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तुर्की ने सड़ा बता लौटाया, अब वही गेहूं भारत से हाथों हाथ ले रहा ये देश

तुर्की ने रुबेला वायरस का हवाला देकर भारत का गेहूं लौटा दिया था. भारत ने 13 मई को गेहूं के निर्यात पर बैन लगा दिया था. तुर्की को गेहूं भेजे जाने को इससे पहले ही मंजूरी मिल गई थी.

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तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन (photo: reuters) तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन (photo: reuters)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • तुर्की ने गेहूं में रुबेला वायरस बताकर खेप लौटा दी थी
  • भारत ने 13 मई को गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था

तुर्की ने भारत का जो गेहूं खराब बताकर लौटा दिया था, अब गेहूं की उस खेप को मिस्र भेज दिया गया है. रूस और यूक्रेन युद्ध की वजह से मिस्र ब्रेड की कमी से जूझ रहा है. 

गेहूं के सबसे बड़े आयातकों में से एक मिस्र, भारत सहित अन्य देशों से कम कीमत पर गेहूं खरीदना चाहता है.

सूत्रों ने अंग्रेजी अखबार 'लाइव मिन्ट' को बताया, तुर्की ने जिस गेहूं को गुणवत्ता खराब बताकर लेने से इनकार कर दिया था, उसे मिस्र भेज दिया गया है.

भारत ने 13 मई को गेहूं के निर्यात पर बैन लगा दिया था. इससे पहले ही भारत ने तुर्की के लिए गेहूं की 56,000 टन की खेप को मंजूरी दे दी थी.

खाद्य सचिव सुधांशु पांडेय ने गुरुवार को कहा कि गेहूं की खेप को भारत से रवाना करने से पहले क्वारंटीन और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं को पूरा किया गया था.

उन्होंने कहा कि गेहूं की खेप लेने से इनकार करने पर अभी तुर्की के अधिकारियों से बात नहीं हो पाई है.

पांडेय ने कहा, गेहूं की यह खेप भारतीय कंपनी आईटीसी लिमिटेड की थी. मुझे बताया गया कि इस सौदे को लेकर वित्तीय लेनदेन पूरा हो गया था. भारतीय कंपनी ने यह गेहूं एक विदेशी कंपनी को बेचा था, जहां से यह गेहूं तुर्की की कंपनी के पास पहुंचा.

तुर्की ने भारत के गेहूं में रुबेला वायरस की शिकायत की थी

एसएंडपी ग्लोबल कमोडिटी इनसाइट्स की रिपोर्ट में बताया गया था कि भारत के गेहूं मे रुबेला वायरस पाए जाने की वजह से इसे लौटा दिया गया था.

आईटीसी के प्रवक्ता ने कहा, आईटीसी ने नीदरलैंड्स की एक कंपनी को यह गेहूं बेचा था. गेहूं की जांच और सभी तरह की मंजूरियों के बाद ही इस खेप को भेजा गया था.

इस बारे में पूछे जाने पर तुर्की और मिस्र के दूतावासों ने कोई जवाब नहीं दिया है.

सरकारी अधिकारियों ने गुरुवार को कहा था कि पांच देशों ने गेहूं निर्यात पर बैन के बाद आधिकारिक रूप से भारत से गेहूं मांगा है.

सरकार का कहना है कि अब से निजी कंपनियों को नहीं बल्कि सरकारों को ही गेहूं बेचा जाएगा.

भारत में टेस्टिंग लैब सही से काम नहीं करते

इस घटनाक्रम से वाकिफ निर्यातकों का कहना है कि गेहूं की खेप लगभग दो हफ्ते में तुर्की पहुंची थी. हो सकता है कि इस दौरान तापमान में बदलाव और नमी से गेहूं खराब हो गया हो.

हालांकि, एक्सपर्ट का कहना है कि गेहूं में वायरस होने की संभावना नहीं हो सकती. 

उन्होंने कहा, रुबेला वायरस बीज या मिट्टी में संक्रमण की वजह से होता है. जहाज में गेहूं लादे जाने से पहले इसका पता लगाया जा सकता था. यह लापरवाही का मामला हो सकता है.

एक्सपर्ट्स ने भारत के गेहूं में वायरस की लगातार मिल शिकायतों को लेकर चिंता जताई है. इस साल की शुरुआत में इंडोनेशिया ने क्वालिटी का हवाला देकर भारत के कृषि उत्पादों को ठुकरा दिया था. 

एक्सपर्ट का कहना है कि इस तरह की घटनाओं का देश की प्रतिष्ठा पर बुरा असर पड़ता है. मंत्रालय को इस तरह के मामलों से निपटना चाहिए. इस तरह के मामले इसलिए पकड़ में नहीं आ पाते क्योंकि भारत में टेस्टिंग लैब सही तरीके से काम नहीं करते. 

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