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नेपाल ने भारत से जताई नाराजगी, अब इस पुराने समझौते पर फिर होगी बात

भारत और नेपाल के बीच दशकों से व्यापार समझौता चलता आ रहा है. यह समझौता हर सात साल पर अपने आप रिन्यू हो जाता है लेकिन इस बार जब यह अपने आप रिन्यू हो गया तो नेपाल ने आपत्ति जताई. नेपाल समझौते में कुछ संशोधन की मांग कर रहा है.

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भारत और नेपाल के बीच भारी मात्रा में व्यापार होता है (Photo- Reuters)
भारत और नेपाल के बीच भारी मात्रा में व्यापार होता है (Photo- Reuters)

भारत और नेपाल के बीच की व्यापार संधि हर बार की तरह नवंबर में अपने आप रिन्यू हो गई है जिसे लेकर नेपाल आपत्ति जताता रहा है. नेपाल का कहना है कि उससे बिना बातचीत किए ही व्यापार संधि को रिन्यू कर दिया गया. अब खबर है कि दोनों देश व्यापार संधि पर दोबारा बातचीत करने को लेकर राजी हो गए हैं. भारत व्यापार संधि से जुड़ी नेपाल की सभी चिंताओं पर बात करने के लिए सहमत हो गया है. इसी के साथ ही भारत और नेपाल पारगमन यानी व्यापार के लिए ट्रकों की आवाजाही को लेकर एक द्विपक्षीय संधि को रिन्यू करने पर भी सहमत हो गए हैं. 

व्यापार संधि के नवीणीकरण पर बातचीत को लेकर समझौता 11-12 जनवरी के बीच काठमांडू में आयोजित नेपाल-भारत अंतर-सरकारी उप-समिति (IGSC)  के कार्यक्रम में हुआ.

व्यापार विश्लेषकों का कहना है कि भारत-नेपाल व्यापार समझौता पिछले साल नवंबर में अपने आप ही हो गया जिससे नेपाल को भारत के साथ अपने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए संधि में संशोधन की बात रखने का मौका नहीं मिला.
दोनों देशों के बीच 1978 में पहली बार व्यापार समझौता हुआ था और हर सात साल में यह समझौता रिन्यू होता है. आखिरी बार यह पिछले साल नवंबर के महीने में रिन्यू हुआ था.

व्यापार समझौते में कब होगा संशोधन?

नेपाल के उद्योग, वाणिज्य और आपूर्ति मंत्रालय के संयुक्त सचिव राम चंद्र तिवारी ने कहा, 'दोनों पड़ोसी देश व्यापार और ट्रांजिट को लेकर सभी विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने वाले हैं.' 

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द काठमांडू पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने कहा है कि व्यापार संधि में संशोधन की कोई तारीख अभी तय नहीं की गई है लेकिन जल्द ही संशोधन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.

काठमांडू में आयोजित IGSC कार्यक्रम में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव विपुल बंसल ने किया. कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले अधिकारियों ने बताया कि भारत-नेपाल द्विपक्षीय व्यापार, ट्रांजिट, कस्टम, सामानों के टेस्टिंग लैब स्थापित करने और सीमा पर व्यापार से संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और उसे बेहतर बनाने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई.

राम चंद्र तिवारी ने बताया, 'हमने जोगबनी-विराटनगर रेलवे को शुरू करने और भारत के कार्गो-हैंडलिंग की सुविधा पर भी चर्चा की. भारतीय बाजारों में नेपाली सामानों को बेचने को लेकर जो मुश्किलें आती हैं, उसे दूर करने को लेकर भी बातचीत हुई है.'

इस दौरान नेपाली पक्ष ने भारत के गेहूं, चावल, चीनी और प्याज जैसे सामानों पर बार-बार प्रतिबंध लगा देने के मुद्दे को भी उठाया. नेपाल का कहना है कि भारत की तरफ से बार-बार इस तरह के प्रतिबंध महंगाई और कालाबाजारी को बढ़ावा देते हैं.

राम चंद्र तिवारी कहते हैं, 'भारत से नेपाल आने वाले सामानों की कालाबाजारी को रोकने के लिए दोनों पक्ष इस क्षेत्र में मैकेनिज्म को मजबूत करने पर सहमत हुए हैं.'

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नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है भारत

भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है. नेपाल अपने कुल व्यापार का 65 फीसदी व्यापार भारत के साथ करता है. कस्टम विभाग के आंकड़े के मुताबिक, 2019-20 में भारत से नेपाल में साल-दर-साल आयात बढ़कर 735.29 अरब रुपया हो गया.

2020-21 में यह बढ़कर 971.60 अरब रुपया हो गया. नेपाल का भारत से आयात तेजी से बढ़ा और 2021-22 में खरब का आंकड़ा पार करते हुए 1.20 खरब रुपये तक पहुंच गया, जो अब तक का रिकॉर्ड है.

हालांकि, जुलाई 2023 के मध्य में खत्म हुए वित्तीय वर्ष में आयात घटकर 1.02 खरब रुपये रह गया. इसी तरह, 2019-20 में नेपाल से भारत को निर्यात 70.10 अरब रुपये था, जो 2020-21 में बढ़कर 106.37 अरब रुपये हो गया. भारत के साथ नेपाल का व्यापार घाटा फिलहाल 921.16 अरब रुपये है.

व्यापार विशेषज्ञों ने कहा कि दोनों देशों के बीच बढ़ता व्यापार घाटा, मूल्य निर्धारण ने नेपाल का शामिल न होना जैसे मुद्दों पर बात होनी चाहिए.

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