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विश्व

अमेरिका ने किया दो हाइपरसोनिक मिसाइलों का सफल परीक्षण, Russia-China के लिए खतरा!

US Hypersonic Missile Test
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रूस (Russia) और चीन (China) हाइपरसोनिक मिसाइलों के मामले में अमेरिका से कई कदम आगे चल रहे हैं. जिसकी वजह से चिंतित अमेरिका ने बुधवार यानी 13 जुलाई 2022 को दो हाइपरसोनिक मिसाइलों (Hypersonic Missiles) का सफल परीक्षण कर डाला. अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन (Pentagon) ने कहा कि इन दोनों मिसाइलों को लॉकहीड मार्टिन कॉर्प (Lockheed Martin Corp.) ने बनाया है. (फोटोः ट्विटर/defence.gov)

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अमेरिकी एयरफोर्स (US Air Force) ने पुष्ट किया है कि उन्होंने एयर लॉन्च्ड रैपिड रेस्पॉन्स वेपन (Air-Launched Rapid Response Weapon - ARRW) का सफल परीक्षण किया है. इनका परीक्षण कैलिफोर्निया के तट के पास किया गया है. इन मिसाइलों को अमेरिकी एयरफोर्स के बमवर्षक बी-52एच स्ट्रैटोफोर्टेस (B-52H Stratofortress) के विंग्स के नीचे लगाया गया था. इन मिसाइलों के साथ इनके बूस्टर भी लगे थे. (फोटोः लॉकहीड मार्टिन)

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इससे पहले किए गए परीक्षण में मिसाइल विमान से अलग नहीं हो पाए थे. लॉकहीड मार्टिन ने एक बयान में कहा है कि हमनें ARRW का सफल परीक्षण कर लिया है. मिसाइलों ने हाइपरसोनिक गति हासिल कर ली थी. सभी मानकों पर मिसाइल शानदार निकली है. इसके बाद और भी परीक्षण किए जाएंगे ताकि ज्यादा से ज्यादा डेटा कलेक्ट किया जा सके. मिसाइल के नेविगेशन, मारक क्षमता, ताकत आदि के और भी टेस्ट होंगे. (फोटोः ट्विटर/Defence.gov)

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एयर फोर्स ब्रिगेडियर जनरल हीथ कोलिंस ने कहा कि हमने अपने बूस्टर टेस्ट सीरीज को पूरा कर लिया है. अब इस साल के अंत तक कई अन्य टेस्ट होने हैं. जिसमें हथियार लगाकर भी टेस्ट किए जाएंगे. यह मिसाइल 6200 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलती है. यानी आवाज की गति से पांच गुना ज्यादा गति. इसके अलावा डिफेंस एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी (DARPA) ने भी हाइपरसोनिक हथियार का पहला सफल परीक्षण किया है. (फोटोः लॉकहीड मार्टिन)

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DARPA का यह परीक्षण न्यू मेक्सिको के व्हाइट सैंड्स मिसाइल रेंज में किया गया. यानी एक दिन में दो अलग-अलग जगहों पर दो अलग-अलग प्रकार के हाइपरसोनिक हथियारों का सफल परीक्षण किया गया. हालांकि इन हथियारों के उत्पादन, रिसर्च और परीक्षणों पर लगने वाली लागत को लेकर पूरे देश में सवाल उठ रहे हैं. (फोटोः लॉकहीड मार्टिन)

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DARPA ने कहा कि हमारे परीक्षण से यह बात स्पष्ट हो गई है कि तेजी से चलने वाले दुश्मन को टारगेट करने के लिए ये हथियार बेहद सटीकता से काम करेंगे. अगर कम समय में दुश्मन को खत्म करना है तो इससे बेहतर हथियार नहीं हो सकते. वहीं, लॉकहीड मार्टिन चाहती है कि वह अपने हाइपरसोनिक मिसाइलों के लिए DARPA के हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम यानी हिमार्स (HIMARS) का उपयोग करे. इनका उपयोग फिलहाल यूक्रेन कर रहा है. (फोटोः लॉकहीट मार्टिन)

