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मैग्सेसे विजेताओं की घोषणा, भारत के वाटवाणी और वांगचुक भी शामिल

साल 2018 के एशिया का नोबेल कहे जाने वाले रेमन मैग्सेसे पुरस्कार की सूची में दो भारतीयों के नाम शामिल हैं. डॉ भरत वाटवाणी और सोनम वांगचुक को अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने के लिए सम्मानित किया जा रहा है. 

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भरत वाटवाणी और सोनम वांगचुक (फोटो: ट्विटर)
भरत वाटवाणी और सोनम वांगचुक (फोटो: ट्विटर)

एशिया का नोबेल कहे जाने वाले साल 2018 के रेमन मैग्सेसे पुरस्कार की सूची में दो भारतीयों के नाम शामिल हैं. डॉ भरत वाटवाणी और सोनम वांगचुक को अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने के लिए सम्मानित किया जा रहा है.

डॉ भरत वाटवाणी को मानसिक रूप से पीड़ित गरीबों के इलाज के लिए महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए सम्मानित किया जा रहा है. वहीं सोनम वांगचुक को प्रकृति, शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए पुरस्कृत किया जा रहा है.

डॉ भरत वाटवाणी

डॉ भरत वाटवाणी और उनकी पत्नी ने मानसिक रूप से बीमार गरीब निराश्रितों को अपने निजी क्लीनिक मे उपचार मुहैया कराने का अभियान शुरू किया था. इसी उद्देश्य से इन्होने 1988 में श्रद्धा पुनर्वास फाउंडेशन का गठन किया. यह संस्था का मुख्य कार्य ज्यादा से ज्यादा मानसिक तौर पर बीमार, सड़क की पटरी पर रह रहे लोगों को मुफ्त छत, भोजन और मनोवैज्ञानिक चिकत्सा प्रदान करने के साथ इन्हें इनके परिवार से दोबारा जोड़ना है. इसी के साथ वाटवाणी की संस्था गांवों, कस्बों, पुलिसकर्मियों, रेलवे अधिकारियों और आम जनता के बीच मानसिक स्वास्थ्य के लिए जागरुकता अभियान भी चलाती है.

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सोनम वांगचुक

1988 में अपनी इंजीनियरिंग डिग्री हासिल हासिल की। वे लद्दाख में छात्रों के एक समूह द्वारा 1988 में स्थापित स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (एसईसीओएमएल) के संस्थापक-निदेशक भी हैं. वांगचुक एक लद्दाखी अभियंता, सुधारक और अविष्कारक है. सोनम वांगचुक की पहचान उत्तर भारत के दूरदराज के क्षेत्रों में शिक्षा की विशिष्ट व्यवस्था , सहयोगी और समुदाय संचालित सुधार के तौर पर रही है. वांगचुक के प्रयासों की वजह से लद्दाखी युवाओं के जीवन और उन्हे भविष्य में मिलने वाले अवसरों परिवर्तन संभव हो पाया है. उनका यह कार्य दुनिया में अल्पसंख्यक लोगों के लिए एक उदाहरण बना. बता दें कि फिल्म 3 इडियट्स मे आमिर खान के फुनशुक वांगड़ू का किरदार वांगचुक पर ही आधारित है.

इन दो भारतीयों के साथ मैग्सेसे पुरस्कार जीतने वाले  चार अन्य विजेताओं में कंबोडिया के युक चांग , पूर्वी तिमोर की मारिया डी लोर्ड्स मार्टिंस क्रूज, फिलिपिंस के होवर्ड डी और वियतनाम की वी टी होआंग येन रोम शामिल हैं. 

रेमन मैग्सेसे अवार्ड फाउंडेशन अध्यक्ष कारमेनसिता एबेला ने कहा कि विजेता स्पष्ट रूप से एशिया की उम्मीद के नायक हैं जिन्होंने अपने प्रयासों से समाज को आगे बढ़ाया है. 

रेमन मैग्सेसे  पुरस्कार एशिया का सबसे बड़ा पुरस्कार है. इसकी स्थापना 1957 में फिलिपीन के तीसरे राष्ट्रपति की स्मृति में की गई थी और इस पुरस्कार का नाम उनके नाम पर रखा गया है. यह पुरस्कार औपचारिक रूप से 31 अगस्त 2018 को फिलिपीन के सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रदान किया जाएगा.

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