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क्या ईरान को थी US-इजरायल अटैक की जानकारी? ईरानी राजदूत ने खोला राज

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2026 के दूसरे दिन ईरान के राजदूत Dr Mohammad Fathali ने कहा कि ईरान युद्ध के लिए तैयार था लेकिन उसकी प्राथमिकता हमेशा कूटनीतिक समाधान रही है.

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इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में ईरान के राजदूत ने जंग से जुड़े सवालों के जवाब दिए
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में ईरान के राजदूत ने जंग से जुड़े सवालों के जवाब दिए

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2026 के दूसरे दिन इस मंच पर देश-विदेश की राजनीतिक हस्तियों और राजनयिकों ने शिरकत की. जिस वक्त दुनिया जंग के दौर से गुजर रही है ऐसे समय में इस मुद्दे से जुड़े सवाल भी मंच का हिस्सा बने. कॉन्क्लेव के एक सेशन 'Operation True Promise' में  भारत में ईरान के राजदूत Dr Mohammad Fathali ने हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने कहा कि तेहरान ने कई बार सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी थी कि ईरान बातचीत के लिए भी तैयार है और युद्ध के लिए भी, लेकिन उसकी प्राथमिकता हमेशा कूटनीतिक समाधान रही है. 

बातचीत के सिलसिले में सवाल उठा कि कि क्या ईरान इस हमले के लिए तैयार था? क्या ईरान को पता था कि ऐसा हमला होने वाला है? 

Dr Mohammad Fathali ने कहा कि, 'हम युद्ध के लिए तैयार थे. लेकिन याद रखिए, आप युद्ध शुरू कर सकते हैं, पर उसे खत्म करना आपके हाथ में नहीं होगा. हमारे नेता अपना घर छोड़कर कहीं नहीं गए. उनका मानना था कि अगर आप 9 करोड़ लोगों के लिए शरणस्थल तैयार करते हैं, तो उसके बाद ही आप खुद किसी शरण में जाएं.

उन्होंने कहा कि, तेहरान ने कई बार सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी थी कि ईरान बातचीत के लिए भी तैयार है और युद्ध के लिए भी, लेकिन उसकी प्राथमिकता हमेशा कूटनीतिक समाधान रही है. उन्होंने कहा कि ईरान ने वार्ता की मेज पर लौटकर यह दिखाने की कोशिश की कि वह किसी भी तरह का बहाना या टकराव का आधार खत्म करना चाहता है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ईरान युद्ध से डरने वाला देश नहीं है. उनका कहना था कि कोई भी पक्ष युद्ध शुरू कर सकता है, लेकिन उसे खत्म करना उसके हाथ में नहीं होगा.

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'सुप्रीम लीडर को लेकर फैलाई गईं अफवाहें'
सुप्रीम लीडर के हमले के समय घर में मौजूद होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनके बारे में कई तरह की अफवाहें फैलाई गईं कि वे किसी सुरक्षित जगह या दूसरे देश में चले गए थे, लेकिन यह सभी खबरें गलत साबित हुईं. उन्होंने कहा कि ईरान के नेता सादा जीवन जीते थे और उनका मानना था कि जब तक आम लोगों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित न हो, तब तक नेता को खुद सुरक्षित स्थान पर जाने का कोई अधिकार नहीं है.

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