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अमेरिका कुछ साल पहले हाइपरसोनिक हथियारों (Hypersonic Weapons) के विकास के मामले में रूस से पिछड़ रहा था. फिर उसने तेजी दिखाते हुए हथियार विकसित किए और अपने जंगी जहाजों पर तैनात कर दिया. अमेरिका अब भी इन हथियारों को विकसित कर रहा है. लेकिन रूस ने तो दिखा दिया कि उसके पास हाइपरसोनिक मिसाइल हैं. उसने उनका उपयोग यूक्रेन पर कर भी दिया. (फोटोः लॉकहीड मार्टिन) 

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अमेरिकी सेना अब ऐसे हाइपरसोनिक हथियारों के विकास में लगा है, जो लॉन्च तो होगा बैलिस्टिक मिसाइल की गति से लेकिर टारगेट को हिट करने से पहले वह आवाज की गति (Speed of Sound) से सात-आठ गुना ज्यादा गति हासिल करके हाइपरसोनिक हो जाए. इसके बाद सीधे दुश्मन के टारगेट को ध्वस्त कर दे. ऐसी तकनीक का परीक्षण अमेरिकी नौसेना के जमवॉल्ट क्लास डेस्ट्रॉयर्स में किया जा रहा है. 

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हाइपरसोनिक हथियार मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं. पहला- ग्लाइड व्हीकल्स यानी हवा में तैरने वाले. दूसरा- क्रूज मिसाइल. अभी दुनिया का फोकस ग्लाइड व्हीकल्स पर है. जिसके पीछे छोटी मिसाइल लगाई जाती है. फिर उसे मिसाइल लॉन्चर से छोड़ा जाता है. एक निश्चित दूरी तय करने के बाद मिसाइल अलग हो जाती है. उसके बाद ग्लाइड व्हीकल्स आसानी से उड़ते हुए टारगेट पर हमला करता है. इन हथियारों में आमतौर पर स्क्रैमजेट इंजन लगा होता है, जो हवा में मौजूद ऑक्सीजन का उपयोग करके तेजी से उड़ता है. इससे उसे एक तय गति और ऊंचाई मिलती है. (फोटोः गेटी)

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हाइपरसोनिक मिसाइल (Hypersonic Missile) अमेरिका, रूस और चीन के पास हैं. कहा जाता है कि उत्तर कोरिया भी ऐसी मिसाइल विकसित करने में लगा है. जो धरती से अंतरिक्ष या धरती से धरती के दूसरे हिस्से में सटीकता से मार कर सकते हैं. वैसे भारत भी ऐसी मिसाइल को विकसित करने में जुटा हुआ है. इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया और कुछ यूरोपीय देशों के बारे में भी बीच-बीच में चर्चा होती रहती है. (फोटोः रॉयटर्स)

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भारत हाइपरसोनिक ग्लाइडर हथियार बना रहा है, उसका परीक्षण भी कर चुका है. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने मानव रहित स्क्रैमजेट का हाइपरसोनिक स्पीड फ्लाइट का सफल परीक्षण साल 2020 में किया था. इसे एचएसटीडीवी (हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल- Hypersonic Technology Demonstrator Vehicle) कहते हैं. हाइपरसोनिक स्पीड फ्लाइट के लिए मानव रहित स्क्रैमजेट प्रदर्शन विमान है. जो विमान 6126 से 12251 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से उड़े, उसे हाइपरसोनिक विमान कहते हैं. (फोटोः डीआरडीओ) 
 

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भारत के एचएसटीडीवी (HSTDV) का परीक्षण 20 सेकंड से भी कम समय का था. हालांकि, फिलहाल इसकी गति करीब 7500 किलोमीटर प्रति घंटा थी, लेकिन भविष्य में इसे घटाया या बढ़ाया जा सकता है. इस यान से यात्रा तो की ही जा सकती है, साथ ही दुश्मन पर पलक झपकते ही बम गिराए जा सकते हैं. या फिर इस यान को ही बम के रूप में गिराया जा सकता है.