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रातोरात हुआ मालामाल! 2 लाख की खरीदी चीज, 72 करोड़ में बेची

एक चाइनीज फूलदान को खरीदने में 300-400 लोगों ने दिलचस्पी दिखाई. खुद इसके मालिक को भी यकीन नहीं हुआ कि मामूली से फूलदान के लिए कोई इतनी बड़ी रकम कैसे दे सकता है. नीले और सफेद रंग के Tianqiuping फूलदान की कीमत नीलामी में वास्तविक दाम से कई हजार गुना ज्यादा लग गई.

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एक चाइनीज फूलदान की बिक्री 72 करोड़ में हुई (सांकेतिक फोटो- गेटी)
एक चाइनीज फूलदान की बिक्री 72 करोड़ में हुई (सांकेतिक फोटो- गेटी)

एक चाइनीज फूलदान (Flower Vase) जिसकी असल कीमत करीब डेढ़ लाख रुपये थी, वह 72 करोड़ रुपये में बिक गया. इस फूलदान की नीलामी बेहद दिलचस्प तरीके से हुई. इसे खरीदने में 300-400 लोगों ने दिलचस्पी दिखाई.

फूलदान के मालिक को भी यकीन नहीं हुआ कि मामूली से फूलदान के लिए कोई इतनी बड़ी रकम कैसे दे सकता है. 

बीते शनिवार को पेरिस के Fontainebleau में ओसेनट ऑक्शन हाउस (Osenat Auction House) ने इस चाइनीज फूलदान की नीलामी की. शुरू में इसकी कीमत डेढ़ से दो लाख रुपये की मानी जा रही थी, लेकिन नीलामी में यह एंटीक फूलदान 72 करोड़ रुपये में बिक गया. 

नीले और सफेद रंग के Tianqiuping फूलदान की कीमत नीलामी में वास्तविक दाम से कई हजार गुना ज्यादा लग गई. फूलदान का धड़ गोलाकार है और गर्दन बेलनाकार. ये किसी सुराही जैसा है. इस पर बादल और ड्रैगन की कलाकृति बनी है. 

ऑक्शन हाउस के चीफ पियरे ने कहा कि इस नीलामी से उनका जीवन बदल जाएगा. उन्होंने बताया कि फूलदान के मालिक विदेश में रहते हैं. वह अपनी दिवंगत दादी के घर से कई चीजों को लाए थे, जिनमें यह फूलदान भी था.

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मालिक ने इन्हें बेचने को कहा था. जिसके बाद हमने ऑक्शन के लिए इन्हें रखने का फैसला लिया. 

करीब 30 साल से यह फूलदान उनके पास था 

पियरे ने CNN से कहा कि फूलदान के मालिक की दादी कला की शौकीन थीं. करीब 30 साल से उनके पास यह फूलदान था. लगभग 300-400 लोगों ने इस फूलदान की बोली लगाने में दिलचस्पी दिखाई.

हालांकि, सिर्फ 30 लोगों को ही इस नीलामी में शामिल होने का मौका दिया गया. एक-एक कर सबने बोली लगाई और अंत में फूलदान की कीमत 72 करोड़ रुपये पहुंच गई जो कि इसकी असल कीमत से बहुत ज्यादा थी. 

Chinese Vase

ऑक्शन हाउस ने बताया है कि ये फूलदान 20वीं शताब्दी का है. यह 18वीं शताब्दी के एक फूलदान का उत्कृष्ट उदाहरण है. हालांकि, यह उतना भी दुर्लभ नहीं है. 

इसे खरीदने वाला शख्स भी चीन का ही रहने वाला बताया जा रहा है. ऑक्शन हाउस के मुताबिक, हाल के वर्षों में चीनी खरीदारों ने ऐतिहासिक कलाकृतियों को खरीदने में रुचि दिखाई है. क्योंकि उनका मानना ​​​​है कि अतीत में उनके देश से ये कलाकृतियां चोरी हो गई थीं.

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