फिलिस्तीनियों पर हवाई हमले को लेकर तुर्की के बाद पाकिस्तान वो दूसरा देश है जो इजरायल के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय को लामबंद करने में जुटा हुआ है. पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी संयुक्त राष्ट्र संघ की आमसभा में इस मुद्दे पर समर्थन जुटाने के लिए तुर्की रवाना हो रहे हैं. तुर्की में वह फिलिस्तीन और सूडान के विदेश मंत्रियों से भी मिलेंगे. इससे पहले, उन्होंने सऊदी अरब के विदेश मंत्री से बात करके फिलिस्तीन के साथ खड़े होने का ऐलान किया था. पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने इस बीच अपने देशवासियों से भी एक अपील भी की है.
शाह महमूद कुरैशी ने संसद की कार्यवाही के दौरान ही पाकिस्तानियों से इजरायल का पुरजोर विरोध करने की बात कही. कुरैशी ने फिलिस्तीनियों पर इजरायल के हवाई हमले के खिलाफ जुमे के दिन शुक्रवार को पूरे पाकिस्तान में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान किया है.
नेशनल असंबेली में इजरायल के अत्याचारों पर चर्चा समाप्त करते हुए कुरैशी ने कहा कि प्रधानमंत्री इमरान खान प्रस्ताव पर सहमत हैं और उनकी रजामंदी के बाद ही वह इसका ऐलान कर रहे हैं. इजरायल के खिलाफ लामबंदी के लिए इजरायल रवाना होने से पहले कुरैशी ने यह ऐलान किया.
डॉन के मुताबिक, विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि पाकिस्तान और तुर्की ने फिलिस्तीनी लोगों पर हमलों के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में जाने का फैसला किया है. उन्होंने बताया कि वह सत्र के बाद तुर्की के लिए रवाना होंगे जहां वह फिलिस्तीनी और सूडानी विदेश मंत्रियों से भी मिलेंगे.
शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा की एक आपातकालीन सत्र बुलाने की मांग की जाएगी जहां वह और उनके तुर्की समकक्ष फिलिस्तीन के लिए आवाज उठाएंगे. गाजा की स्थिति के बारे में बात करते हुए कुरैशी ने कहा कि सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण, फिलिस्तीन में तुरंत सीजफायर लागू किया जाना चाहिए.
फिलीस्तीन के मुद्दे पर 16 मई को दो महत्वपूर्ण बैठकें हुई थीं. एक बैठक मुस्लिम देशों के संगठन इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) की हुई थी जबकि दूसरी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक थी. सुरक्षा परिषद की बैठक की अध्यक्षता चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने की थी.
Resolution Adopted by The Virtual Open-Ended Extraordinary Meeting of The OIC Executive Committee at the Level of Foreign Ministers to Discuss The Aggression by Israel, The Occupying Power, in The Palestinian Territories, in Particular, Al-Quds Al-Shareef: https://t.co/kJ6nRaV5o8 pic.twitter.com/FXlXn5T7Co
— OIC (@OIC_OCI) May 16, 2021
कुरैशी ने फिलिस्तीन पर चीन के रुख की सराहना की है. उन्होंने कहा, "चीन ने सुरक्षा परिषद को एकजुट करने की कोशिश की और सभी सदस्य आश्वस्त थे, लेकिन दुर्भाग्य से अमेरिका इसके लिए राजी नहीं था." हालांकि, उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में ऐसा नहीं किया जा सकता. अमेरिका 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद की तरफ से बयान जारी करने के लिए सहमत नहीं था. हालांकि पाकिस्तान का रुख जाहिर करते हुए कुरैशी ने दोहरे मापडंद को लेकर अमेरिका का नाम नहीं लिया. लेकिन माना जा रहा है कि इजरायल के मुद्दे पर कुरैशी का ये बयान अमेरिका के प्रति पाकिस्तान की नाराजगी को जाहिर करता है.
नेशनल असेंबली में फिलिस्तीन पर बात करते हुए कुरैशी कश्मीर के मुद्दे पर छलांग लगा गए. उन्होंने नेशनल एसेंबली को आश्वस्त किया कि उनकी सरकार फिलिस्तीन और कश्मीर के मुद्दे को कभी नजरअंदाज नहीं करेगी. कुरैशी ने कहा, 'बेशक रास्ता कठिन है, दुनिया दो मुंही है लेकिन सच्चाई का पलड़ा हमेशा भारी रहता है.'
कुरैशी ने बताया कि उन्होंने इस्लामिक सहयोग संगठन की बैठक में इजरायल की करतूतों की कड़ी भर्त्सना की. उन्होंने कहा, 'इस संबंध में मैंने अमेरिका, चीन, सऊदी अरब, तुर्की और फिलिस्तीन सहित विभिन्न देशों के विदेश मंत्रियों से संपर्क साधा है और उन्हें पाकिस्तान के नजरिये से अवगत कराया है.'
विदेश मंत्री ने कहा कि फिलिस्तीन में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन के विरोध में लोग पश्चिमी देशों की राजधानियों में सड़कों पर उतर आए हैं. यूरोपीय देशों में भी प्रदर्शन हो रहे हैं और मंगलवार को यूरोपीय संघ की बैठक बुलाई गई है. कुरैशी ने कहा कि सोशल मीडिया के युग में फिलिस्तीनी आवाजों को जबरन दबाया नहीं जा सकता और मीडिया को चुप नहीं कराया जा सकता.
कुरैशी ने कहा कि पाकिस्तान का साफ मानना है कि इजरायल, जो गाजा में लोगों पर अत्याचार करने पर तुला हुआ है, की तुलना फिलिस्तीनियों से नहीं की जानी चाहिए जो बर्बरता झेल रहे हैं. आज मुस्लिम एकता की परीक्षा है. मानवाधिकार संगठनों को दोहरे मापदंड खत्म करने चाहिए और फिलिस्तीनियों के साथ खड़ा होना चाहिए.
पाकिस्तान के नेशनल अंसबली के निचले सदन ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया. इसमें फिलिस्तीनियों पर इजरायल के बढ़ते हमले और क्रूरता पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है. विदेश मंत्री की तरफ से पेश किए गए प्रस्ताव में फिलिस्तीनी लोगों के खिलाफ हिंसा की कड़ी निंदा की गई है. पाकिस्तान के निचले सदन ने यरुशलम में नामाजियों पर इजरायली हमले की निंदा और शांति बहाली की अपील की है.