scorecardresearch
 

डोकलाम से पीछे हटने के पीछे ड्रैगन की यह है सबसे बड़ी रणनीति

अमेरिका के वर्चस्व वाले विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष को टक्कर देने के लिए चीन के नेतृत्व में यह संगठन बनाया गया था. दिलचस्प बात यह है कि इस समिट में मिस्र, केन्या, ताजिकिस्तान, मैक्सिको और थाईलैंड को अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया है.

Advertisement
X
पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग
पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग

डोकलाम मसले को लेकर लगातार भारत को धमकी देने वाला ड्रैगन आखिरकार इतनी आसानी से पीछे क्यों हट गया? इस सवाल को लेकर विदेश मामलों के जानकार भी उलझे हुए हैं. हालांकि दोनों देशों की मीडिया इसको अपने-अपने देश की कूटनीतिक जीत बता रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि चीन ने खास रणनीति के तहत डोकलाम विवाद को टाला है. दरअसल, तीन सितंबर से चीन के फुजिआन प्रांत के शिआमेन में ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और साउथ अफ्रीका) समिट शुरू होने जा रहा है. इसमें हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद चीन जा रहे हैं.

अमेरिका के वर्चस्व वाले विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष को टक्कर देने के लिए बनाए गए इस संगठन में का प्रभुत्व है. इस बार चीन इसकी मेजबानी कर रहा है. दिलचस्प बात यह है कि उसने इस समिट में मिस्र, केन्या, ताजिकिस्तान, मैक्सिको और थाईलैंड को अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया है. समिट से ठीक पहले चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि त के बीच व्यापक सहयोग है. चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स का कहना है कि भारत और चीन सही रास्ते पर हैं. अचानक चीनी अखबार की बदली भाषा वाकई हैरान करने वाली है.

Advertisement

युआन को ब्रिक्स की मुद्रा बनाना चाहता है चीन

ब्रिक्स को लेकर चीन का कहना है कि इससे पश्चिमी देशों पर निर्भरता कम होगी और सदस्य देशों के बीच आर्थिक और सामाजिक सहयोग बढ़ेगा. अब चीन का सबसे बड़ा मकसद युआन (चीनी करेंसी) को ब्रिक्स की आधिकारिक मुद्रा घोषित कराना है. ऐसे में उनको आशंका है कि भारत उसकी इस योजना में खलल पैदा कर सकता है. इसकी वजह यह है कि अगर युआन को ब्रिक्स की आधिकारिक मुद्रा घोषित कर दिया गया, तो सभी सदस्य देशों की उस पर निर्भरता बढ़ जाएगी. इसका सीधा फायदा को होगा. लिहाजा वह इस समिट से पहले हरहाल में भारत से तनाव को टालना चाह रहा था.

अमेरिका से भारत की करीबी से भी चिंतित ड्रैगन

चीन वन बेल्ट वन रोड परियजोना में भारत के बहिष्कार का खामियाजा भुगत चुका है. ऐसे में ड्रैगन इस समिट को लेकर बेहद सतर्कता बरत रहा है. चीन को पता है कि हाल के दिनों में भारत और अमेरिका के बीच करीबी बढ़ी है. वहीं, चीन और अमेरिका के बीच तनाव गहराया है. अमेरिका ने कई चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध भी लगा दिया है. ऐसे में चीन के पास डोकलाम विवाद को टालने के सिवाय कोई विकल्प नहीं था.

Advertisement

डोकलाम से हटने के सिवाय नहीं था विकल्प

ब्रिक्स समिट के जरिए चीन भारत को वन बेल्ट वन रोड परियोजना में शामिल कराने की फिर से कोशिश कर सकता है. डोकलाम और लद्दाख में घुसपैठ करने के बाद अचानक तनाव को खत्म करने के पीछे चीन की लंबी योजना है. सीमा विवाद को लेकर जिस तरह से ड्रैगन अपने अखबारों के जरिए भारत को लगातार युद्ध की धमकी दे रहा था, लेकिन जब भारत पीछे हटने को तैयार नहीं हुआ, तो ब्रिक्स समिट से पहले इस विवाद को टालने का उसके पास आखिरी विकल्प यही था कि वह अपनी सेना को पीछे हटाए, ताकि इस समिट में किसी तरह का खलल न पड़े.

 

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement