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'हमारे साझा हित हैं, इसलिए होर्मुज से गुजरने दिए भारतीय तेल...', बोले ईरानी राजदूत

ईरान के राजदूत Mohammad Fathali ने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच कुछ भारतीय जहाज़ों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी गई है. यह फैसला दोनों देशों के लंबे समय से चले आ रहे दोस्ताना रिश्तों और साझा हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है.

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इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में शिरकत करने पहुंचे ईरान के राजदूत Mohammad Fathali. Photo Credit- ARUN KUMAR
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में शिरकत करने पहुंचे ईरान के राजदूत Mohammad Fathali. Photo Credit- ARUN KUMAR

ईरान के भारत में राजदूत Mohammad Fathali ने शनिवार को कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच कुछ भारतीय जहाज़ों को 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से गुजरने की अनुमति दी गई है. उन्होंने कहा कि यह फैसला दोनों देशों के लंबे समय से चले आ रहे दोस्ताना रिश्तों और साझा हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2026 में ईरानी राजदूत ने माना कि शुरुआत में भारत के साथ संवाद स्थापित करने में कुछ दिक्कतें आई थीं, लेकिन अब दोनों देश एक-दूसरे का सहयोग कर रहे हैं.

'कितने जहाजों की अनुमति दी, यह नहीं बता सकते'
उन्होंने कहा, 'हां, हमने कुछ जहाज़ों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी है, लेकिन फिलहाल यह नहीं बता सकते कि कितने जहाज़ों को अनुमति दी गई है. इस मुद्दे पर आगे जानकारी दी जाएगी. ईरान और भारत के ऐतिहासिक रिश्ते हैं और दोनों के साझा हित भी हैं.' दरअसल, शुक्रवार को ईरान ने भारतीय झंडे वाले 'दो एलपीजी कैरियर जहाज़ों' को होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी थी. अमेरिका और इज़राइल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर हमले के बाद यह जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से बंद हो गया था. इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता 'आयतोल्लाह अली खामेनेई' की मौत हो गई थी.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग '20 प्रतिशत' हिस्सा गुजरता है. भारत के लिए इस मार्ग का बंद होना बड़ी समस्या बन गया है. भारत अपने कुल 'कच्चे तेल का लगभग 40 प्रतिशत', 'एलएनजी का 50 प्रतिशत से अधिक' और 'एलपीजी का करीब 90 प्रतिशत' इसी रास्ते से आयात करता है. कई जहाज़ों के इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर फंस जाने के कारण देश में एलपीजी की कमी का संकट पैदा हो गया है.

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'भारत-ईरान संबंधों को और मजबूत करने की जरूरत'
कॉन्क्लेव में Mohammad Fathali ने भारत-ईरान संबंधों को और मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा, 'अगर दोनों देशों के बीच किसी तरह की दरार पैदा होती है तो दुश्मन इसका फायदा उठाएंगे. दोनों पक्ष इतने परिपक्व हैं कि वे इन राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को संभाल सकते हैं.' ईरान से जुड़े युद्ध के मुद्दे पर भारत अब तक 'संतुलित कूटनीतिक रुख' अपनाए हुए है और अपनी पारंपरिक 'रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति का पालन कर रहा है.

हालांकि भारत ने अमेरिका और इज़राइल के ईरान पर हमले की सार्वजनिक रूप से निंदा नहीं की है, लेकिन ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत के बाद भारत के विदेश सचिव ने दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास जाकर शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए.
 

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