नाइजीरिया के पूर्वोत्तर राज्य बोर्नों में शुक्रवार को इस्लामी आतंकियों ने एक कस्बे पर हमला कर 300 से ज्यादा लोगों को अगवा कर लिया, जिसमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं. बताया कि ये हमला संभवतः बोको हरम के तीन कमांडरों को सेना द्वारा मार गिराए जाने के प्रतिशोध में किया गया है. हालांकि, अब तक किसी आतंकी संगठन ने इस अपहरण की जिम्मेदारी नहीं ली है.
ग्वोज़ा क्षेत्र के एक अधिकारी बुलामा सावा के अनुसार, ये हमला बोर्नो राज्य के न्गोशे कस्बे में हुआ. उन्होंने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि ये हमला संभवतः सेना द्वारा चलाए गए उस अभियान के प्रतिशोध में किया गया था, जिसमें बोको हराम आतंकवादी समूह के तीन कमांडरों को मार गिराया गया था. हालांकि, हमले की जिम्मेदारी तत्काल किसी ने नहीं ली.
उन्होंने बताया कि नाइजीरिया विभिन्न सशस्त्र समूहों से उत्पन्न जटिल सुरक्षा संकट से जूझ रहा है. अमेरिका ने पश्चिमी अफ्रीकी देश में असुरक्षा से निपटने के लिए सेना को सलाह देने हेतु सैनिक भेजे हैं.
सेना की जवाबी कार्रवाई
सैन्य प्रवक्ता उबा सानी ने जानकारी दी कि इसी हफ्ते बुधवार से शुक्रवार के बीच कोंडुगा, मार्टे, जकाना और मैनॉक समुदायों पर भी अलग-अलग हमले हुए.
प्रवक्ता के अनुसार, सेना ने इन हमलों को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया, लेकिन इस दौरान एक वरिष्ठ अधिकारी समेत कई जवान भी शहीद हो गए. सानी ने इन हमलों को आतंकियों की "बढ़ती हताशा" का प्रतीक बताया, जो सेना के निरंतर परिचालन दबाव के कारण विफल हो रहे हैं.
भूतों से लड़ रही है नाइजीरियाई सेना
विशेषज्ञ उल्फ लैसेंग का कहना है कि नगोशे पर हमला नाइजीरियाई सेना की उन कठिनाइयों का फायदा उठाता है, जो जिहादी समूहों के नियंत्रण वाले बड़े इलाकों में पहरा देने में आती हैं.
उन्होंने बताया कि सेना एक तरह से 'भूतों' से लड़ रही है, क्योंकि लड़ाके मोटरसाइकिलों पर गांवों में आते हैं और सेना के पहुंचने से पहले ही झाड़ियों में गायब हो जाते हैं. आतंकी अब ड्रोन का इस्तेमाल करके अपने लक्ष्यों की रेकी कर रहे हैं और सीमा पार सहयोग भी बढ़ा रहे हैं.
लोगों की बढ़ती सुरक्षा चिंता
आपको बता दें कि नाइजीरिया में बोको हरम, इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ्रीका प्रोविंस (ISWAP) और लाकुरावा जैसे कई खतरनाक समूह सक्रिय हैं. हाल ही में पड़ोसी साहेल क्षेत्र के आतंकियों, जैसे जमात नुसरत अल-इस्लाम वाल-मुस्लिमीन ने भी नाइजीरियाई धरती पर हमले शुरू कर दिए हैं.
संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, इस संकट में अब तक कई हजार लोग मारे जा चुके हैं. विश्लेषकों का मानना है कि सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रही है, जिससे स्थिति और बिगड़ती जा रही है.