iran protest ईरान में जल्द ही कुछ बड़ा होने की आशंका बढ़ गई है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ईरानी प्रदर्शनकारियों को उकसाया. इसके बाद पत्रकारों से बातचीत में सस्पेंस और गहरा कर दिया है. ट्रंप ने कहा कि ईरानियों के लिए मदद भेज रहा हूं. ये मदद किस तरह की होगी, इस सवाल पर ट्रंप बोले- जल्द ही खुद बता चल जाएगा. इससे पहले, ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने प्रदर्शनकारियों से सड़कों पर डटे रहने की अपील कर चुके हैं.
बता दें कि पहले मंगलवार दोपहर में खबर आई थी कि ट्रंप ने ईरान के खिलाफ मिलिट्री एक्शन रोक दिया है. कहा गया था कि वो तेहरान को बातचीत का एक और ऑफर दे रहे हैं. लेकिन इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बयान दिया. उन्होंने कहा था कि हम किसी भी कदम के लिए तैयार हैं. अगर वे फिर से मिलिट्री ऑप्शन आजमाना चाहते हैं, जिसे वे पहले ही आजमा चुके हैं, तो हम तैयार हैं.
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चीन ने ईरान के आंतरिक मामलों में किसी भी तरह के बाहरी हस्तक्षेप का विरोध किया है. यह बयान चीन के विदेश मंत्रालय ने उस वक्त दिया, जब डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि अमेरिका तेहरान के खिलाफ बहुत कड़ी कार्रवाई कर सकता है. चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, चीन समर्थन करता है और उम्मीद करता है कि ईरानी सरकार और जनता मौजूदा मुश्किलों से उबरें और राष्ट्रीय स्थिरता बनाए रखें. उन्होंने आगे कहा, इसके साथ ही चीन किसी भी देश के आंतरिक मामलों में बाहरी ताकतों के हस्तक्षेप का विरोध करता है और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बल प्रयोग या उसकी धमकी का समर्थन नहीं करता. ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों को लेकर ट्रंप ने पत्रकारों से कहा था, हम इसे बहुत गंभीरता से देख रहे हैं. सेना इस पर नजर बनाए हुए है और हम कुछ बेहद कड़े विकल्पों पर विचार कर रहे हैं. हम जल्द ही कोई फैसला लेंगे.
अल जजीरा न्यूज़ के मुताबिक, ईरान में मौजूदा स्थिति पिछले कुछ दिनों की तुलना में काफी हद तक शांत है. गुरुवार रात से जब अशांति हिंसा में बदलती दिखी थी, अब घटनाओं में धीरे-धीरे कमी देखी जा रही है. इसी बीच सोमवार को सरकार के समर्थन में हजारों की संख्या में ईरानी नागरिक एक बड़े जनसभा में शामिल हुए. सरकार इस जनसमर्थन को उन लोगों के खिलाफ सुरक्षा कदम और सख्त करने की एक तरह की हरी झंडी के तौर पर देख रही है, जिन्हें वह उपद्रवी या आतंकी समूह कहती है. सरकारी टेलीविजन पर ऐसे लोगों की तस्वीरें दिखाई गई हैं, जिनकी पहचान स्पष्ट नहीं है और जिन्हें हथियारों के साथ आम नागरिकों पर हमला करते हुए दिखाया गया. फिलहाल हालात अपेक्षाकृत शांत नजर आ रहे हैं, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणियों के बाद लोगों में भ्रम और डर का माहौल है. यहां लोगों से बात करने पर निराशा के साथ-साथ हालात और बिगड़ने की आशंका साफ महसूस की जा रही है.
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा है कि देश में खराब होती आर्थिक स्थिति को लेकर ईरानी नागरिकों की मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए. सरकारी इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक, उन्होंने यह बात कही. अर्थव्यवस्था मंत्री और उनके डिप्टी के साथ एक बैठक में पेजेशकियान ने कहा कि अगर नागरिकों की मांगों पर पहले ही ध्यान दिया गया होता तो आज सड़कों पर उनके विरोध प्रदर्शन देखने को नहीं मिलते. उन्होंने कहा, व्यापारियों, बाज़ारियों और समाज के अलग-अलग वर्गों की आवाज़ सड़कों पर सुनाई देने से पहले ही हमें उनकी मांगों और चिंताओं पर काम करना चाहिए, ताकि उनके लिए समाधान निकाले जा सकें. पेजेशकियान ने यह भी कहा कि आर्थिक विकास की योजनाओं को राजधानी तक सीमित रखने के बजाय अन्य क्षेत्रों तक विकेंद्रीकृत किया जाना चाहिए, खासकर दक्षिणी बंदरगाह शहरों पर विशेष ध्यान दिया जाना जरूरी है.
