शिल्पकार पॉल बैलीकर ने लकड़ी से इतनी खूबसूरत कलाकृति बनाई हैं कि देखने वाले दांतों तले अंगुलियां दबा लें. इसे बनाने में 59 वर्षीय बैलीकर को छह महीने का वक्त लगा. इस कलाकृति को मैक्सिको से इकट्ठा की गई लकड़ियों से बनाया गया है, जिसे 'ए मैटर ऑफ' टाइम' नाम दिया है. आगे की तस्वीरों में हम आपको इस कलाकृति के अलग-अलग हिस्सों से रू-ब-रू कराएंगे.
इस कलाकृति में बैलीकर ने गेंडे के सिर को बखूबी लकड़ी पर उकेरा है.
लकड़ी से बना यह मेढक तो अपने आप में बेहद खूबसूरत है.
इस तस्वीर में देखिए किस तरह बैलीकर ने कितनी बखूबी पानी में रहने वाली डॉलफिन को लकड़ी में उकेरा है.
इस तस्वीर को देखकर आपको घर बैठे-बैठे समुद्र के किनारे खड़े होने का आभास हो जाएगा. ऐसा लग रहा है मानो यह केकड़ा लकड़ी का नहीं, बल्कि असली हो.
इस तस्वीर में आप केकड़े के एक-एक अंग को साफतौर पर देख सकते हैं.
इस तस्वीर में देखिए बैलीकर ने किस खूबसूरती से लकड़ी की इस चिड़िया को जीवंत कर दिया है.
बैलीकर ने चील की एक-एक बारीकी को बहुत खूबरसूरती से उतारा है.
बैलीकर कहते हैं, 'मुझे उम्मीद है कि इन कलाकृतियों के जरिए मैं जो संदेश देना चाहता हूं उसे लोग जरूर समझेंगे. मैं बताना चाहता हूं कि धरती का भविष्य मनुष्य के हाथों में ही है.'
बैलीकर ने जिराफ को लकड़ी पर उकेरा है.
इस तस्वीर में आप लकड़ी के तेंदुए की एक-एक मांस पेशी देश सकते हैं.
बैलीकर कहते हैं, 'इन कलाकृतियों को देखने के बाद कई दर्शकों की आंख में आंसू छलक आए.'
इस कलाकृति को बनाने में बैलीकर को छह महीने का वक्त लग गया.
बैलीकर के मुताबिक, 'मैं पिछले 15 सालों से ऐसी कलाकृति बनाना चाहता था.'
ऐसा लग रहा है मानो हिरण पेड़ की शाखाओं के बीच से झांक रहा है.
बैलीकर कहते हैं कि वह अपनी कलाकृति को मानव जाति की भलाई की ओर केंद्रित करना चाहते थे.
बैलीकर बताना चाहते हैं कि हमारी धरती का भविष्य मनुष्य के हाथों में है.
बैलीकर ने अपनी इस कलाकृति को 'ए मैटर ऑफ' टाइम' नाम दिया है.