक्षण इतने मुखर नहीं होते लेकिन कुछ मामलों में एलीफैंटायसिस विकसित हो सकता है. परजीवियों को दवाइयों के जरिए भी स्किन से हटाया जा सकता है लेकिन अगर एलीफैंटायसिस हो चुका है तो सर्जरी ही एकमात्र चारा है.