फ्लोरिडा के पाम बीच पर स्थित मार-ए-लागो (डोनाल्ड ट्रंप का निजी आवास) में 31 दिसंबर, 2025 को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप के साथ पत्रकारों से मिलने बाहर आए. यह एक सामान्य दिन जैसा ही प्रतीत हो रहा था. पत्रकारों ने जब ट्रंप से उनके न्यू ईयर रेजोल्यूशन (नववर्ष के लिए संकल्प) के बारे में पूछा, तो उन्होंने बिना रुके जवाब दिया- 'मेरा संकल्प है विश्व में शांति लाना'. इसके तीन दिन बाद, दुनिया ने देखा और समझा कि ट्रंप अपने इन शब्दों को कैसे परिभाषित करते हैं.
मार-ए-लागो में वॉर सेक्रेटरी पीट हेगसेथ, विदेश मंत्री मार्को रूबियो और जनरल डैन केन के साथ खड़े होकर ट्रंप ने घोषणा की कि संयुक्त राज्य अमेरिका पिछले चार दिनों से ऑपरेशन ‘एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ की तैयारी कर रहा था, जिसका उद्देश्य वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाना था. खराब मौसम के कारण कार्रवाई को टालकर 3 जनवरी की अल सुबह अंजाम दिया गया. यानी, ट्रंप अपने न्यू ईयर रेजोल्यूशन ‘वर्ल्ड पीस’ की सार्वजनिक घोषणा करने से पहले ही इस सैन्य अभियान को मंजूरी दे चुके थे.
यह कोई विरोधाभास नहीं था, बल्कि एक पैटर्न था. ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के एक वर्ष पूरे होने पर उनकी राष्ट्रपति पद की सबसे बड़ी विशेषता अव्यवस्था नहीं, बल्कि निर्णयात्मकता है. जिन विश्लेषकों को उम्मीद थी कि अपने दूसरे कार्यकाल में ट्रंप संयमित दिखेंगे या पहले कार्यकाल जैसी अराजकता नहीं दोहराई जाएगी, उन्होंने इस क्षण को गलत समझा. ट्रंप प्रशासन न तो हिचकिचाता है और न ही तात्कालिक निर्णयों पर चलता है. यह सुव्यवस्थित, उद्देश्यपूर्ण और अमेरिकी शक्ति के प्रयोग को लेकर पूरी तरह स्पष्ट है.
मेक अमेरिका ग्रेट अगेन सिर्फ चुनावी नारा नहीं
ट्रंप ने कोल्ड वॉर के बाद से अमेरिकी विदेश नीति को दिशा देने वाली परिचित शब्दावली-गठबंधन प्रबंधन, बहुपक्षीय सहमति और नैतिक संकेतों को त्याग दिया है. उसकी जगह एक सरल लेकिन कठोर सिद्धांत ने ले ली है: मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (MAGA) नारे के रूप में नहीं, बल्कि शासन की तार्किक नींव के रूप में. दशकों तक वॉशिंगटन ने वेनेजुएला को रूस और चीन की रणनीतिक की ओर धीरे-धीरे खिसकते देखा. बीजिंग का मादुरो से जुड़ाव खुला और लेन-देन आधारित था.
जो दृश्य इतिहास में दर्ज होगा, वह यह है कि अमेरिकी बलों द्वारा मादुरो को उनके निवास से बंधक बनाए जाने से महज बारह घंटे पहले एक चीनी प्रतिनिधिमंडल उनसे मुलाकात कर रहा था. संकेत साफ था- अमेरिकी प्रभाव, जिसे लंबे समय से टाल दिया गया था, अचानक और निर्णायक रूप से लौट आया. यह अभियान धरातल पर तेज और लगभग सहज प्रतीत हुआ. लेकिन बाद में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने पुष्टि की कि यह महीनों की तैयारी का परिणाम था-क्षेत्रीय सैन्य तैनाती, खुफिया एजेंसियों का समन्वय और सबसे अहम, मादुरो के आसपास मौजूद एक सीक्रेट ह्यून सोर्स, जो अंतिम क्षणों तक उनकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए था.
वेनेजुएला का तेल उत्पादन संभालेगा अमेरिका
इसके बाद जो हुआ, वह स्वयं अभियान से भी अधिक महत्वपूर्ण था. ट्रंप ने मानवीय हस्तक्षेप या लोकतंत्र की बहाली जैसी अवधारणाओं का सहारा नहीं लिया. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वेनेजुएला में सत्ता हस्तानांतरण की प्रक्रिया अमेरिका की देखरेख में संपन्न होगी. उन्होंने यह भी घोषणा की कि अमेरिकी कंपनियां वेनेजुएला के तेल उत्पादन को संभालेंगी और राजस्व का एक हिस्सा देश को स्थिर करने तथा जनता की स्थिति सुधारने में लगाया जाएगा. पिछले प्रशासन भी ऐसा करते रहे हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि ट्रंप दशकों में पहले अमेरिकी राष्ट्रपति हैं जिन्होंने बिना लाग-लपेट इन नीतियों की सार्वजनिक घोषणा की है.
