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भारत के फैसले को भुनाने में जुटा PAK, खुद को शांति दूत बताने में जुटा

भारतीय सुरक्षाकर्मियों की बर्बर हत्या और पाकिस्तान में आतंकियों के महिमामंडम से नाराज भारत ने न्यूयॉर्क में विदेश मंत्री स्तर की मुलाकात को पिछले हफ्ते रद्द कर दिया, लेकिन भारत के इस फैसले को पाक भुनाने में लगा हुआ है और खुद को शांति का दूत बताने में जुट गया.

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मुलाकात रद्द किए जाने पर पाक विदेश मंत्री कुरैशी ने साधा निशाना (फाइल)
मुलाकात रद्द किए जाने पर पाक विदेश मंत्री कुरैशी ने साधा निशाना (फाइल)

भारत की ओर से विदेश मंत्री स्तर की मुलाकात रद्द किए जाने के बाद पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने पक्ष में भुनाने में लगा है. पाक के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी का कहना है कि भारत के नहीं चाहने के बाद भी वह क्षेत्र में शांति प्रयासों की बहाली में जुटा रहेगा.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा है कि पाक के साथ बातचीत की भारत की अनिच्छा के बावजूद इस्लामाबाद क्षेत्र में शांति को बढ़ावा देने के अपने प्रयास नहीं रोकेगा. कुरैशी का यह बयान नई दिल्ली की ओर से न्यूयार्क में विदेश मंत्री स्तरीय मुलाकात रद्द करने के कुछ दिन बाद आया है.

वाशिंगटन में पाकिस्तानी दूतावास में रविवार को संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कुरैशी ने कहा कि भारत सितंबर में जिस शांति वार्ता के लिए सहमत हुआ था उसे रद्द करने के लिए जुलाई में हुई घटनाओं का इस्तेमाल किया.

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भारत ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर में 3 पुलिसकर्मियों की 'बर्बर' हत्याओं और कश्मीरी आतंकवादी बुरहान वानी का 'महिमामंडन' करने वाले डाक टिकट जारी करने के आधार पर न्यूयार्क में इस महीने संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और उनके पाकिस्तानी समकक्ष कुरैशी के बीच बैठक रद्द कर दी थी.

'हमारे दरवाजे खुले रहेंगे'

कुरैशी ने कहा, 'भारत अनिच्छुक है, लेकिन हम अपने दरवाजे बंद नहीं करेंगे.' पाकिस्तान के अंग्रेजी अखबार 'डॉन' ने उनके हवाले से कहा, 'मुद्दों को नजरअंदाज करना उन्हें खत्म करना नहीं होता. इससे कश्मीर की स्थिति में सुधार नहीं होगा.' विदेश मंत्री ने आगे कहा कि वह पाकिस्तान के साथ शांति वार्ता में भाग लेने से भारत के इंकार को समझ नहीं पा रहे हैं.

उन्होंने कहा, 'बातचीत, बातचीत नहीं. आ रहे हैं, नहीं आ रहे हैं. हमारी बातचीत की इच्छा थी क्योंकि हमारा मानना है कि समझदारी भरा रास्ता मिलना और बातचीत करना है. वे सहमत हुए और फिर असहमत हुए.' कुरैशी ने कहा कि पाकिस्तान के शांति प्रस्ताव पर भारत की प्रतिक्रिया कठोर और गैर राजनयिक थी.

उन्होंने कहा, 'हमने अपने प्रत्युतर में गैर राजनयिक भाषा का इस्तेमाल नहीं किया. हमारा जवाब परिपक्व और नपा-तुला था. उन्होंने नया रुख अपनाया और पलट गए.'

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विदेश मंत्री ने आरोप लगाया कि स्वराज की 'भाषा और सुर विदेश मंत्री जैसे पद को शोभा नहीं देता.' यह पूछे जाने पर कि क्या भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव दोनों देशों के बीच युद्ध का कारण बन सकता है, कुरैशी ने कहा, 'युद्ध की बात कौन कर रहा है? हम तो नहीं. हम शांति, स्थिरता, रोजगार और बेहतर जीवन चाहते हैं. आप पहचानिए कि अनिच्छुक कौन है.'

'यह कमजोरी का संकेत नहीं'

कुरैशी का कहना है कि पाकिस्तान की शांति की इच्छा को भूलवश कमजोरी का संकेत नहीं मानना चाहिए. उन्होंने कहा, 'हम शांति चाहते हैं, इसका मतलब यह नहीं कि हम आक्रामकता के खिलाफ खुद की रक्षा नहीं कर सकते. हम कर सकते हैं लेकिन हमारी आक्रामक मानसिकता नहीं है.'

कुरैशी ने मारे गए कश्मीरी आतंकवादी का 'महिमामंडन' करने वाले डाक टिकटों को जारी करने पर भारत की चिंता खारिज की और कहा, 'हजारों लोग कश्मीर में लड़ रहे हैं, उनमें से सभी आतंकवादी नहीं हैं.'

विदेश मंत्री ने करतारपुर साहिब गुरुद्वारा गलियारा खोलने के पाकिस्तान के प्रस्ताव को दोहराया ताकि भारत के सिख तीर्थयात्रियों को गुरु नानक देव की 550वीं जयंती पर इस ऐतिहासिक गुरुद्वारे में जाने का अवसर मिले.

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