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इतिहास में सबसे महंगा होगा 2020 का अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव, खर्च होंगे 14 बिलियन डॉलर

द सेंटर फॉर रेस्पॉन्सिव पॉलिटिक्स ने कहा, आखिरी महीनों में डोनेशन की 'अप्रत्याशित बाढ़' सी आ गई है, जिससे चुनाव में खर्च पिछले अनुमान 11 बिलियन डॉलर को पार कर गया है. सेंटर ने कहा कि सभी रिकॉर्ड्स को ध्वस्त करते हुए 2020 के राष्ट्रपति चुनाव की कुल लागत 14 बिलियन डॉलर होगी.

मुकाबला जो बिडेन और डोनाल्ड ट्रंप के बीच है मुकाबला जो बिडेन और डोनाल्ड ट्रंप के बीच है
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सबसे महंगा होगा 2020 का अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव
  • ज्यादा डोनेशन मिलने से डेमोक्रेट्स के हौसले बुलंद

2020 का अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव इतिहास में सबसे महंगा साबित होने जा रहा है. यह पिछले राष्ट्रपति चुनाव की तुलना में दो गुना ज्यादा महंगा है. एक रिसर्च ग्रुप के अनुमान के मुताबिक इस चुनाव की कुल लागत 14 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक जा सकती है.

द सेंटर फॉर रेस्पॉन्सिव पॉलिटिक्स ने कहा, आखिरी महीनों में डोनेशन की 'अप्रत्याशित बाढ़' सी आ गई है, जिससे चुनाव में खर्च पिछले अनुमान 11 बिलियन डॉलर को पार कर गया है. सेंटर ने कहा कि सभी रिकॉर्ड्स को ध्वस्त करते हुए 2020 के राष्ट्रपति चुनाव की कुल लागत 14 बिलियन डॉलर होगी. डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बिडेन इतिहास में पहले ऐसे प्रत्याशी होंगे, जो डोनर्स से 1 बिलियन डॉलर की राशि हासिल करेंगे. उनके कैंपेन को 14 अक्टूबर तक रिकॉर्ड तोड़ 938 मिलियन डॉलर मिल चुके हैं, जिससे डेमोक्रेट्स के हौसले और बुलंद हो गए हैं. वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब तक 596 मिलियन डॉलर जुटा लिए हैं. 

द सेंटर फॉर रेस्पॉन्सिव पॉलिटिक्स ने एक बयान में कहा, महामारी के बीच हर कोई 2020 में ज्यादा डोनेशन दे रहा है. जहां आम आदमी छोटी रकम दे रहे हैं, वहीं अरबपति खुलकर पैसे दे रहे हैं. सारे रिकॉर्ड्स तोड़ते हुए महिलाएं ज्यादा डोनेशन्स दे रही हैं और अमेरिकी ऐसे उम्मीदवारों को डोनेशन दे रहे हैं जो उनके राज्य में चुनाव नहीं लड़ रहे हैं. 

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2016 के मुकाबले, 2020 का चुनाव दोगुने से ज्यादा महंगा होगा. पिछले दो अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों से ज्यादा खर्च इस बार के चुनाव में होगा. सेंटर फॉर रिस्पॉन्सिव पॉलिटिक्स, एक स्वतंत्र और गैर-लाभकारी अनुसंधान समूह है, जो अमेरिकी राजनीति में पैसे, चुनाव और सार्वजनिक नीति पर इसके प्रभाव पर निगरानी रखता है.

सेंटर फॉर रेस्पॉन्सिव पॉलिटिक्स की एग्जीक्युटिव डायरेक्टर शीला क्रूम्होल्ज ने कहा, 'साल 2018 के मध्यावधि में डोनर्स ने काफी रकम डाली थी और 2020 में यह उसी ट्रेंड की निरंतरता मालूम होती है.' उन्होंने कहा, "10 साल पहले बिलियन डॉलर का अमेरिकी प्रत्याशी की बात सोचना भी मुश्किल बात थी. लेकिन इस अवधि में हमें ऐसे दो देखने को मिलेंगे.''

रिसर्च ग्रुप के मुताबिक, अमीर राष्ट्रीय समूहों के खर्चों के कारण भी चुनाव की लागत बढ़ रही है. अकेले अक्टूबर के महीने में ही सुपर पीएसी और बड़े अमीर समूहों का बाहरी खर्च 1.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर था. सेंटर के मुताबिक डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने 5.5 बिलियन डॉलर खर्च किए हैं, जबकि रिपब्लिकन्स ने 3.8 बिलियन डॉलर. 

 

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