थाईलैंड के एक डे केयर सेंटर में बीते हफ्ते एक शख्स ने अंधाधुंध फायरिंग कर 34 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था. लेकिन इस घटना में तीन साल की बच्ची का सकुशल बचना किसी चमत्कार से कम नहीं है. इस पूरे कत्लेआम के दौरान यह बच्ची क्लास के एक कोने में कंबल में सोती रही.
इस बच्ची का नाम Paveenut Supolwong है, जिसका निकनेम एमी है. बच्ची के माता-पिता का कहना है कि एमी वैसे तो गहरी नींद में नहीं सोती लेकिन छह अक्टूबर को जिस समय हत्यारा डे केयर सेंटर में बच्चों को मौत के घाट उतार रहा था, एमी सो रही थी. वह गहरी नींद में थी और उसका चेहरा कंबल से ढका हुआ था. शायद इसी वजह से वह बच पाई.
इस घटना में वह एकमात्र बच्ची है, जो बचने में सफल रही. एमी की मां पानोमपई सिथोंग ने कहा, मैं सदमें में हूं. मुझे पीड़ित परिवारों के दुख का अहसास है. लेकिन मैं खुश भी हूं कि मेरी बच्ची बच गई. यह उदासी और आभार का मिला-जुला अहसास है.
एमी के मां-बाप का कहना है कि इस घटना के बारे में उनकी बेटी को कुछ भी पता नहीं है. जब हत्यारा क्लासरूम से चला गया तो किसी को एमी क्लास के एक कोने में मिली. उसे बाहर लाया गया. उसका चेहरा कंबल से ढका हुआ था इसलिए वह बच्चों के शव नहीं देख पाई.
पुलिस के मुताबिक, एमी जिस क्लासरूम में सो रही थी, उसमें 11 बच्चों को मारा गया. दो बच्चे अस्पताल में भर्ती हैं, जो गंभीर रूप से घायल हैं.
बच्ची का बचना चमत्कार से कम नहीं
इस विभत्स घटना के बीच एमी का बाल भी बांका नहीं हुआ. इसे लोग चमत्कार ही बता रहे हैं. एमी की मां का कहना है कि फरिश्तों ने उनकी बेटी की जान बचाई है.
वह कहती हैं, मेरी बेटी कभी गहरी नींद में नहीं सोती. मुझे लगता है कि किसी फरिश्ते ने ही मेरी बेटी के आंख और कान ढक दिए होंगे ताकि उसे कुछ सुनाई नहीं दे सके.
उनके एक संबंधी ने स्थानीय मीडिया को बताया कि एमी का बचना चमत्कार ही है. हालांकि, इस घटना में एमी की बेस्ट फ्रेंड दो साल की तेचिन और उनकी टीचर की मौत हो गई. एमी की मां कहती हैं, वह (एमी) अपनी दादी से पूछती है कि तेचिन को स्कूल से क्यों नहीं बुलाते?
बता दें कि थाईलैंड के एक डे केयर सेंटर में एक शख्स ने छह अक्टूबर को अंधाधुंध फायरिंग कर 34 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था. इनमें अधिकतर बच्चे थे. बाद में उसने अपनी बीवी और बच्चे को भी गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी. 34 साल का यह हत्यारा पान्या खामराप था, जो थाईलैंड पुलिस में भी काम कर चुका था. इसे नशाखोरी के जुर्म में नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था.