श्रीलंका अपने सबसे खराब आर्थिक संकट से गुजर रहा है. हालात ऐसे हो गए हैं कि पेट्रोल-डीजल खत्म हो रहा है, खाने का सामान कम पड़ रहा है और कागज की किल्लत ने परीक्षाओं को रद्द करवा दिया है. इस सब के ऊपर अब श्रीलंका में आपातकाल भी लगा दिया गया है और 36 घंटे के सख्त कर्फ्यू का भी ऐलान हुआ है.
कल श्रीलंका में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन होने वाला है. बढ़ती महंगाई और कर्ज को लेकर ही बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर आने की तैयारी कर रहे हैं. लेकिन खतरे को देखते हुए राष्ट्रपति Gotabaya Rajapaksa ने 36 घंटे का कर्फ्यू लगा दिया है. सोमवार को सुबह 6 बजे तक ये लागू रहने वाला है. इस दौरान किसी भी नागरिक को प्रदर्शन करने का अधिकार नहीं रहेगा.
अब इतना सब कुछ इसलिए होता दिख रहा है क्योंकि श्रीलंका में हर बीतते दिन के साथ आर्थिक संकट और ज्यादा गहराता जा रहा है. आंकड़े बताते हैं कि श्रीलंका में 12-12 घंटे के पावर कट लगाए जा रहे हैं, बिजली बचाने के लिए स्ट्रीट लाइट को बंद किया जा रहा है और कागज बचाए जा सकें इसलिए छात्रों की परीक्षा कैंसिल करवाई जा रही है.
बसों और वाणिज्यिक वाहनों के लिए फिलिंग स्टेशनों पर अब डीजल नहीं बचा है. अधिकारियों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार श्रीलंका में सार्वजनिक परिवहन की सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो गई हैं. इस सब के अलावा श्रीलंका में विदेशी मुद्रा भंडार में बीते दो साल में 70% से ज्यादा की गिरावट आई है. इस वजह उसे अपनी जरूरत की अनिवार्य वस्तुओं का आयात करने में भी दिक्कत आ रही है.
अब इस मुश्किल समय में सबसे पहले मदद को आगे भारत आया है. 40,000 टन चावल भारत की तरफ से श्रीलंका भेजा जा रहा है. डीजल और दवाई की कमी को भी पूरा करने के लिए भारत ही मदद का हाथ बढ़ा रहा है. ऐसी खबर है कि भारत ने श्रीलंका को 1 अरब डॉलर की क्रेडिट लाइन यानी ऋण सहायता देने पर सहमति जताई है. ऐसे में मुश्किल समय में श्रीलंका तक मदद पहुंचाने की पूरी तैयारी है, लेकिन जमीन पर इसका असर कब तक होगा, ये आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा.