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बढ़ते तनाव के बीच पाक का बयान, नहीं रुकेगा करतारपुर कॉरिडोर का काम

धारा 370 खत्म किए जाने के बाद भारत और पाकिस्तान के मध्य बढ़ते तनाव के बीच सिख श्रद्धालुओं के लिए राहत की खबर आई है. गुरुवार को पाकिस्तान की तरफ से साफ किया गया है कि करतारपुर कॉरिडोर परियोजना का काम अपनी तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगा.

गुरुद्वारा साहिब (फाइल फोटो) गुरुद्वारा साहिब (फाइल फोटो)

धारा 370 खत्म किए जाने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद सिख श्रद्धालुओं के लिए राहत की खबर आई है. गुरुवार को पाकिस्तान की तरफ से साफ किया गया है कि करतारपुर कॉरिडोर परियोजना का काम अपनी तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगा. पाकिस्तान की तरफ से यह बयान तब आया है जब वो बौखलाहट में भारत के खिलाफ एक के बाद एक कदम उठाए जा रहा है.

पाकिस्तान ने झुंझलाहट में भारत से अपने राजदूत को वापस आने का आदेश दे दिया है, वहीं भारतीय राजदूत को भी पाकिस्तान छोड़ने को कहा है. साथ ही भारत के साथ व्यापार को सीमित करने की भी घोषणा कर दी है. इसलिए ऐसी आशंका जताई जा रही थी कि कहीं करतारपुर कॉरिडोर परियोजना को भी पाकिस्तान अपना निशाना ना बना ले.

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भारत ने जब से अनुच्छेद 370 को रद्द किया है तब से ही पाकिस्तान बेचैन है और बदला लेने के लिए नए नए हथकंडे अपना रहा है. आपको बता दें कि धारा 370 जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देता था. जिसके तहत राज्य को कई अतिरिक्त अधिकार प्राप्त थे.

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल ने मीडिया को ब्रीफ करते हुए कहा, "करतारपुर कॉरिडोर परियोजना जारी रहेगी. पाकिस्तान सभी धर्मो का आदर करता है और वह परियोजना के साथ आगे बढ़ेगा."

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आगे बातचीत करते हुए फैसल ने कहा की यह कॉरिडोर भारत के सिख तीर्थयात्रियों को करतारपुर के नरोवल में स्थित, गुरुद्वारा दरबार साहिब तक आसानी से आने जाने का रास्ता मुहैया कराने के मकसद से बनाया जा रहा है. इसलिए भारत और पाकिस्तान ने साझा तौर पर इस कॉरिडोर के निर्माण पर सहमति बनाई. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने पिछले साल 28 नवंबर को पाकिस्तानी के हिस्से में करतारपुर कॉरिडोर की नींव रखी थी.

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इस स्थान से सिखों का भावनात्मक लगाव है, दरअसल यह गुरुद्वारा उसी जगह पर बना है जहां गुरु नानक देव जी ने 22 सितंबर 1539 में अंतिम सांस ली थी.

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करतारपुर कॉरिडोर को गुरु नानक देव के 550वीं जयंती पर नवंबर में खोला जाना है, जिससे श्रद्धालु इस खास मौके पर इस पवित्र स्थान के दर्शन कर सकें.

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