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कौन हैं मादुरो की पावरफुल पत्नी सिलिया फ्लोरेस, जिन्हें 'लेडी मैकबेथ' के नाम से जानता है वेनेजुएला

अमेरिका ने वेनेजुएला पर अटैक किया है और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार किया है. सिलिया पर अमेरिका ने नार्को-आतंक के आरोप लगाए हैं. TV स्टार से सत्ता के शिखर तक पहुंचने वाली मादुरो की पत्नी सिलिया फ्लोरेस को वेनेजुएला में ‘लेडी मैकबेथ’ कहा जाता है. आइए जानते हैं फ्लोरेस की कहानी... जो सत्ता के पीछे की ताकत बनकर चर्चा में रहीं.

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After US strikes hit Caracas, Venezuelan President Nicolas Maduro and his wife, Cilia Flores, were claimed by Donald Trump to have been captured by American forces. (Images: File/Social Media)
After US strikes hit Caracas, Venezuelan President Nicolas Maduro and his wife, Cilia Flores, were claimed by Donald Trump to have been captured by American forces. (Images: File/Social Media)

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की पत्नी सिलिया फ्लोरेस को लंबे समय से कराकस की सत्ता के पीछे की असली ताकत माना जाता रहा है. ‘लेडी मैकबेथ’ और ‘फर्स्ट कॉम्बैटेंट’ जैसे नामों से चर्चित फ्लोरेस, वकील और टीवी स्टार से लेकर सत्ता के केंद्र तक पहुंचीं. अब अमेरिका ने मादुरो और फ्लोरेस को गिरफ्तार कर लिया है और न्यूयॉर्क में नार्को-आतंकवाद के मामलों में मुकदमे की तैयारी की जा रही है.

वेनेजुएला की राजनीति में सिलिया फ्लोरेस का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है. राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की पत्नी होने के साथ-साथ उन्हें सत्ता के फैसलों में सबसे प्रभावशाली चेहरा माना जाता है. उनकी महत्वाकांक्षा, सख्त छवि और पर्दे के पीछे प्रभाव के चलते उन्हें 'लेडी मैकबेथ' कहा जाता है, जो शेक्सपियर के मशहूर किरदार से लिया गया नाम है.

शनिवार तड़के अमेरिकी डेल्टा फोर्स ने वेनेजुएला की राजधानी कराकस में कार्रवाई की. इसके कुछ घंटे बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि बड़े पैमाने पर किए गए हवाई हमलों के बाद मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को अमेरिकी बलों ने पकड़ लिया है.

अमेरिकी अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी ने कहा कि मादुरो और फ्लोरेस को कराकस से बाहर ले जाया गया और वे USS इवो जिमा पर सवार थे. उनके खिलाफ न्यूयॉर्क में आपराधिक आरोप तय किए गए हैं और उन्हें अमेरिकी अदालतों में मुकदमे का सामना करना होगा.

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साधारण परिवार से सत्ता तक का सफर

69 साल की सिलिया फ्लोरेस का जन्म 1956 में वेनेजुएला के कोजेडेस राज्य के एक छोटे से कस्बे में हुआ था. उनका पालन-पोषण साधारण परिवार में हुआ. युवावस्था में उन्हें 'बाइकर गर्ल' के नाम से जाना जाता था, जो उनके बेबाक स्वभाव को दर्शाता है.

उन्होंने कानून की पढ़ाई की और 1990 के दशक में राजनीति की ओर कदम बढ़ाया. उनका उभार वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज और बोलिवेरियन क्रांति से गहराई से जुड़ा रहा. यही वह दौर था जब चावेज, मादुरो के राजनीतिक गुरु बने.

वकालत और टीवी से बनी पहचान

सिलिया फ्लोरेस पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर तब चर्चा में आईं जब उन्होंने 1992 में असफल तख्तापलट के बाद ह्यूगो चावेज का बचाव किया. बतौर प्रमुख वकील, उन्होंने चावेज की रिहाई में अहम भूमिका निभाई, जिससे 1994 में चावेज जेल से बाहर आए. इसी ने उन्हें समाजवादी आंदोलन के केंद्र में ला खड़ा किया.

