भारत का एक अहम आर्थिक साझेदार देश सऊदी अरब ने ट्रेड डील को लेकर बड़ा फैसला किया है. सऊदी अरब के वित्त मंत्री मोहम्मद अल-जादान ने कहा है कि सऊदी अरब अमेरिकी डॉलर के अलावा अन्य मुद्राओं में भी व्यापार करने को लेकर बातचीत करने के लिए तैयार है.
सऊदी विदेश मंत्री का यह बयान भारत के लिए इसलिए भी मायने रखता है क्योंकि दोनो देशों ने हाल ही में आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए रुपये-रियाल में व्यापार शुरू करने की संभावना पर चर्चा की थी. इसके अलावा एक और गल्फ कंट्री यूएई के साथ भारत ने फरवरी 2022 में द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर किए थे.
सऊदी अरब के वित्त मंत्री मोहम्मद अल-जादान ने मंगलवार को ब्लूमबर्ग टीवी को दिए इंटरव्यू में कहा कि हमें इस मुद्दे पर बातचीत करने में कोई दिक्कत नहीं है कि हम अपना व्यापार किस मुद्रा में करना चाहते हैं. चाहे वह अमेरिकी डॉलर में हो, यूरो में हो या सऊदी रियाल में.
उन्होंने कहा कि, "मुझे नहीं लगता कि हम दुनिया भर में व्यापार को बेहतर बनाने में मदद करने वाले किसी भी मुद्दे पर चर्चा को खत्म कर रहे हैं या खारिज कर रहे हैं." सऊदी वित्त मंत्री ने ये बातें दोवास में जारी वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2023 के दौरान कही है.
भारत को क्या होगा फायदा
भारत एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. वैश्विक व्यापार को बढ़ावा देने और व्यापारिक उद्देश्य से भारत ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार लेनदेन में रुपये मुद्रा का एक मैकेनिज्म स्थापित किया है.
भारत के व्यापार मंत्री पीयूष गोयल ने इससे पहले भी व्यापार के माध्यम से संबंधों में विविधिता लाने की बात कह चुके हैं. उन्होंने यूएई के साथ भी व्यापार के माध्यम से ही संबंधों में विविधता लाने की आवश्यकता पर जोर दिया था.
पिछले साल सऊदी अरब के व्यापार मंत्री माजिद बिन अब्दुल्ला अल कसबी के साथ बैठक में भी उन्होंने कहा था कि भारत और सऊदी अरब के बीच आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए अधिक निवेश आकर्षित करने और द्विपक्षीय व्यापार में विविधता लाने की जरूरत है. सऊदी अरब भारत का प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता देश है और व्यापार सऊदी अरब के पक्ष में ज्यादा है.
सऊदी अरब की मजबूरी या जरूरत
दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश सऊदी अरब दशकों से डॉलर में व्यापार करता है. लेकिन ग्लोबलाइजेशन की दौर में अब वह (सऊदी अरब) चीन और भारत सहित महत्वपूर्ण व्यापार भागीदारों के साथ अपने संबंध को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है.
सऊदी अरब पेट्रोडॉलर सिस्टम (petrodollar system) का एक महत्वपूर्ण पिलर है, जिसे 1970 में स्थापित किया था. पेट्रोडॉलर सिस्टम के माध्यम से ही अमेरिकी मुद्रा में कच्चे तेल के निर्यात का मूल्य निर्धारण किया जाता है.
पिछले साल चीनी राष्ट्रपित शी जिनपिंग की सऊदी यात्रा के दौरान दोनों देश ऊर्जा नीति पर समन्वय बढ़ाने पर सहमत हुए थे. इस दौरान चीनी राष्ट्रपति ने कहा था कि वह मध्य पूर्व से और अधिक तेल खरीदने का प्रयास करेगा. हालांकि, शी जिनपिंग ने कहा था कि वह इस व्यापार को चीनी मुद्रा युआन में करना चाहते हैं.
सऊदी अरब के वित्त मंत्री मोहम्मद अल-जादान ने कहा कि जिस तरह से चीन और अमेरिका के साथ हमारे गहरे रणनीतिक संबंध हैं. उसी तरह का संबंध हम यूरोप और अन्य देशों के साथ भी विकसित करना चाहते हैं, जो हमारे साथ काम करने के इच्छुक और सक्षम हैं.
भारत के साथ सितंबर में हुई थी चर्चा
सितंबर 2022 में भारत और सऊदी अरब ने दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने के प्रयासों के तहत रुपया-रियाल मुद्रा में व्यापार शुरू करने की संभावना पर चर्चा की थी.
भारत सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि दोनों देशों ने पश्चिमी तट रिफाइनरी, तरलीकृत प्राकृतिक गैस के बुनियादी ढांचे में निवेश और भारत में रणनीतिक भंडार के विकास सहित संयुक्त उपक्रमों में अपने निरंतर सहयोग करने पर सहमत हुए हैं.
भारत के लिए क्यों अहम
सऊदी अरब स्थित भारतीय दूतावास के वेबसाइट पर मौजूद डेटा के अनुसार, अमेरिका, चीन और यूएई के बाद सऊदी अरब भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापार साझेदार देश है. भारत कुल आयातित कच्चे तेल का लगभग 18 प्रतिशत सऊदी अरब से खरीदता है. वित्त वर्ष 2021-22 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 42.8 अरब अमेरिकी डॉलर था.
इस अवधि के दौरान सऊदी अरब से भारत ने 34.01 अरब अमेरिकी डॉलर का आयात किया. जबकि सऊदी अरब को लगभग 9 अरब अमेरिकी डॉलर का समान बेचा. भारत ने पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में लगभग 50 फीसदी ज्यादा निर्यात किया है. वित्त वर्ष 2021-22 में सऊदी अरब के साथ कुल व्यापार भारत के कुल व्यापार का 4.14% रहा.
भारत सरकार ने दिसंबर 2022 में सदन में बताया था कि कि भारत और खाड़ी सहयोग परिषद (गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल) के बीच द्विपक्षीय व्यापार इस साल अप्रैल और अक्टूबर की अवधि के बीच लगभग 40 फीसदी बढ़कर 111.71 अरब डॉलर हो गया. जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह व्यापार मात्र 79.49 अरब डॉलर था.
गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल में छह देश सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन आते हैं. लेकिन व्यापार के नजरिये से सऊदी अरब और यूएई अहम देश है.