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दिवालिया होने की कगार पर खड़ा श्रीलंका, चीन पर भड़के सांसद

श्रीलंका के प्रमुख सांसद डॉ विजेदास राजपक्षे ने चीन पर श्रीलंका को कर्ज के जाल में फंसाने का आरोप लगाया है. राजपक्षे श्रीलंका में चीन की नीतियों पर हमेशा से सवाल उठाते आए हैं और वो राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के भी आलोचक रहे हैं. इसी कारण उन्हें मंत्रीपद से हटा दिया गया था.

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चीन पर श्रीलंका को कर्ज के जाल में फंसाने के आरोप लगते हैं (Photo- Reuters) चीन पर श्रीलंका को कर्ज के जाल में फंसाने के आरोप लगते हैं (Photo- Reuters)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • चीन पर भड़के श्रीलंकाई सासंद
  • लगाया कर्ज के जाल में फंसाने का आरोप
  • भ्रष्टाचार को लेकर भी चीन को लपेटा

श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार के लगभग खाली होने से उसके डिफॉल्टर होने का खतरा अभी भी बना हुआ है. भारत और अन्य देशों की मदद से श्रीलंका को भले ही कुछ समय के लिए राहत मिल गई है लेकिन आर्थिक संकट पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है. 

श्रीलंका की आर्थिक बदहाली को लेकर कई लोग चीन को दोषी ठहराते आए हैं. अब खुद श्रीलंका में भी चीन के खिलाफ आवाजें उठने लगी हैं. श्रीलंका के प्रमुख सांसद डॉ विजेदास राजपक्षे ने चीन पर श्रीलंका में आर्थिक हमले, भ्रष्टाचार और देश को कर्ज-जाल में फंसाने का आरोप लगाया है.
 
हॉन्गकॉन्ग पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, डॉ राजपक्षे श्रीलंका के उन कुछ नेताओं में से एक हैं, जिन्होंने चीनी कर्ज के जाल के खिलाफ बात की और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को दोनों देशों के बीच पारस्परिक सहयोग बढ़ाने और पारस्परिक विश्वास के पुनर्निर्माण को लेकर पत्र लिखने का साहस किया.

डॉ विजेदास राजपक्षे श्रीलंका की सरकार में न्याय मंत्री और शिक्षा मंत्री रह चुके हैं. इससे पहले उन्होंने चेतावनी दी थी कि देश का अगला चुनाव, चाहे वो राष्ट्रपति का हो या प्रधानमंत्री का, सभी को जनमत संग्रह के साथ जोड़ा जाएगा ताकि लोगों से उन सभी समझौतों और अनुबंधों के निर्धारण या उन्हें रद्द करने के लिए जनादेश प्राप्त किया जा सके जो श्रीलंका के लिए हानिकारक या नुकसानदेह हैं.

उन्होंने कहा, चाहे कोई भी परिस्थिति हो, एग्रीमेंट कॉन्ट्रैक्ट 15 वर्षों का होगा. इससे अधिक समय के एग्रीमेंट की अनुमति नहीं दी जाएगी. 

साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि कोलंबो में जमीन लेने के लिए चीन ने सेलेंडीवा (निजी कंपनी जो कोलंबो में चीन को जमीन पट्टे पर देती है) के साथ जो भी समझौता किया था, उसे बिना किसी मुआवजे के खत्म घोषित कर दिया जाएगा.

डॉ राजपक्षे को अपने मंत्री पद से इसलिए इस्तीफा देना पड़ा था क्योंकि वो श्रीलंका की सरकार और चीन के बड़े आलोचक रहे हैं. हॉन्गकॉन्ग पोस्ट के अनुसार, डॉ राजपक्षे चीन से जुड़े भ्रष्टाचार पर लगातार बोलते रहे हैं. सरकार और चीन दोनों की खुले तौर पर वो आलोचना करते रहे, जिस कारण उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा.

पिछले साल, उन्होंने चीन द्वारा कोलंबो में बनाई जा रही पोर्ट सिटी को लेकर पेश किए गए आर्थिक आयोग विधेयक पर कड़ी आपत्ति जताई थी. उन्होंने राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे और उनके भाई और वर्तमान वित्त मंत्री बेसिल राजपक्षे, दोनों पर तीखा हमला बोला था.

इसी बीच डॉ राजपक्षे ने कहा है कि चीन की वन बेल्ट वन रोड (OBR) ने चीन की आगे की नीति और आर्थिक रणनीति को मजबूत करने की आड़ में दोनों देशों के संबंधों को एक अलग ही दिशा में मोड़ दिया.

उन्होंने कहा, 'यह स्पष्ट है कि हमारे साथ चीन की दोस्ती अब वास्तविक और स्पष्ट नहीं है. चीन हमारे संबंधों का इस्तेमाल श्रीलंका के निर्दोष लोगों के जीवन की कीमत पर विश्व शक्ति बनने की अपनी महत्वाकांक्षा को प्राप्त करने के लिए करता है.'

चीन को लेकर कहा जाता है कि वो जरूरतमंद देशों को अपने कर्ज के जाल में इस तरह फंसाता है कि देश कर्ज चुकाने में असमर्थ हो जाते हैं और उन्हें मजबूरन चीन के सामने झुकना पड़ता है. चीन पर आरोप लगते हैं कि जब कोई देश उसका कर्ज नहीं चुका पाता तो वो उनकी संपत्तियों को अपना बना लेता है.

हालांकि चीन इन सभी आरोपों से इनकार करता आया है. उसका कहना है कि ये सब बातें पश्चिमी देशों ने उसके खिलाफ फैलाई हैं. 

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