रूस-यूक्रेन जंग में फिर से 2 भारतीयों ने जान गंवाई है. इस तरह से रूस-यूक्रेन की लड़ाई में अबतक 4 भारतीयों की मौत हो गई है. ये भारतीय कथित तौर पर रूस की ओर से यूक्रेन के खिलाफ युद्ध लड़ रहे थे, या लड़ने के लिए मजबूर किए गए थे.
भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने रूस के साथ इस मामले को मजबूती से उठाया है और रूसी सेना में शामिल सभी भारतीय नागरिकों की जल्द रिहाई और वापसी की मांग की है.
ये ऐसे युवा है जो दलालों द्वारा बेचे जा रहे 'रशियन ड्रीम' का शिकार हो रहे हैं. ऐसे बेरोजगार युवाओं को वीजा कंपनियां और दलाल रूस की सेना में नौकरी का सपना दिखाते हैं, मोटी पगार का लालच देते हैं और इनसे पैसा लेकर उन्हें रूस ले जाते हैं. एक बार रूस की सीमा में घुसने के बाद ये युवा रूस की सेना में नौकर, हेल्पर के तौर पर काम करने को मजबूर होते हैं.
भारत ने दिखाए तल्ख तेवर
भारत ने सख्त लहजे में रूस से कहा है कि रूसी सेना द्वारा भारतीय नागरिकों की किसी भी तरह से उनके यहां आर्मी में नियुक्ति न की जाए भारत ने कहा कि ऐसी गतिविधियां हमारी साझेदारी की भावना के अनुरूप नहीं होंगी.
विदेश मंत्रालय ने कहा, "हमें यह बताते हुए खेद है कि रूसी सेना द्वारा भर्ती किए गए दो भारतीय नागरिक हाल ही में रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष में मारे गए हैं."
विदेश मंत्रालय ने बताया है कि मंत्रालय के अधिकारी और मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास ने नई दिल्ली स्थित रूसी राजदूत और मॉस्को स्थित रूसी अधिकारियों के समक्ष रूसी सेना में शामिल सभी भारतीय नागरिकों की शीघ्र रिहाई और वापसी के लिए इस मामले को जोरदार तरीके से उठाया है.
200 भारतीयों की रूसी सेना में नियुक्ति
एक रिपोर्ट के अनुसार लगभग 200 भारतीयों की नियुक्ति रूसी सेना में सिक्योरिटी हेल्पर के तौर पर की गई है. जानकारी मिली है कि रूसी सेना में सपोर्ट में स्टाफ के रूप में काम कर रहे 10 लोगों को हाल ही में रूस से छुड़ा कर भारत भेजा गया है.
'रशियन ड्रीम' में तबाह होते युवा
इसी साल मार्च महीने में जब केंद्रीय जांच ब्यूरो ने मानव तस्करी रैकेट का खुलासा किया था तो कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई थी. ये रैकेट लुभावने अवसर का लालच देकर युवाओं को रूस भेजने का काम करता था फिर रूस में इनसे यूक्रेन के खिलाफ जंग में लड़ने को कहा जाता था.
जांच एजेंसी ने तब खुलासा किया था कि यह नेटवर्क देश भर के कई राज्यों में फैला हुआ है, जो विदेशों में रोजगार के लिए मौके की तलाश देख रहे भारतीय नागरिकों को फंसाता है.
इस गैंग के काम करने का तरीका बताते हुए सीबीआई ने कहा था कि ये रैकेट नौकरी खोज रहे युवाओं को कई माध्यमों से संपर्क करता है. जैसे- वीजा कंसल्टेंसी फर्म, एजेंट, सोशल मीडिया अकाउंट. सीबीआई के अनुसार इन युवाओं को एजेंट सपने बेचते हैं और इन्हें रशियन आर्मी में मोटी पगार वाली नौकरी का झांसा देते हैं. इन्हें रशियन आर्मी की जिंदगी के बारे में झूठी कहानियां बताई जाती है और इन्हें नौकरी करने के लिए हर तरह से बरगलाया जाता है. रशियन आर्मी के अलावा इन्हें सिक्योरिटी सेक्टर और शैक्षणिक संस्थाओं में भी नौकरी का लालच दिया जाता है.
