
जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की सनसनीखेज हत्या के मामले में चार साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. नारा जिला कोर्ट ने बुधवार को हमलावर तेत्सुया यामागामी को उम्रकैद की सजा दी. जापान के सार्वजनिक प्रसारक NHK के मुताबिक, अदालत ने अभियोजन पक्ष की मांग को स्वीकार करते हुए यामागामी को हत्या का दोषी ठहराया.
45 वर्षीय तेत्सुया यामागामी ने पहले ही अदालत में अपना अपराध स्वीकार कर लिया था. उसने जुलाई 2022 में पश्चिमी जापान के नारा शहर में चुनावी प्रचार के दौरान शिंजो आबे की गोली मारकर हत्या कर दी थी. घटना के वक्त आबे एक ट्रेन स्टेशन के बाहर भाषण दे रहे थे. टीवी फुटेज में दो गोलियों की आवाज सुनाई दी थी, जिसके बाद आबे मंच पर गिर पड़े. अधिकारियों के मुताबिक उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी.
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शिंजो आबे जापान के सबसे प्रभावशाली और लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेताओं में से एक थे. हत्या के समय वह प्रधानमंत्री पद पर नहीं थे, लेकिन सक्रिय सांसद के तौर पर चुनाव प्रचार में जुटे हुए थे. सख्त गन कंट्रोल वाले जापान में इस हत्या ने देश को गहरे सदमे में डाल दिया था.

चर्च को नुकसान पहुंचाने जैसी नीति बनाने का लगाया था आरोप
अदालत में यामागामी ने बताया कि उसने यह हमला एक विवादित धार्मिक संगठन यूनिफिकेशन चर्च के प्रति गहरी नफरत के चलते किया. उसने कहा कि आबे द्वारा चर्च से जुड़े एक संगठन को भेजे गए वीडियो संदेश के बाद उसने आबे को निशाना बनाया. यामागामी के अनुसार, उसका असली मकसद चर्च को नुकसान पहुंचाना और जापानी राजनीति से उसके कथित संबंधों को उजागर करना था.
दोषी को कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा
प्रॉसिक्यूशन ने यामागामी के लिए उम्रकैद की सजा की मांग की थी, जबकि बचाव पक्ष ने अधिकतम 20 साल की सजा की अपील की थी. वकीलों ने तर्क दिया कि आरोपी का बचपन चर्च से जुड़ी पारिवारिक परेशानियों में बीता. हालांकि अदालत ने इन दलीलों को खारिज कर दिया.
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इस हत्या के बाद सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी और यूनिफिकेशन चर्च के कथित करीबी संबंधों पर भी बड़ा खुलासा हुआ. इसके चलते चर्च की टैक्स छूट समाप्त की गई और उसे भंग करने का आदेश दिया गया. साथ ही, जापान में वीआईपी नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त किया गया.