पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोप झेल रही ईसाई महिला आसिया बीबी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने आसिया को मृत्युदंड की सजा से मुक्त करते हुए बरी कर दिया है.
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ पाकिस्तान के अलग-अलग शहरों में विरोध प्रदर्शन हो रहा है. इस्लामाबाद और लाहौर में विरोध प्रदर्शन करने वालों ने कई गाड़ियों में आग लगा दी है.
देशभर में लगातार हो रहे प्रदर्शन को देखते हुए इस्लामाबाद, कराची, लाहौर जैसे क्षेत्रों में लोगों को बाहर ना आने के निर्देश दिए गए हैं. यहां तक कि ट्रैफिक में भी बदलाव किया गया है.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या दिया फैसला
आपको बता दें कि पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश साकिब निसार की अगुवाई वाली शीर्ष अदालत की तीन सदस्यीय पीठ ने बुधवार सुबह अपना फैसला सुनाया. पीठ ने इस नतीजे पर पहुंचने के करीब तीन सप्ताह बाद इस संबंध में फैसला सुनाया है. फैसला आने में हो रही देरी को देखते हुए ईशनिंदा विरोधी प्रचारकों ने प्रदर्शन की धमकी दी थी.
निसार ने फैसले में कहा, ‘‘उनकी दोषसिद्धि को निरस्त किया जाता है और अगर अन्य आरोपों के तहत जरूरी नहीं हो, तो उन्हें फौरन रिहा किया जाये.’’
आसिया बीबी पर क्या हैं आरोप?
आपको बता दें कि आसिया बीबी एक ईसाई महिला हैं, उनपर एक मुस्लिम महिला के साथ बातचीत करने के दौरान पैगंबर मोहम्मद के बारे आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है. हालांकि, वह इन आरोपों को लगातार नकारती आई हैं.
पाकिस्तान में ईशनिंदा एक बहुत संवेदनशील विषय रहा है. आलोचकों का कहना है कि इस कानून का गलत इस्तेमाल कर अक्सर अल्पसंख्यकों को फंसाया जाता है.
ये पूरा मामला 14 जून, 2009 का है जब एक दिन आसिया नूरीन अपने घर के पास फालसे के बगीचे में दूसरी महिलाओं के साथ काम करने पहुँची तो वहाँ उनका झगड़ा साथ काम करने वाली महिलाओं के साथ हुआ. आसिया ने अपनी किताब में इस घटना को सिलसिलेवार ढंग से बयां किया है.