लगभग सत्तर वर्षों तक अमेरिकी विदेश नीति मध्यस्थों, प्रतिनिधियों और ‘प्लॉजिबल डिनायबिलिटी’ (अस्वीकार्यता की संभावना) पर निर्भर रही. प्रभाव अप्रत्यक्ष रूप से इस्तेमाल किया गया- अक्सर ऐसे नेताओं के माध्यम से, जिनकी वैधता अमेरिकी समर्थन हटते ही ढह गई. ईरान में शाह से लेकर अफगानिस्तान में हामिद करजई तक, यह पैटर्न बार-बार दोहराया गया. ट्रंप ने राजनीति में आने से बहुत पहले ही इस मॉडल की आलोचना की थी. उनका तर्क रहा है कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने उन नियमों से खुद को बांधकर चीन जैसी शक्तियों को लाभ पहुंचा दिया, जिन्हें उनके प्रतिस्पर्धी कभी मानते ही नहीं. उन्होंने इस इंटरनेशनल लिबरल बिलीफ को खारिज किया कि वैधता सहमति से आती है, न कि क्षमता से.
रोनाल्ड रीगन की नीति अपना रहे डोनाल्ड ट्रंप
रिचर्ड निक्सन से उलट ट्रंप कूटनीति को दबाव से अलग नहीं मानते. रोनाल्ड रीगन की तरह वह मानते हैं कि प्रतिरोध के लिए स्पष्टता जरूरी है, आश्वासन नहीं. निक्सन ने चीन से संबंध नैतिक अपील से नहीं, बल्कि रणनीतिक झटके से खोले. रीगन ने हथियार नियंत्रण पर बातचीत तभी की, जब उन्होंने मॉस्को को यह विश्वास दिला दिया कि अमेरिकी सैन्य विस्तार वास्तविक है. ट्रंप भी इसी परंपरा में काम करते हैं, भावुकता से मुक्त होकर.
विदेशी नेताओं से उनके प्रश्न सीधे होते हैं: इससे अमेरिका को क्या लाभ होगा? अमेरिकियों को क्या मिलेगा? यहां अमेरिकी शक्ति क्यों खर्च की जाए? यदि उत्तर उन्हें संतुष्ट नहीं करते, तो वह पीछे हट जाते हैं. मादुरो, अधिकांश आकलनों के अनुसार, अंतिम दिनों तक इस वास्तविकता को समझ नहीं पाए. वेनेजुएला कोई अलग-थलग लक्ष्य नहीं था. यह ट्रंप की तीन प्राथमिकताओं में शामिल था- पश्चिमी गोलार्ध में चीनी और रूसी प्रभाव को खत्म करना, नारकोटिक्स नेटवर्क को बाधित करना, और एआई-ड्रिवेन ग्लोबल इकोनॉमी में लंबे समय के लिए एनर्जी डॉमिनेंस सुनिश्चित करना. ट्रंप के लिए ऊर्जा सुरक्षा पर्यावरणीय बहस नहीं, बल्कि तकनीकी और रणनीतिक श्रेष्ठता की बुनियाद है.
अमेरिका का लक्ष्य एनर्जी सप्लाई चेन पर कंट्रोल
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अभूतपूर्व मात्रा में ऊर्जा की जरूरत होगी. इसलिए एनर्जी सप्लाई चेन पर नियंत्रण भविष्य की शक्ति-संतुलन पर नियंत्रण है. दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक पर बैठा ऐसा शासन (वेनेजुएला में मादुरो सरकार), जो अमेरिका के खिलाफ था, ट्रंप की नीति से मेल नहीं खा रहा था. इसलिए, ट्रंप प्रशासन ने इस स्थिति को बदलने के लिए निर्णायक कार्रवाई की. आलोचकों का कहना है कि यह दृष्टिकोण अस्थिरता पैदा करता है और स्थापित मानदंडों को तोड़ता है. लेकिन यह ट्रंप की मूल धारणा को गलत पढ़ना है. वह पोस्ट कोल्ड वॉर सिस्टम को बचाने की कोशिश नहीं कर रहे, बल्कि यह मान चुके हैं कि वह व्यवस्था पहले ही ढह चुकी है.
ईरानी परमाणु ढांचे को समाप्त करने वाले 'ऑपरेशन मिडनाइट हैमर' से लेकर मादुरो के शासन को कुछ ही घंटों में समाप्त करने वाले 'ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व' तक, ट्रंप ने एक सुसंगत संदेश दिया है: अमेरिकी शक्ति अब प्रक्रियाओं के जाल में नहीं फंसेगी, सहमति के नाम पर टाली नहीं जाएगी और कूटनीतिक शब्दों के पीछे छिपाई नहीं जाएगी. ट्रंप शायद कभी लिबरल एलीट क्लास या डिप्लोमेटिक इंस्टीट्यूशन के प्रिय न बनें. लेकिन अपने दूसरे कार्यकाल के दूसरे वर्ष में प्रवेश करते हुए वह संभवतः कुछ अधिक महत्वपूर्ण बन चुके हैं. एक ऐसा राष्ट्रपति जो यह पुनर्परिभाषित कर रहा है कि अमेरिकी शक्ति कैसे इस्तेमाल की जाती है, और कितनी खुले तौर पर उसे स्वीकार किया जाता है. दुनिया इसे पसंद करे या न करे, लेकिन अब ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका की नीति स्पष्ट है.