अफगान शांति वार्ताकारों से बातचीत के दौरान पाकिस्तानी अधिकारी कई अफगान तालिबान बंदियों को रिहा करने पर सहमत हो गए ताकि काबुल की सुलह सहमति की संकटग्रस्त प्रक्रिया आगे बढ़ सके.
डॉन अखबार के मुताबिक यह सहमति, शांति प्रक्रिया को पुन: जीवित करने के लिए अफगान हाई पीस काउंसिल के अध्यक्ष सलाहुद्दीन रब्बानी की इस्लामाबाद की तीन दिवसीय यात्रा के दूसरे दिन बनी. शांति प्रक्रिया एक साल से अधिक समय से रुकी हुई है. बहरहाल, रिहा किए जाने वालों में मुल्ला बरादर नहीं होगा जो दूसरा शीर्ष अफगान तालिबान कमांडर है. खबर में इस कदम को अफगान सुलह सहमति की प्रक्रिया के लिए 'समर्थन का अप्रत्याशित संकेत' बताया गया है.
इसमें आगे कहा गया है कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि क्या कैदी रिहा किए जा चुके हैं या रब्बानी की यात्रा समाप्त होने पर रिहा किए जाएंगे. पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने बरादर को कराची में 2010 में पकड़ा था. कई खबरों में कहा गया है कि बरादर को इसलिए पकड़ा गया क्योंकि उसने पाकिस्तान की प्रभावशाली सेना और खुफिया ढांचे को सूचित किए बिना शांति वार्ता शुरू कर दी थी. रब्बानी की टीम और पाकिस्तानी अधिकारियों के बीच बातचीत आज जारी रहेगी. समझा जाता है कि दोनों पक्ष अब तक हुई प्रगति को लेकर एक संयुक्त बयान देंगे.
अफगानिस्तान लंबे समय से मांग करता रहा है कि पाकिस्तान की जेलों में बंद अफगान तालिबान नेताओं को रिहा किया जाए ताकि सुलह सहमति की प्रक्रिया को बल मिल सके. समझा जाता है कि अफगान तालिबान नेताओं की रिहाई से सुलह सहमति के लिए अनुकूल माहौल बनाने में मदद मिलेगी. राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार सहित पाकिस्तानी नेता बार बार कहते रहे हैं कि इस्लामाबाद अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता चाहता है और वह 'अफगान नीत' शांति प्रक्रिया का समर्थन करेगा.