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1 घंटे चली मोदी-जिनपिंग मुलाकात, बॉर्डर पर शांति-आपसी भरोसे से साथ चलने पर सहमति

73 दिनों तक चले डोकलाम विवाद के बाद यह पहली बार है जब दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई. इस बैठक में डोकलाम विवाद पर चर्चा तो नहीं हुई, लेकिन चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत के साथ पंचशील समझौते पर साथ चलने की बात कही है.

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ब्रिक्स समिट का दूसरा दिन ब्रिक्स समिट का दूसरा दिन

चीन के श्यामन में चल रहे मंगलवार को ब्रिक्स समिट से अलग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई. दोनों नेताओं के बीच ये मुलाकात करीब 1 घंटे तक चली. 73 दिनों तक चले डोकलाम विवाद के बाद यह पहली बार है जब दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई. इस बैठक में डोकलाम विवाद पर चर्चा तो नहीं हुई, लेकिन चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत के साथ पंचशील समझौते पर साथ चलने की बात कही है.

5 सितंबर, 2017 ब्रिक्स समिट के लाइव अपडेट्स -

- पीएम मोदी और शी जिनपिंग की बैठक के बाद विदेश सचिव एस. जयशंकर ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच 1 घंटे से ज्यादा देर तक बातचीत हुई. जयशंकर ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच ब्रिक्स देशों से जुड़े कई मुद्दों पर बात हुई. दोनों नेताओं के बीच काफी सकारात्मक रवैये में बात हुई. दोनों नेताओं ने कहा कि दोनों देशों को आपसी भरोसा बढ़ाने की जरूरत है.

- जयशंकर ने कहा कि इस बैठक में आतंकवाद के मुद्दे पर बात नहीं हुई है, लेकिन ब्रिक्स की बैठक में इस पर बात हुई थी. दोनों देशों ने बॉर्डर पर शांति बनाए रखने बात कही है.

 

- चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि भारत और चीन दो बड़े पड़ोसी देश हैं, इसके साथ ही हम दोनों दुनिया की सबसे बड़े और उभरते हुए देश भी हैं.

- द्विपक्षीय बैठक में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पीएम मोदी से कहा कि वह भारत के साथ मिलकर पंचशील समझौते के 5 सिद्धांतों पर साथ चलने को तैयार हैं.

- चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि तेज गति से बदलते वैश्विक परिवेश में ब्रिक्स को और भी ताकतवर बनाने में ये सम्मेलन काफी मददगार होगा. पीएम मोदी ने इस दौरान गोवा में हुए ब्रिक्स सम्मेलन का भी जिक्र किया.

- पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता शुरू

- ब्रिक्स समिट से इतर मिस्त्र के राष्ट्रपति से भी मिले पीएम मोदी.

- BRICS में बिजनेस काउंसिल को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हमारी सरकार ने बिजनेस को आसान करने के लिए कदम उठाए हैं. मोदी ने कहा कि हम मजबूत अंतरराष्ट्रीय संबंधों के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं. पीएम ने अपने भाषण में सबका साथ-सबका विकास की बात की.

- मोदी ने कहा कि हम लोगों को एक साथ काम करने की जरूरत है, हमारे देश ने डिजिटल क्षेत्र में काफी काम किया है. मोदी ने बताया कि भारत अफ्रीका के साथ मिलकर कई प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है.

- पीएम ने कहा कि भारत एक तेजी से बढ़ता हुआ देश है. पीएम ने अपने भाषण में एक बार आतंकवाद का जिक्र किया, मोदी ने कहा कि हम सभी को आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ना होगा.

- मोदी ने कहा कि आतंकवाद से लड़ने के लिए मिलकर हमें नए कदम उठाने होंगे. हमारे लिए आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और आपदा प्रबंधन से लड़ने को तैयार होना होगा.

- मोदी ने क्लाइमेट चेंज के मुद्दे पर कहा कि अगर हमें हरी-भरी दुनिया का निर्माण करना है, तो सभी को एक साथ काम करना होगा.

-पीएम मोदी, शी जिनपिंग, व्लादिमीर पुतिन इंटरनेशनल कांफ्रेंस सेंटर पहुंचे.

- पीएम मोदी इंटरनेशनल कांफ्रेंस सेंटर पहुंचे, सभी देशों के नेता यहां पर ब्रिक्स समिट के लिए औपचारिक फोटोशूट करवाएंगे.

 

आतंकवाद पर झुका चीन!

चीन के श्यामन में चल रहे ब्रिक्स समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जोर-शोर से आतंकवाद का मुद्दा उठाया. पीएम मोदी के इस दबाव का असर भी दिखा. ब्रिक्स श्यामन 2017 के घोषणापत्र में आतंकवाद का जिक्र किया गया है. इस घोषणापत्र में लश्कर-ए-तयैबा, जैश-ए-मोहम्मद समेत कुल 10 आतंकी संगठनों का जिक्र है.

क्या कहा गया है घोषणापत्र में ?

ब्रिक्स समिट में भारत ने आतंकवाद का मुद्दा उठाया. ब्रिक्स श्यामन घोषणापत्र के 48वें पैराग्राफ में आतंकवाद पर कड़ी चिंता व्यक्त की गई है. इसमें लिखा गया है कि हम लोग आस-पास के इलाके में फैल रहे आतंकवाद और सुरक्षा की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हैं.

घोषणापत्र में कहा गया है कि हम लोग दुनिया भर में हुए आतंकी हमलों की कड़ी निंदा की. इसमें कहा गया है कि आतंकवाद को किसी भी तरह से स्वीकार नहीं किया जा सकता है. घोषणापत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि सभी ब्रिक्स देश आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ेंगे.

 

मोदी के दौरे से पहले सुलझा डोकलाम

पीएम मोदी के चीन दौरे से ठीक पहले दोनों देशों ने डोकलाम विवाद को सुलझाने का दावा किया था. दोनों देशों ने आपसी सहमति से डोकलाम से अपनी-अपनी सेनाएं हटाने की बात की थी. हालांकि चीन का कहना था कि उसकी सेना डोकलाम में पेट्रोलिंग करती रहेगी.

क्या था डोकलाम विवाद?

गौरतलब है कि सिक्किम सीमा सेक्टर के पास डोकलाम में भारत और चीनी सेना दो महीने से भी ज्यादा समय तक आमने-सामने थी. यह गतिरोध तब शुरू हुआ जब इस इलाके में चीनी सेना द्वारा किए जाने वाले सड़क निर्माण कार्य को भारतीय सैनिकों ने रोक दिया. भारत की चिंता यह थी कि अगर चीन डोकलाम में सड़क बनाने में कामयाब रहता है तो उसके लिए कभी भी उत्तर-पूर्व के हिस्से तक शेष भारत की पहुंच को रोक देना आसान हो जाएगा. डोकलाम इलाके को भूटान अपना मानता है, लेकिन चीन का दावा है कि यह उसके क्षेत्र में आता है.

 

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