सिंगापुर की एक अदालत ने भारतीय मूल के 25 साल के प्रकाश परमासिवम को 9 महीने की जेल की सजा सुनाई है. प्रकाश ने खुद को जेल अधिकारी बताकर राष्ट्रपति थर्मन शनमुगरत्नम और सिंगापुर संसद के सचिवालय को ईमेल भेजे थे. अभियोजन पक्ष के अनुसार, उसने ये ईमेल अपनी पिछली सजा से संबंधित मामलों में मदद पाने के लिए भेजे थे, जिसमें वह दावा करता था कि उसे गलत तरीके से दोषी ठहराया गया था. हालांकि अदालत में सुनवाई के दौरान उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया.
अभियोजकों ने बताया कि 2018 से 2023 के बीच प्रकाश कई बार जेल जा चुका है और उस पर आपराधिक धमकी देने जैसे गंभीर आरोप भी लग चुके हैं.
इसके अलावा, एक अलग मामले में उसने खुद को जेल अधिकारी बताकर तत्कालीन राष्ट्रीय विकास मंत्री और मौजूदा शिक्षा मंत्री देशमंड ली को भी ईमेल पर संपर्क किया था. इस ईमेल में वह अपने पारिवारिक मामलों में मदद की गुहार लगा रहा था.
प्रकाश पर फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनाने का आरोप भी है. पुलिस ने जब संबंधित डॉक्टर से संपर्क किया तो डॉक्टर ने साफ तौर पर कहा कि उसने ऐसा कोई प्रमाणपत्र जारी नहीं किया था. इसी के चलते मामला सामने आया और जांच शुरू हुई.
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प्रकाश को 8 जुलाई 2025 को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह हिरासत में है. सरकारी वकील ने अदालत से कड़ी सजा देने की मांग की थी. उनका कहना था कि आरोपी आदतन झूठे और भ्रामक संदेश भेजता रहा है, इसलिए उसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए. अदालत ने मामले के गंभीरता को देखते हुए उसे नौ महीने की जेल की सजा सुनाई है.
यह मामला सिंगापुर में कानून की सख्ती और ईमानदारी की मिसाल बन गया है, जहां किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या गलत सूचना को बर्दाश्त नहीं किया जाता.