ईरान में प्रदर्शनों के दौरान अब तक 2,400 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों के मारे जाने की सूचना है. इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में कथित तौर पर दी जा रही फांसी की सजाओं को लेकर चेतावनी जारी की है. ईरान लगातार छठे दिन बिना इंटरनेट के है.
ईरानी सरकारी टीवी के मुताबिक, देशभर में हुए प्रदर्शनों के दौरान मारे गए सुरक्षा बलों के जवानों के लिए सरकार सामूहिक अंतिम संस्कार का आयोजन करेगी. सरकारी टीवी ने बताया कि जिन लोगों की मौत हुई है, उन्हें 'शहीद और सुरक्षा के रक्षक' बताया गया है. अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम के अनुसार, यह अंतिम संस्कार बुधवार को तेहरान विश्वविद्यालय में होगा. यह आने वाले दिनों में सुरक्षा बलों के लिए आयोजित किए जाने वाले कई सरकारी अंतिम संस्कारों में पहला होगा. ईरान के सरकारी मीडिया का कहना है कि प्रदर्शनों की शुरुआत के बाद से अब तक 100 से ज्यादा सुरक्षा कर्मियों की हिंसा में मौत हो चुकी है. अधिकारियों ने इन हमलों के लिए 'विदेशी तत्वों' को जिम्मेदार ठहराया है.
संयुक्त राष्ट्र (UN) के अधिकारियों ने कहा है कि ईरान में तैनात 500 से अधिक संयुक्त राष्ट्र कर्मचारी सुरक्षित हैं और सभी का पता लगाया जा चुका है. संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टेफान दुजारिक ने पत्रकारों को बताया कि देशभर में फैली अशांति के चलते कई UN कर्मचारी घर से काम कर रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस अशांति में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है. ईरान में संयुक्त राष्ट्र की कंट्री टीम में 46 अंतरराष्ट्रीय कर्मचारी और 448 स्थानीय कर्मचारी शामिल हैं.
अमेरिकी विदेश विभाग ने ईरान सरकार को संबोधित संदेश में कहा कि जब हम प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आपकी हिंसा को उजागर कर रहे हैं, तब यह मत समझिए कि हम उन राजनीतिक कैदियों को भूल गए हैं, जिन्हें इन प्रदर्शनों से पहले ही जेल में डाल दिया गया था. इनमें नर्गेस मोहम्मदी, सेपीदे गोलियन, जवाद अली-कोर्दी, पूरान नजेमी, रजा खंदान, माजिद तवाकोली, शरीफेह मोहम्मदी, होसैन रोनाघी और कई अन्य शामिल हैं. इन सभी को लगातार जेल में रखा जाना एक गंभीर चिंता का विषय है. हम इस्लामिक रिपब्लिक शासन से मांग करते हैं कि वह सभी राजनीतिक कैदियों और अंतरात्मा के कैदियों को तुरंत रिहा करे.
डेट्रॉयट से लौटने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस में ईरान को लेकर हुई एक अहम बैठक में शामिल हुए. यह बैठक उपराष्ट्रपति वेंस के नेतृत्व में ट्रंप की सीनियर टीम ने की. सूत्रों के मुताबिक, बैठक में ट्रंप को ईरान की मौजूदा स्थिति पर अपडेट दिया गया और अमेरिका की संभावित प्रतिक्रिया पर चर्चा हुई.
ईरान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेवर सख्त हैं. उनके बयानों, व्हाइट हाउस में सैन्य विकल्पों पर मंथन और रजा पहलवी के साथ सीक्रेट मीटिंग के बीच संकेत साफ है कि अमेरिका दबाव की रणनीति को अगले स्तर पर ले जा सकता है. वहीं, तेहरान ने भी आक्रामक पलटवार किया है. ऐसे में टकराव सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं रहेगा और आने वाले दिन ईरान संकट को और गहरा कर सकते हैं. पढ़ें पूरी खबर...
