मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के साथ किसी भी संभावित समझौते को लेकर अपनी स्पष्ट और कड़ी शर्तें सामने रखी हैं. एक सम्मेलन में बोलते हुए उन्होंने कहा, "मैं आपसे यह नहीं छिपाऊंगा कि मुझे ईरान के साथ किसी भी समझौते पर संदेह है, क्योंकि सच कहूं तो ईरान एक ही चीज में भरोसेमंद है, वे झूठ बोलते हैं और धोखा देते हैं."
पीएम नेतन्याहू ने कहा कि प्रस्तावित समझौते में कई अहम तत्व शामिल होने चाहिए जो न केवल इजरायल बल्कि अमेरिका और दुनिया की सुरक्षा के लिए भी जरूरी हैं. उनकी पहली शर्त थी, "सारा समृद्ध परमाणु पदार्थ ईरान से बाहर जाना चाहिए." दूसरी शर्त पर उन्होंने कहा, "समृद्धि की क्षमता ही खत्म की जानी चाहिए, केवल प्रक्रिया रोकना नहीं, बल्कि उस उपकरण और ढांचे को खत्म करना होगा जो इसे संभव बनाते हैं."
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नेतन्याहू ने तीसरी शर्त के रूप में बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा, "एमटीसीआर के तहत 300 किलोमीटर की सीमा है और ईरान को इसका पालन करना चाहिए, लेकिन वह ऐसा नहीं करता." इसके साथ ही उन्होंने क्षेत्रीय सहयोगी समूहों के समर्थन को भी समझौते का हिस्सा बनाने की बात कही.
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा, "चौथी बात यह है कि ईरान द्वारा बनाए गए आतंक के गठजोड़ को खत्म किया जाए. यह कमजोर हुआ है, लेकिन अभी भी मौजूद है और खुद को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रहा है."
नेतन्याहू ने निरीक्षण व्यवस्था को भी बेहद महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा, "अंतिम बात यह है कि वास्तविक और प्रभावी निरीक्षण होना चाहिए - ऐसा नहीं कि पहले से सूचना देकर किया जाए, बल्कि ठोस और भरोसेमंद जांच व्यवस्था हो."
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नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं और अमेरिका और अन्य शक्तियां ईरान के साथ संभावित समझौते के विकल्प तलाश रही हैं. उनके बयान से साफ संकेत मिलता है कि इजरायल सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर कोई नरमी दिखाने के पक्ष में नहीं है और वह सख्त शर्तों के साथ ही किसी समझौते को स्वीकार्य मानता है.