स्विटजरलैंड सरकार ने बुधवार को संसद में एक बिल पेश किया है. इस बिल में सार्वजनिक जगहों पर चेहरा ढकने के प्रतिबंध का उल्लंघन करने पर 1,000 स्विस फ्रैंक (लगभग 82 हजार भारतीय रुपये) का जुर्माना लगाने की बात की गई है. आपको बता दें कि स्विट्जरलैंड की कुल आबादी में करीब 5 प्रतिशत लोग मुस्लिम हैं. इनमें से अधिकतर तुर्की, बोस्निया और कोसोवो के मूल निवासी हैं. सार्वजनिक रूप से चेहरा ढकने पर प्रतिबंध लगाने के लिए पिछले ही साल स्विट्जरलैंड में जनमत संग्रह किया गया था. जिसमें प्रतिबंध लगाने के समर्थन में ज्यादा वोट मिले थे.
हिंसक प्रदर्शनकारियों को रोकना मकसद
संसद में पेश किए गए कैबिनेट प्रस्ताव में सीधे तौर पर इस्लाम का कहीं भी जिक्र नहीं किया गया है लेकिन जाहिर है कि बुर्का-हिजाब पहनने पर भी पाबंदी लग गई है. प्रस्ताव के मुताबिक, इस कानून का मकसद हिंसक सड़क प्रदर्शनकारियों को चेहरा छुपाने से रोकना है. लेकिन स्थानीय राजनेता, मीडिया और प्रचारक इस कानून को बुर्का प्रतिबंध कह रहे हैं. स्विटजरलैंड सरकार ने एक बयान में कहा है कि चेहरे ढकने पर प्रतिबंध का उद्देश्य सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था को सुनिश्चित करना है.
कुछ जगहों पर छूट रहेगी
संसद में पेश किए गए बिल में अभिव्यक्ति की आजादी और मौलिक अधिकारों के तहत चेहरा ढकने को लेकर कुछ छूट भी दी गई है. स्वास्थ्य, जलवायु परिस्थितयों, स्थानीय रीति-रिवाजों समेत कलात्मक प्रदर्शन और विज्ञापन के लिए चेहरे ढकने को लेकर छूट रहेगी. साथ ही सभी तरह के पूजा स्थलों, राजनयिक परिसरों और विमानों में चेहरा ढकने की अनुमति रहेगी.
लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं
बुर्का बैन या चेहरा ढकने संबंधी बिल का समर्थन करने वाले लोगों का कहना है कि बुर्का या हिजाब जैसी प्रथाएं इस्लाम के राजनीतिकरण और कट्टरवाद का प्रतीक है. वहीं, मुस्लिम समुदायों ने भेदभाव के रूप में की गई इस वोटिंग की निंदा की है.
इन देशों में पहले ही है बैन
फ्रांस ने 2011 में सार्वजनिक स्थानों पर पूरे चेहरे को ढकने पर बैन लगा दिया था. डेनमार्क, आस्ट्रिया, नीदरलैंड और बुल्गारिया में भी सार्वजनिक स्थानों पर चेहरा ढकना पूर्ण या आंशिक रूप से बैन है.