कैप्टन सुनीता विलियम्स ने 27 साल के शानदार करियर के बाद अंतरिक्ष यात्री के रूप में रिटायरमेंट ले लिया है. रिटायरमेंट के बाद उन्होंने इंडिया टुडे/आजतक को दिए खास इंटरव्यू में बोइंग स्टारलाइनर की तकनीकी खराबी के कारण अंतरिक्ष स्टेशन पर बिताए 9 महीनों के दौरान अपने संघर्ष, अकेलेपन और परिवार की मानसिक स्थिति पर खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि लंबे वक्त तक बिना गुरुत्वाकर्षण के रहने से उन्हें धरती पर लौटने के बाद फिर से चलना सीखना पड़ा. उन्होंने इंटरव्यू में खुलासा किया कि उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला की मौत के बाद उनके परिवार के साथ काफी समय बिताया और उन्होंने अपने टैटू के पीछे की भी कहानी भी साझा की.
कैप्टन सुनीता विलियम्स ने इंडिया टुडे/आजतक को दिए इंटरव्यू अंतरिक्ष में 9 महीने फंसे रहने के भावनात्मक दर्द को साझा किया है. उन्होंने कहा कि वह वहां शारीरिक सुरक्षा के बावजूद घर वापसी की अनिश्चितता सबसे कठिन हिस्सा था. लंबे वक्त तक बिना गुरुत्वाकर्षण के रहने के कारण वे बैठना और लेटना भूल गई थीं और धरती पर लौटने के बाद उन्हें फिर से चलना सीखना पड़ा.
क्या है टैटू के पीछे की कहानी
नासा की उपलब्धियों से इतर सुनीता खुद को एक नौसेना हेलीकॉप्टर पायलट और पशु प्रेमी मानती हैं. उन्होंने अपने शरीर पर बने टैटू के पीछे की कहानी का खुलासा करते हुए कहा कि ये टैटू उनके दिवंगत जैक रसेल टेरियर डॉग की याद में बनवाया है जो रूस में ट्रेनिंग के दौरान भी उनके साथ थी.
विलियम्स का मानना है कि जानवर सच्चे और पवित्र होते हैं. उन्होंने ये भी कहा कि इंसानों को उनसे बहुत कुछ सीखना चाहिए. वह अब भी खुद को अपनी मां की वही 'सुनी' मानती हैं जो एक समय प्रतिस्पर्धी तैराक रही थीं.
कल्पना चावला की मां के साथ बिताया वक्त
इंटरव्यू के दौरान सुनीता ने भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला के साथ अपने गहरे जुड़ाव का जिक्र किया. उन्होंने खुलासा किया कि साल 2003 के कोलंबिया हादसे के बाद वह तीन महीने तक कल्पना के परिवार के साथ रुकी थीं.
उन्होंने कल्पना की मां को अद्भुत बताया और कहा कि परिवार के साथ यादें साझा करना एक सुकून भरा अनुभव था. सुनीता ने सुनिश्चित किया कि परिवार को पता चले कि नासा कल्पना की विरासत को हमेशा आगे बढ़ाएगा.
अंधेरे में लगता था डर
वहीं, उन्होंने स्पेस लाइफ के अनुभवों के बारे में बात करते हुए स्पेस में अपने बिखरे हुए बालों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणी का जवाब देते हुए सुनीता ने हंसी में इसे टाल दिया.
उन्होंने समझाया कि स्टेशन के बंद वातावरण में रसायनों से बचने के लिए उन्होंने बालों में डाई या रबर बैंड का इस्तेमाल नहीं किया.
दिलचस्प बात ये है कि इतनी बहादुर होने के बावजूद सुनीता ने स्वीकार किया कि उन्हें बचपन से ही अंधेरे में असहजता महसूस होती है. रिटायरमेंट के बाद वे अपनी इस शानदार विरासत को अगली पीढ़ी को सौंपने के लिए तैयार हैं.