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काबुल पर कब्जा, US की वापसी, महिलाओं पर प्रतिबंध; अफगानिस्तान में तालिबानी राज का पहला महीना

अफगानिस्तान में 2001 से ही सत्ता पर काबिज होने की कोशिश में जुटे तालिबान को इस साल अगस्त में कामयाबी मिली. 15 अगस्त, 2021 को काबुल पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने अपनी सरकार बना ली है. अफगानिस्तान में तालिबान के राज का एक महीना कैसे बीता, नज़र डालिए...

अफगानिस्तान में तालिबान के राज का एक महीना (फोटो: AP) अफगानिस्तान में तालिबान के राज का एक महीना (फोटो: AP)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अफगानिस्तान में तालिबान के राज का एक महीना
  • 15 अगस्त, 2021 को काबुल में जमाया था कब्जा
  • अमेरिका को वापस लौटाया, महिलाओं पर प्रतिबंध लगाए

दो दशक तक अमेरिका (America) से लड़ने के बाद तालिबान (Taliban) ने अफगानिस्तान पर कब्जा जमा ही लिया है. 15 अगस्त, 2021 को काबुल के राष्ट्रपति पैलेस के अंदर तालिबान ने अपना झंडा फहरा दिया था. इस घटना को पूरा एक महीना हो गया है, इस दौरान तालिबान ने अपनी सरकार बना ली है और अमेरिका अफगानिस्तान (Afghanistan) को छोड़कर चला गया है.

पिछले एक महीने में अफगानिस्तान कितना बदल गया, तालिबान वहां क्या कर रहा है. 10 प्वाइंट्स में पूरी कहानी को जानिए...

1.    तालिबान लंबे वक्त से अफगानिस्तानी सेना, अमेरिका सेना के खिलाफ जंग लड़ रहा था. मई में अलग-अलग इलाकों में शुरू हुआ जीत का सिलसिला 15 अगस्त को काबुल में आकर रुका. तत्कालीन राष्ट्रपति अशरफ गनी के देश छोड़ने के बाद तालिबान ने राष्ट्रपति पैलेस पर अपना कब्जा जमा लिया. इस तरह दो दशक की लड़ाई के बाद अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी हुई. 

2.    तालिबान के कब्जे के बाद काबुल (Kabul) समेत पूरे मुल्क में अफरा-तफरी का माहौल था. जगह-जगह तालिबान के लड़ाके घूम रहे थे और आम लोग अपनी जान बचाने के लिए भागते नजर आ रहे थे. काबुल के एयरपोर्ट से बड़ी संख्या में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया, अमेरिका समेत नाटो ग्रुप के अन्य देशों ने प्राथमिकता पर अपने मुल्क के लोगों को निकाला. 

3.    15 अगस्त से लेकर 30 अगस्त तक चले पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन में अफगानिस्तान से करीब डेढ़ लाख लोगों ने बाहर का रास्ता अपनाया. अधिकतर देशों की एम्बेसी यहां से चली गई, जिसमें भारत (India) की एम्बेसी भी शामिल थी. काबुल एयरपोर्ट पर हजारों अफगान नागरिक, पाकिस्तान, ईरान की सीमा पर लोगों ने निकलने का रास्ता बनाया. एयरपोर्ट पर हवाई जहाज पर लटकते लोगों की तस्वीरें दुनिया कभी नहीं भूलेगी. 

4.    अफगानिस्तान में तालिबान के राज की झलकियां तब दुनिया को दिखाई दीं, जब एयरपोर्ट पर गोलीबारी हुई और बम धमाके हुए. तालिबान ने इसमें अपना हाथ होने से इनकार किया, लेकिन ये सबकुछ उसके राज में ही हुआ. एयरपोर्ट पर हमले में दो सौ से ज्यादा लोग मारे गए, जिनमें अमेरिकी सैनिक भी शामिल थे. तालिबान के लड़ाकों ने अफगानिस्तान के अलग-अलग इलाकों में अपने दुश्मनों से बदला भी लिया. 

