श्रीलंका के मुसलमान इस साल हज पर नहीं जा सकेंगे. इसकी वजह देश का आर्थिक संकट में फंसा होना है. श्रीलंका आजादी के बाद से अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है.
श्रीलंका के हज आयोजकों ने मुस्लिम समुदाय से चर्चा के बाद इस फैसले की जानकारी दी.
पिछले महीने सऊदी अरब ने श्रीलंका से 1,585 हज तीर्थयात्रियों के कोटे को हरी झंडी दी थी.
देश की मौजूदा स्थिति और यहां के लोगों की पीड़ा को ध्यान में रखते हुए श्रीलंका के ऑल सीलोन हज टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन और हज टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन के सदस्यों ने इस साल हज पर नहीं जाने का फैसला किया है.
दोनों एसोसिएशन ने देश के मुस्लिम धार्मिक मामलों के विभाग को पत्र भेजा था. पत्र में इस साल हज छोड़ने के फैसले के बारे में सरकार को जानकारी दी गई.
पत्र में कहा गया कि देश के सामने गंभीर आर्थिक संकट को देखते हुए यह फैसला लिया गया है.
बता दें कि श्रीलंका पहले ही कर्ज ना चुका पाने की वजह से डिफॉल्टर हो चुका है.
एसोसिएशन के एक अधिकारी ने बताया कि इस साल हज पर एक करोड़ डॉलर का खर्चा होना था, जो बहुत बड़ी राशि है.
उन्होंने बताया कि मुस्लिम समुदाय देश की खातिर हज की यात्रा छोड़ रहे हैं.
1948 में ब्रिटेन से आजादी मिलने के बाद से श्रीलंका अपने सबसे खराब आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है. देश के पास डॉलर की भारी कमी है जिसकी वजह से लगभग सभी जरूरी सामानों की कमी हो गई है.
देश लगातार गर्त में जा रहा है. विदेशी मुद्रा भंडार नहीं होने से ईंधन, कुकिंग गैस और अन्य जरूरी सामान खरीदने के लिए लोगों की लंबी-लंबी कतारें देखी देखी जा सकती हैं. दूसरी तरफ लोग भारी बिजली कटौती से बेहाल है. खाने-पीने की चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं.
देश में इस आर्थिक संकट की वजह राजनीतिक संकट गहराया और राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे से इस्तीफे की मांग की गई.
प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे पहले ही नौ मई को इस्तीफा दे चुके हैं. देश में महंगाई दर 40 फीसदी के आसपास है. खाने-पीने की चीजों, ईंधन, दवाइयों की कमी की वजह से देशभर में प्रदर्शन हो रहे हैं और श्रीलंकाई रुपये में श्रीलंकाई रुपये में लगातार गिरावट हो रही है.