एक बार जाल में फंसने के बाद, पीड़ितों को वीजा फी, यात्रा के लिए खर्चे और अन्य प्रशासनिक खर्चों के नाम पर ज्यादा से ज्यादा रकम ऐंठा जाता है.
बता दें कि इससे पहले भी रूस में गुजरात और तेलंगाना के दो युवाओं की रूस में मौत हो चुकी है.
रूस में संघर्षों से सामना
एक बार किसी तरह रूस पहुंचने के बाद इनकी जिंदगी का संघर्ष शुरू होता है. यहां ये युवा खुद को तस्करों के रहमों करम पर पाते हैं. यहां उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए जाते हैं और उन्हें कुछ भी काम करने को मजबूर किया जाता है.
ऐसी स्थिति में ये युवा कुछ भी करने को मजबूर होते हैं. इसी फेज में इन लड़कों को सेना की छोटी-मोटी ट्रेनिंग दी जाती है. इन्हें लड़ना सिखाया जाता है, क्षेत्र की जानकारी दी जाती है. इस दौरान उन्हें यह विश्वास दिलाया जाता है कि इस ट्रेनिंग से उनके करियर के रास्ते खुलेंगे और उन्हें अच्छी खासी रकम भी मिलनी शुरू हो जाएगी.
इसके बाद इन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध यूक्रेन के खिलाफ रूसी सेना के साथ लड़ने के लिए भेज दिया जाता है. ऐसे मौकों पर इन्हें ज्यादातर हेल्पर का काम दिया जाता है.
युद्ध के मोर्चे पर तैनात ऐसे युवा कई बार वॉर जोन में यूक्रेनी सेना की गोलियों का शिकार होते हैं.
कई राज्यों में फैला है नेटवर्क
मार्च में इस गैंग का भंडाफोड़ करते हुए सीबीआई ने कहा था कि ये तस्कर एक संगठित नेटवर्क के रूप में काम कर रहे थे और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया चैनलों और अपने स्थानीय संपर्कों/एजेंटों के माध्यम से भारतीय नागरिकों को रूस में उच्च वेतन वाली नौकरियों का लालच दे रहे थे. सीबीआई के अनुसार इस रोल में कई युवा जख्मी हो गए थे.
इससे पहले, मॉस्को में रहने वाले उत्तर प्रदेश के एक व्यक्ति ने एक न्यूज एजेंसी को बताया था कि उसे एक यूट्यूब चैनल के माध्यम से रूस आने का लालच दिया गया था, जिसमें उसे 150,000 रुपये मासिक वेतन का वादा किया गया था.
सीबीआई ने इस मामले में 6 मार्च को मानव तस्करी का मामला दर्ज किया था.इसमें निजी वीजा कंसल्टेंसी फर्मों और एजेंटों पर बेहतर रोजगार और उच्च वेतन वाली नौकरियों की आड़ में भारतीयों को रूस भेजने का आरोप लगाया गया था. सीबीआई ने यह भी खुलासा किया था कि ऐसे एजेंट कई राज्यों में फैले हुए हैं. इसके बाद सीबीआई ने दिल्ली, त्रिवेंद्रम, मुंबई, अंबाला, चंडीगढ़, मदुरै और चेन्नई में करीब 13 स्थानों पर तलाशी ली गई, जिसके बाद 50 लाख रुपये से अधिक की नकदी, कुछ आपत्तिजनक दस्तावेज और लैपटॉप, मोबाइल, डेस्कटॉप, सीसीटीवी फुटेज आदि जैसे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड जब्त किए गए थे.
सीबीआई ने युवाओं से अपील की है कि विदेश जाते समय दस्तावेजों, कंपनियों और जॉब कॉन्ट्रैक्ट की पूरी तरह से जांच करके ही आगे कदम बढ़ाएं.