अदालत के अलावा फ्लोरेस ने टेलीविजन के जरिए भी अपनी पहचान बनाई. उन्होंने एक टीवी शो होस्ट किया, जिसमें सरकारी कल्याण योजनाओं के लाभार्थियों को दिखाया जाता था. इससे सरकार की सामाजिक छवि को मजबूत करने में मदद मिली.

एक रिपोर्ट के मुताबिक, फ्लोरेस भारतीय आध्यात्मिक गुरु सत्य साईं बाबा की अनुयायी भी रही हैं. साल 2005 में मादुरो के साथ उन्होंने आंध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी स्थित प्रशांति निलयम आश्रम का दौरा किया था, जहां उनकी सत्य साईं बाबा से मुलाकात हुई थी.

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संसद से अटॉर्नी जनरल तक

1999 में चावेज के सत्ता में आने के बाद फ्लोरेस का राजनीतिक कद तेजी से बढ़ा. उन्होंने 2000 से 2012 तक नेशनल असेंबली की सदस्य के रूप में काम किया. 2006 में वे वेनेजुएला की संसद की पहली महिला अध्यक्ष बनीं और 2011 तक इस पद पर रहीं. 2012 से 2013 के बीच उन्होंने अटॉर्नी जनरल का पद संभाला.

2017 में राजनीतिक संकट के दौरान उन्होंने नेशनल असेंबली से इस्तीफा दिया और विवादित संविधान सभा में शामिल हो गईं, जहां वे 2026 की शुरुआत तक रहीं. सत्तारूढ़ यूनाइटेड सोशलिस्ट पार्टी ऑफ वेनेजुएला में वे संगठन की केंद्रीय रणनीतिकार मानी जाती हैं और चावेज के ‘टैक्टिकल कमांड फॉर द रेवोल्यूशन’ में भी उनकी अहम भूमिका रही.

'लेडी मैकबेथ' क्यों कहा जाता है?

सिलिया फ्लोरेस और निकोलस मादुरो की मुलाकात 1990 के दशक में चावेज के राजनीतिक नेटवर्क के जरिए हुई. जुलाई 2013 में दोनों ने शादी की. ठीक उसी समय जब चावेज की मौत के बाद मादुरो राष्ट्रपति बने.

मादुरो अक्सर सार्वजनिक मंचों पर फ्लोरेस को अपना सबसे करीबी सलाहकार बताते रहे हैं. इसी वजह से उन्हें 'फर्स्ट कॉम्बैटेंट' कहा जाने लगा. आलोचक उन्हें सत्ता की कठपुतली चलाने वाली ताकत बताते हैं और कुछ लोग उनकी तुलना ‘हाउस ऑफ कार्ड्स’ की क्लेयर अंडरवुड से भी करते हैं.

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नार्को लिंक और परिवार पर आरोप

फ्लोरेस के कार्यकाल में उन पर भाई-भतीजावाद के आरोप लगे. रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि उनके 16 रिश्तेदारों को संसद में पद मिले. फ्लोरेस ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया.

उनके बेटे और मादुरो के परिवार के अन्य सदस्यों की लग्जरी जीवनशैली भी सवालों के घेरे में रही. 2015 में उनके भतीजों एफ्रेन एंटोनियो कैम्पो फ्लोरेस और फ्रांसिस्को फ्लोरेस डी फ्रेटास को अमेरिका की DEA ने हैती में गिरफ्तार किया. उन पर 800 किलो कोकीन अमेरिका तस्करी की कोशिश का आरोप था. 2016 में दोनों को दोषी ठहराया गया और 18 साल की सजा सुनाई गई. बाद में 2022 में कैदी अदला-बदली के तहत उन्हें रिहा किया गया.

अमेरिका ने 2016 में न्यूयॉर्क में सिलिया फ्लोरेस और मादुरो पर नार्को-आतंकवाद के आरोप तय किए. दोनों ने इन आरोपों को राजनीतिक बताया. 2018 में अमेरिका ने फ्लोरेस पर प्रतिबंध लगाए, जिसके बाद कनाडा, पनामा और कोलंबिया ने भी ऐसे कदम उठाए.

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