पाकिस्तान इन दिनों बिजली और गैस की भारी किल्लत से जूझ रहा है. देश के कई शहरों में घंटों हो रही लोड शेडिंग ने रोजमर्रा की जिंदगी को अस्त-व्यस्त कर दिया है. स्थिति इतनी खराब हो गई है कि अब लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है और कई शहरों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं.
ऊर्जा संकट का असर पाकिस्तान के लगभग हर बड़े शहर में देखा जा रहा है. लाहौर, कराची से लेकर एटाबाद तक में बिजली संकट गहरा गया है. ऐसे में लोग सड़कों पर उतर आए हैं.
लाहौर में गैस की लोड शेडिंग के बाद अब बिजली कटौती ने भी रफ्तार पकड़ ली है. बिजली गुल रहने की वजह से निवासियों का रोजमर्चा का शेड्यूल पूरी तरह से बिगड़ गया है.
कराची में भी हालात कुछ ठीक नहीं है. यहां शादमान टाउन इलाके में बार-बार होने वाली बिजली कटौती के खिलाफ नागरिक सड़कों पर उतर आए हैं. गुस्साए लोगों ने घंटों बिजली न आने पर विरोध प्रदर्शन किया.
एबटाबाद में गैस की लंबी कमी से प्रदर्शनकारी परेशान हैं. वो सुई गैस दफ्तरों के बाहर जमा हुए और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.
क्यों गहराया बिजली-गैस संकट?
कहा जा रहा है कि पाकिस्तान में बिजली और गैस संकट रातों-रात पैदा नहीं हुआ है, बल्कि इसके पीछे कई बड़े कारण हैं. यहां ऊर्जा की जितनी मांग है, उतनी आपूर्ति नहीं हो पा रही है. पुरानी वितरण प्रणाली और बुनियादी ढांचे की सीमाएं भी सप्लाई में बाधा डाल रही हैं. बदलते मौसम की वजह से भी ऊर्जा की खपत में अचानक बढ़ोतरी हुई है.
देश की आर्थिक स्थिति और ईंधन आपूर्ति से जुड़ी समस्याएं भी इस संकट को बढ़ा रही हैं. इस गहरे संकट ने न सिर्फ घरों के चूल्हों को ठंडा कर दिया है, बल्कि व्यापारिक गतिविधियों को भी ठप कर दिया है. लगातार बढ़ते बिजली और गैस की कटौती की वजह से लोग तंग आ गए हैं. अगर इन कमियों को जल्द दूर नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी ज्यादा बिगड़ सकती है.
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पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने संकट के बारे में पूछे जाने पर दावा किया कि पाकिस्तान में ईंधन की कमी नहीं है. उन्होंने कहा कि भारत ईंधन की कमी से जूझ रहा है, जहां कथित तौर पर लोग ईंधन के लिए लंबी कतारों में खड़े हैं.