कोलकाता नगर निगम (KMC) की मासिक बैठक शुक्रवार को उस समय विवादों में घिर गई, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पार्षदों को मुख्य सभागार बंद मिला. इसके बाद टीएमसी पार्षदों ने निगम की बैठक मुख्य चैंबर के बाहर क्लब रूम में आयोजित की. पार्टी नेताओं के मुताबिक, एस एन बनर्जी रोड स्थित निगम भवन के मुख्य सभागार का दरवाजा सुबह से बंद था. इसके बाद कोलकाता म्युनिसिपल कारपोरेशन की चेयरपर्सन माला रॉय के नेतृत्व में बैठक क्लब रूम में कराई गई.
डिप्टी मेयर और वार्ड नंबर 11 के पार्षद अतिन घोष ने कहा कि सुबह से ही मुख्य चैंबर बंद था. पार्षदों के साथ चर्चा के बाद फैसला लिया गया कि बैठक क्लब रूम में आयोजित की जाएगी. उन्होंने बताया कि पार्षदों ने खुद ही कुर्सी और टेबल की व्यवस्था की और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बैठक शुरू की गई. इस बीच, विधानसभा चुनावों के बाद केएमसी की पहली मासिक बैठक शुक्रवार को होनी थी, लेकिन बुधवार को जारी एक अधिसूचना के जरिए इसे रद्द कर दिया गया था.
हालांकि, केएमसी कमिश्नर कार्यालय की ओर से रद्द करने के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया. टीएमसी के एक पार्षद ने दावा किया कि केएमसी नियमों के तहत मासिक बैठक अनिवार्य है और इसे आयोजित न करना संवैधानिक संकट पैदा कर सकता है. उनका कहना था कि नगर निगम के सुचारु संचालन के लिए मासिक बैठक बेहद जरूरी है. कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने पूरे घटनाक्रम को निर्वाचित प्रतिनिधियों का गंभीर अपमान बताया.
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उन्होंने कहा कि यह एक खतरनाक परंपरा की शुरुआत है और कोई भी व्यक्ति मनमाने तरीके से सदन को बंद या खोल नहीं सकता. उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह चेयरपर्सन की जिम्मेदारी है और जो कुछ हुआ वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. हकीम ने बैठक में शामिल पार्षदों का धन्यवाद करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा की लड़ाई जारी रहेगी. टीएमसी नेताओं के एक वर्ग ने आरोप लगाया कि केएमसी के एक अधिकारी ने पहले बैठक स्थगित करने का नोटिस जारी किया और बाद में उसका तबादला कर दिया गया.
बाद में पार्टी ने न्यू मार्केट पुलिस स्टेशन में मुख्य चैंबर बंद रहने को लेकर शिकायत भी दर्ज कराई. टीएमसी नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि चेयरपर्सन के निर्देश के बावजूद चैंबर नहीं खोला गया. वहीं भाजपा पार्षदों ने इस बैठक को अवैध बताते हुए विरोध प्रदर्शन किया. भाजपा पार्षद सजल घोष, मीना देवी पुरोहित, संतोष पाठक और विजय ओझा ने अलग बैठक कर टीएमसी की कार्रवाई पर सवाल उठाए. भाजपा नेताओं का कहना था कि जब आधिकारिक तौर पर बैठक रद्द कर दी गई थी, तब इस तरह बैठक आयोजित करने का कोई कानूनी आधार नहीं है.
सजल घोष ने आरोप लगाया कि नगर निगम कोई तृणमूल कांग्रेस का पार्टी कार्यालय नहीं है और सदन की बैठक नियमों के अनुसार ही बुलाई जानी चाहिए. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षी पार्षदों को बैठक में आमंत्रित नहीं किया गया और कहा कि जब तक इस अवैध कार्रवाई पर जवाब नहीं मिलता, भाजपा सदन को चलने नहीं देगी. भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि बैठक के दौरान राष्ट्रगान और राज्य गीत नहीं गाया गया.