काबुल एयरपोर्ट का ऐसा था हाल (फोटो: AP)

5.    तालिबान ने अमेरिका समेत सभी देशों को 31 अगस्त तक अपना रेस्क्यू पूरा करने की डेडलाइन दी थी. भारत ने भी अफगानिस्तान के काबुल से अपनी एम्बेसी बंद कर लोगों को निकाल लिया, हालांकि तालिबान ने भारत को रुकने के लिए कहा था. तमाम देश 30 अगस्त से पहले ही अपना अभियान बंद कर चुके थे. 30 अगस्त के बाद करीब 15 दिनों तक काबुल से कोई विमान नहीं उड़ पाया. हालांकि, अब कतर और पाकिस्तान के विमान काबुल तक उड़ान भर पा रहे हैं. 

6.    अफगानिस्तान पर कब्जे के करीब एक महीने बाद तालिबान ने अपनी सरकार बनाई. 33 मंत्रियों की कुल कैबिनेट में मुल्ला अखुंद को तालिबान का अंतरिम प्रधानमंत्री बनाया गया, उसके साथ दो उप-प्रधानमंत्री बनाए गए. मुल्ला बरादर, मुल्ला याकूब समेत अन्य बड़े चेहरों को कैबिनेट में जगह दी गई. ये अंतरिम कैबिनेट 6 महीने तक राज कर सकती है, उसके बाद नए सिरे से सरकार बनाई जाएगी. 

7.    तालिबान के आते ही अफगानिस्तान में महिलाओं पर पाबंदी लगना शुरू हो गई. तालिबान ने महिलाओं के विदेशी कपड़े पहनने पर रोक लगाई, पुरुषों के साथ दफ्तर में कामकाज करने पर रोक लगा दी गई. कॉलेज में लड़के-लड़कियां साथ नहीं पढ़ पाएंगे, इसके अलावा भी कई क्षेत्रों में महिलाओं पर रोक लगा दी गई है. जबकि दुनिया के सामने अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में तालिबान ने सरकार में महिलाओं को जगह देने की बात कही थी. 

8.    तालिबान भले ही अपना राज आने के बाद अफगानिस्तान में सामान्य हालात होने का दावा कर रहा हो लेकिन ज़मीनी सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है. अभी कई जगह बाजार नहीं खुल रहे हैं, लोगों को कामकाज करने में दिक्कत आ रही है. काबुल में तो लोगों को अपना घर का सामान बेचना पड़ रहा है, ताकि कुछ पैसा मिल सके. अफगानिस्तान के अलग-अलग शहरों में कैश की कमी है, एटीएम पर लंबी कतारे हैं. तालिबान ने लोगों से अपने काम पर लौटने को भी कहा है. 

अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार


9.    तालिबान को अफगानिस्तान में मुख्य रूप से पंजशीर में चुनौती का सामना करना पड़ा है. नॉर्दर्न एलायंस के लड़ाकों ने तालिबान की सरकार बनने के बाद भी हथियार नहीं डाले हैं. अहमद मसूद और अमरुल्ला सालेह की अगुवाई में ये जंग चल रही है. हालांकि, हाल ही में तालिबान ने दावा किया था कि पंजशीर पर उसका कब्जा है, लेकिन ये अभी तक पक्का नहीं हो सका है. पंजशीर के अलावा अफगानिस्तान के अलग-अलग क्षेत्रों में महिलाओं द्वारा तालिबानी राज के खिलाफ आवाज उठाई जा रही है. 

10.    दुनिया के नक्शे पर अभी पूरी तरह से तालिबान को मंजूरी नहीं मिली है. अमेरिका, भारत, ब्रिटेन जैसे देश अभी वेट एंड वॉच की नीति अपना रहे हैं. लेकिन पाकिस्तान और चीन पूरी तरह से तालिबान सरकार के साथ हैं. चीन पहले ही आर्थिक मदद देने का ऐलान कर चुका है, जबकि पाकिस्तान तालिबान की सरकार बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है. तालिबान ने भी दुनिया से अपील की है कि वह उसकी सरकार को मान्यता दे. हालांकि, कई देशों ने तालिबान से महिलाओं को उनका हक देने की मांग की है.  

 

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