रजा पहलवी के साथ सीक्रेट मीटिंग, ट्रंप का वॉर प्लान, तेहरान का पलटवार... ईरान में क्या होने जा रहा?
अमेरिका स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी (एचआरएएनए) के मुताबिक, ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरू होने के बाद से कम से कम 2,403 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है. एचआरएएनए के एक प्रवक्ता ने सीएनएन को बताया कि मृतकों में 18 वर्ष से कम आयु के 12 पीड़ित भी शामिल हैं.
एचआरएएनए ने यह भी कहा कि विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से देशभर में कम से कम 18,137 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. नए आंकड़े मंगलवार को पहले बताए गए कम से कम 1,850 मौतों के पिछले अनुमान से काफी ज्यादा हैं.
ईरान में जारी प्रदर्शनों के बीच निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने सत्ता पर सीधा हमला बोला है. उन्होंने आंदोलन को तेज करते हुए अब ईरानी सेना से भी जनता के साथ खड़े होने की अपील की है. इससे पहले ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों के लिए मदद भेजने का भी ऐलान किया है.
'ट्रंप की मदद बस पहुंच रही...', रजा पहलवी का नया Video, ईरानी सेना से कहा- विद्रोह का हिस्सा बनिए
न्यूज एजेंसी reuters के मुताबिक, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सुरक्षा कैबिनेट को अब ईरान में शासन के पतन और वहां अमेरिकी हस्तक्षेप की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी जा रही है. एक अन्य इजरायली अधिकारी ने बताया कि आकलन यह है कि ट्रंप ने हस्तक्षेप करने का फैसला किया है, लेकिन प्रतिक्रिया का दायरा और वक्त अभी साफ नहीं है.
जानकारी सामने आई है कि ईरान में प्रदर्शनों के बीच व्हाइट हाउस के दूत स्टीव विटकॉफ ने यूएस में रह रहे ईरान के आखिरी शाह के निर्वासित बेटे रजा पहलवी से मुलाकात की. इनके बीच ईरान में हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर चर्चा हुई. बता दें कि पहलवी ईरान के बिखरे हुए विपक्ष की एक प्रमुख आवाज माने जा रहे हैं.
ट्रंप के पोस्ट पर ईरान का जवाब भी आया है. ईरानी सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी ने ट्रंप पर हमला किया है. उन्होंने लिखा- ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ईरानी लोगों के 'मुख्य हत्यारे' हैं.
ट्रंप के 'मदद रास्ते में है' वाले पोस्ट ने हमले की आशंका बढ़ा दी. इसपर ट्रंप से सवाल किया गया- ईरान के लिए मदद भेजी जा रही है, इससे आपका क्या मतलब है? जवाब में ट्रंप ने कहा, 'आपको यह खुद ही पता लगाना होगा। मुझे माफ़ करें.' उन्होंने रिपोर्टर्स को यह भी बताया कि हाल के प्रदर्शनों में कितने प्रदर्शनकारी मारे गए हैं, इसका सही आंकड़ा कोई भी उन्हें नहीं बता पाया है.
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ईरान के लोगों से विरोध प्रदर्शन जारी रखने की अपील की. उन्होंने लिखा, "ईरानी देशभक्तों, प्रोटेस्ट जारी रखो, अपने संस्थानों पर कब्जा करो. मदद रास्ते में है." हालांकि ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि मदद किस तरह की होगी.
ट्रंप ने यह भी कहा, 'हत्यारों और अत्याचार करने वालों के नाम संभालकर रखो. उन्हें इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी. मैंने ईरानी अधिकारियों के साथ होने वाली सभी बैठकों को रद्द कर दिया है, जब तक प्रदर्शनकारियों की बेवजह हत्याएं बंद नहीं होतीं. मदद रास्ते में है.' इसके साथ ही उन्होंने "MIGA" यानी "Make Iran Great Again" के नारे को भी दोहराया.
ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने हालात और भड़का दिए हैं. ट्रंप ने ईरानी प्रदर्शनकारियों से आंदोलन जारी रखने की अपील की और कहा कि मदद भेजी जा रही है. इसी बीच ईरानी अधिकारियों ने दो हफ्तों में करीब 2000 लोगों की मौत का दावा किया है.