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मक्का और मदीना की मस्जिद में निकाह को लेकर सऊदी अरब ने जारी किया ये आदेश

हाजियों और पर्यटकों के अनुभवों को और बेहतर करने के लिए सऊदी अरब ने इस्लाम के दो सबसे पवित्र स्थलों- मक्का में ग्रैंड मस्जिद और मदीना में पैंगबर की मस्जिद में निकाह करने की अनुमति दे दी है. तेल से हो रही कमाई पर निर्भरता को कम करने के लिए सऊदी अरब खुद को नए तौर-तरीके से पेश कर रहा है.

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फाइल फोटो
फाइल फोटो

अधिक से अधिक पर्यटकों और हाजियों को आकर्षित करने के लिए सऊदी अरब ने मक्का में ग्रैंड मस्जिद और मदीना में पैंगबर की मस्जिद में निकाह करने की अनुमति दे दी है. प्रधानमंत्री और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के नेतृत्व में सऊदी अरब अपनी रूढ़िवादी इस्लामिक छवि को बदलने की राह पर है. 

तेल से हो रही कमाई पर निर्भरता को कम करने के लिए सऊदी अरब खुद को नए तौर-तरीके से पेश कर रहा है. क्राउन प्रिंस के नेतृत्व में सऊदी अरब वैश्विक जरूरतों और भविष्य को देखते हुए संस्कृति, पर्यटन और फैशन क्षेत्र में खुद को विकसित कर पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है.

हाजियों और पर्यटकों के अनुभवों को और बेहतर करने की कोशिश

रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब के हज और उमराह मंत्रालय ने घोषणा की है कि अब इस्लाम के दो सबसे पवित्र स्थलों- मक्का में ग्रैंड मस्जिद और मदीना में पैगंबर की मस्जिद में निकाह किए जा सकते हैं.

सऊदी अखबार अल वतन को हवाला देते हुए गल्फ न्यूज ने लिखा है कि सऊदी अरब का यह कदम हाजियों और पर्यटकों के अनुभवों को और बेहतर करने की पहल का हिस्सा है. सरकार के पर्यवेक्षकों का कहना है कि सरकार की यह पहल निकाह से जुड़ी कंपनियों को इस क्षेत्र में और अवसर देगा. 

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क्या कहते हैं विवाह अधिकारी?

सऊदी मजून यानी विवाह अधिकारी (marriage official) मुसैद अल-जाबरी ने पैगंबर की मस्जिद में निकाह करने की अनुमति पर बोलते हुए कहा कि पैगंबर मुहम्मद की मस्जिद पहले से ही निकाह कराने के लिए जानी जाती है. सरकार के इस कदम से ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार पहले से मौजूद प्रथा को रेगुलेट करना चाहती है. क्योंकि पैगंबर की मस्जिद में निकाह का संचालन स्थानीय लोगों के बीच पहले से ही आम है. 

उन्होंने आगे कहा कि निकाह के समय अधिकांश रिश्तेदारों को बुलाने की परंपरा है. लेकिन अक्सर होने वाली पत्नी के परिवार वाले सभी लोगों को नहीं बुला पाते हैं. ऐसे में पैगंबर की मस्जिद या क्यूबा मस्जिद (इस्लाम में निर्मित पहली मस्जिद) में निकाह करवाया जाता है. 

हाल ही में टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट में कहा गया था कि वलीमा या निकाह की दावत आयोजित करने से पहले अपने इस्लामी अनुबंधों को पूरा करने के लिए मदीना जाने वाले अमीर मुसलमानों की संख्या काफी बढ़ रही है.

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